जापान में भूकंप व सुनामी के 10 साल, राजदूत सतोशी सुजुकी ने की NDRF की तारीफ

नई द‍िल्ली। जापान के राजदूत सतोशी सुजुकी ने गुरुवार को एक पत्र लिखकर भारत और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) को धन्यवाद दिया है। यह पत्र उन्होंने 11 मार्च 2011 को जापान में आए भूकंप और प्रलंयकारी सुनामी के बाद एनडीआरएफ टीम द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्य के लिए लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि ”एनडीआरएफ के साहसी बचाव मिशन को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।”

जापानी राजदूत की तरफ से एनडीआरएफ टीम के सभी 46 सदस्यों को व्यक्तिगत तौर पर यह पत्र भेजा गया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि ”ओनागावा शहर में 14.8 मीटर ऊंची सुनामी में 85% इमारतें बह गईं थी और 800 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी था। उस जगह पर अपनी पहली विदेशी तैनाती में एनडीआरएफ के 46 सदस्यों ने राहत एवं बचाव का उत्कृष्ट कार्य किया। उनके इस समर्पण ने ओनागावा के लोगों पर एक मार्मिक छाप छोड़ी है।”

एनडीआरएफ टीम की याद में बनाया मेमोरियल
भूकंप और सूनामी से तबाह हुए ओनागावा के पुनर्निमाण के बाद वहां की सरकार ने भारत की एनडीआरएफ की टीम के कार्यों को याद करते हुए एक मेमोरियल बनाया है। जिसमें एनडीआरएफ द्वारा किए गए राहत और बचाव की गतिविधियों को मेमोरियल की दीवारों पर उकेरा गया है, जिससे जापान की आने वाली पीढ़ियां भारत-जापान संबंध और एनडीआरएफ के कार्यों को हमेश याद रख सकें।

क्या कहते हैं एनडीआरएफ टीम के अधिकारी
आलोक अवस्थी जो कि वर्तमान में आरएफ के डीआईजी हैं एवं उस समय एनडीआरएफ में डेप्यूटेशन पर थे और टीम का नेतृत्व कर रहे थे। उनका कहना है कि ”इस सम्मान के लिए जापान के राजदूत एवं वहां के लोगों का धन्यवाद। इस बात से खुशी मिलती है कि जापान के लोग 10 साल बाद भी हमारी टीम के कार्यों को याद कर रहे हैं।”

माइनस 2 डिग्री के तापमान में टीम ने किया था काम
11 मार्च 2011 को जापान में प्रशांत तट पर तोहोकू के पास समुद्र में रिक्टर पैमाने पर 9 तीव्रता के भीषण भूकंप के बाद सुनामी ने भयंकर तबाही मचाई थी, जिसमें 19 हजार से ज्यादा लोगों की मौत के साथ ही संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद भारत ने मदद के लिए एनडीआरएफ के 46 सदस्यों की एक टीम भेजी थी, जिसने 26 मार्च से 7 अप्रैल तक राहत एवं बचाव का कार्य किया। इस टीम ने माइनस 2 डिग्री के तापमान में काम करते हुए मलबे में दबे सात शवों को खोजा था। टीम के सदस्य राशन बचाने के लिए दिन में एक बार खाना खाते थे। यही नहीं जब टीम वहां कार्य कर रही थी, तो उस समय भी आफ्टर शॉक आ रहे थे।

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