विश्‍वभर के भारतीय दूतावासों में आज मनाया गया विश्व हिंदी दिवस

विश्व हिंदी दिवस दुनियाभर के भारतीय दूतावास में मनाया जाता है। पहला हिंदी दिवस नॉर्वे के भारतीय दूतावास ने मनाया गया। बाद में दूसरा और तीसरा हिंदी दिवस भारतीय नॉर्वे सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वाधान में लेखक सुरेश चन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ था।

विश्व में हिन्दी का विकास करने और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के तौर पर इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई थी।

पूर्व प्रधानमंत्री डाॅक्टर मनमोहन सिंह ने यूपीए की सरकार में साल 2006 को विश्व हिंदी दिवस की घोषणा की गई।

प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। पहले विश्व हिंदी सम्मेलन (World Hindi Day 2022) का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

विश्व हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्‍य विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को अन्तराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है।

विश्व हिंदी दिवस 1975 में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है. 1975 से विभिन्न देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो ने विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया था।

 प्रस्‍तुत है डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ द्वारा रचित  विश्‍व हिन्‍दी दिवस पर ये गीत

हर रोज रंग अपना, गुलशन बदल रहा है।
घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।।

सूरज नियम से उगता,
चन्दा नियम से आता।
कल-कल निनाद करता,
झरना ग़ज़ल सुनाता।
पतझड़ के बाद अपना, उपवन बदल रहा है।
घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।।

उड़ उड़के आ रहे हैं,
पंछी खुले गगन में।
परदेशियों ने डेरा,
डाला हुआ चमन में।
आसन वही पुराना, शासन बदल रहा है।
घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।।

महफिल में आ गये हैं,
नर्तक नये-नवेले।
बेजान हैं तराने,
शब्दों के हैं झमेले।
हैरत में है ज़माना, दामन बदल रहा है।
घर-द्वार तो वही है, आँगन बदल रहा है।।

Literature Desk – Legend News

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