आप हिल जाएंगे धर्म के नाम पर चल रही इन कुप्रथाओं के बारे में जानकर

धर्म के नाम पर कई कुप्रथाएं ऐसी चल रही हैं जिसे सुनकर आप हिल जाएंगे। आइए आज आपको ऐसी ही कुप्रथाओं के बारे में बताते हैं…
महिलाओं का खतना
भारत के बोहरा समुदाय के बीच महिलाओं के खतना की प्रथा पाई जाती है। मिस्र के कुछ समुदाय और अफ्रीका के कुछ हिस्से में भी महिलाओं का खतना किया जाता है। एक वक्त इराक के कुर्द इलाके में बच्चियों/महिलाओं के बीच खतना बहुत सामान्य बात थी। लेकिन एक अभियान ने काफी हद तक इस संबंध में महिलाओं की सोच बदली है।
हवा में दफनाना
तिब्बत, चिंघाय, सिचवन के साथ-साथ मंगोलिया और भूटान के कुछ हिस्से में अंतिम संस्कार की यह प्रथा पाई जाती है। इस प्रथा में इंसान के शव को दफनाया नहीं जाता है बल्कि पहाड़ी पर खुद से सड़ने-गलने या जानवरों के भक्षण के लिए छोड़ दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे मरने के बाद भी इंसान का सदुपयोग होता है। भारत के सिक्किम और जांसकर घाटी में भी यह प्रथा पाई जाती है।
यहूदियों के बीच कैपारोट
यहूदियों के बीच बुरी आत्मा को भगाने के लिए कैपारोट नाम की प्रथा पर अमल किया जाता है। इस प्रथा में बुरी आत्मा को मुर्गे के शरीर में प्रवेश कराया जाता है। उसके बाद मुर्गे का सिर काट दिया जाता है। मुर्गे का सिर कटने के बाद माना जाता है कि व्यक्ति के शरीर से बुरी आत्मा निकल गई है।
मुर्दा दिवस (डे ऑफ द डेड)
मेक्सिको में डे ऑफ द डेड मनाया जाता है। इस मौके पर लोग अपने प्रियजनों की कब्रों पर जाते हैं। वे कब्रों को साफ करते हैं और कब्रिस्तान में पिकनिक मनाते हैं। कई बार वे मरे हुए व्यक्ति के जिंदगी की मजाकिया घटना को याद करते हैं जिससे माहौल हास्यपूर्ण हो जाता है।
​बिशा
मिस्र और इजरायल में एक खानाबदोश समुदाय पाया जाता है। उनके यहां सच पता करने का बहुत खौफनाक तरीका अपनाया जाता है। जिस शख्स पर झूठ बोलने या किसी अपराध का आरोप होता है, उसे पकड़कर एक जगह लाया जाता है। एक व्यक्ति लोहे की छड़ या चम्मच को खूब गर्म करता है। जब वह बिल्कुल लाल हो जाता है तो उस छड़ या चम्मच को आरोपी को तीन बार चाटने को कहा जाता है। माना जाता है कि जो लोग झूठे होते हैं, उनकी जीभ जल जाती है जबकि सच बोलने वालों को कुछ नहीं बिगड़ता। इस कुप्रथा को बिशा के नाम से जाना जाता है।
खुद को कोड़े मारना
मुहर्रम के जुलूस के दौरान शिया समुदाय के लोग मातम मनाते हैं। मातम के दौरान वे खुद पर जंजीर, कोड़े या खंजर से मारते हैं। ऐसा करने से वे जख्मी हो जाते हैं। ईरान, बहरीन, भारत, लेबनान, इराक और पाकिस्तान में इसे मनाया जाता है।
​सिर काटने की कुप्रथा
दक्षिण अमेरिका में जिवारो जनजाति पाई जाती है। वे दुश्मन को हराने के बाद उनका सिर काट लेते थे। फिर वे सिर से खोपड़ी, हड्डियां, दिमाग और चेहरे की वसा हटा देते थे। बची हुई त्वचा और उससे जुड़े मांस को वे खास जड़ी-बूटी में उबालते थे। उसको सुखाकर लकड़ी के कटोरे या मिट्टी के बर्तन में डाल देते थे। बर्तन की बाहरी सतह पर चारकोल की राख की परत चढ़ा देते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से दुश्मन की आत्मा उसी बर्तन के अंदर फंसी रहेगी और वह उससे बदला नहीं ले पाएगा।
स्नेक हैंडलिंग
ईसाई धर्म के एक समुदाय के बीच एक धार्मिक प्रथा पाई जाती है जिसे स्नेक हैंडलिंग कहते हैं। इसमें प्रार्थना के लिए जमा होने वाले लोग जहरीले सांप को पकड़ कर हवा में उछालते हैं तो कुछ लोग उसे अपने बदन पर रेंगने देते हैं। इन चर्च के सदस्यों का मानना होता है कि ये सांप दरअसल बुरी आत्मा हैं। उनको हैंडल करने का मतलब है कि भगवान बुरी ताकतों से अपने सच्चे भक्त की मदद कर रहे हैं। यह भी माना जाता है कि जो लोग भगवान के सच्चे भक्त होते हैं, उन पर सांप के जहर का कोई असर नहीं होता या सांप उसको कुछ नहीं करता है।
-एजेंसियां

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