रिव्यू पिटीशन खारिज होने पर जफरयाब जिलानी ने कहा, यह दुर्भाग्‍यपूर्ण

नई दिल्‍ली। अयोध्या मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सभी दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने इसे जहां दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, वहीं राम जन्म भूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. राम विलास वेदांती ने कहा कि यह कांग्रेस की साजिश थी, जो विफल हो गई।
जिलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारी रिव्यू पिटीशन पर विचार नहीं किया, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘हम अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते कि हमारा अगला कदम क्या होगा? हम अपने वरिष्ठ वकील राजीव धवन से इस बारे में सलाह लेंगे।’ वहीं, बाबरी मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी ने रिव्यू पिटीशन खारिज होने पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि रिव्यू पिटीशन दाखिल ही नहीं करनी चाहिए थी।
अंसारी ने कहा, फैसला देशहित में
अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर को जो फैसला सुनाया था, उसे देशभर में स्वीकार किया गया। कहीं कोई विरोध नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देशहित में रिव्यू पिटीशन को खारिज किया है। अंसारी ने कहा, ‘हम पहले से कोर्ट के फैसले को मान रहे हैं।’
वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अरशद मदनी कोर्ट के फैसले से खुश नहीं हैं। याचिका रद्द होने के बाद उन्होंने कहा कि वह इससे दुखी हैं। मदनी ने कहा कि कोर्ट ने यह माना है कि बाबरी मस्जिद गिराई गई थी और जिन्होंने इसे गिराया था वह दोषी हैं लेकिन कोर्ट ने फैसला भी उनके पक्ष में दिया।
‘रिव्यू पिटीशन कांग्रेस की साजिश थी’
उधर, पूर्व सांसद और रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य रामविलास वेदांती ने कहा कि यह कांग्रेस की साजिश थी जो विफल हो गई। उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया वह देश हित में है और उसमें कोई खामी नहीं है। देश के हर वर्ग को उसे मानना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि रिव्यू याचिका दायर करने के पीछे लंबी साजिश थी कि देश में अस्थिरता बनी रहे।
निर्मोही अखाड़े ने किया फैसले का स्वागत
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने भी फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि 9 नवंबर का आदेश मंदिर के पक्ष में है और हमने उसका सम्मान करते हुए रिव्यू पिटीशन दाखिल नहीं किया। दास ने कहा कि उन्होंने पहले ही कह दिया था कि गुपचुप तरीके से दाखिल याचिका खारिज हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और हम इसका स्वागत करते हैं।
वीएचपी ने किया अभिनंदन
वीएचपी की ओर से आई प्रतिक्रिया में कहा गया कि रामलला आज पूरी तरह से न्यायिक परिधि से आजाद हो गए। परिषद के प्रवक्ता शरद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर रामलला को निर्विवाद रूप से कपड़े के मंदिर से निकाल कर भव्य और दिव्य मंदिर में विराजमान करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। गौरतलब है कि बीते 9 नवंबर को अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामलला को देने का आदेश दिया था।
-एजेंसियां

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