Yogi की नेपाल को सीधी चेतावनी, परिणामों के बारे में भी सोच लें

लखनऊ। नेपाल के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi आदित्यनाथ ने पड़ोसी देश को चेतावनी दी है। गोरक्षपीठ के महंत Yogi ने नेपाली सरकार को आगाह करते हुए कहा कि उसे अपने देश की राजनैतिक सीमाएं तय करने से पहले परिणामों के बारे में भी सोच लेना चाहिए। उन्हें यह भी याद करना चाहिए कि तिब्बत का क्या हश्र हुआ?
मुख्यमंत्री ने नेपाल के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते का हवाला दिया और कहा कि भारत और नेपाल भले ही दो देश हों, लेकिन यह एक ही आत्मा हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते हैं, जो सीमाओं के बंधन से तय नहीं हो सकते।
उन्होंने कहा कि नेपाल की सरकार को हमारे रिश्तों के आधार पर ही कोई फैसला करना चाहिए। अगर वह नहीं चेता तो उसे तिब्बत का हश्र याद रखना चाहिए।
क्या है विवाद
बता दें कि दोनों देशों में विवाद नेपाली कैबिनेट की ओर से पास किए गए नए राजनीतिक नक्शे को लेकर है। इस मानचित्र में भारतीय क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है। भारत के उत्‍तराखंड राज्य के बॉर्डर पर नेपाल-भारत और तिब्‍बत के ट्राई जंक्‍शन पर स्थित कालापानी करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। भारत का कहना है कि करीब 35 वर्ग किलोमीटर का यह इलाका उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्‍सा है जबकि नेपाल सरकार का कहना है कि यह इलाका उसके दारचुला जिले में आता है।
नाथ पंथ के रास्ते सुलझेगा विवाद
नेपाल के इस फैसले में चीन का दखल माना जा रहा है। हालांकि, दोनों देश मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश में हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपाल से संबंध ठीक रखने हैं तो इसका एक सरल मार्ग गुरु गोरखनाथ का नाथ पंथ भी हो सकता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर इसमें सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह वह सूत्र है जिससे बंधकर नेपाल की जनता और वहां का शासक वर्ग हमसे अलग होने के बारे में सोच भी नहीं सकता।
नेपाल शाही परिवार गुरु गोरखनाथ को अपना राजगुरु मानता रहा है। नेपाल और नाथ पंथ एक-दूसरे में ऐसे रचे-बसे हैं कि शासक वर्ग भले चीन की भाषा बोलने लगे लेकिन नेपाल की जनता हमेशा भारत के स्‍वर में ही स्‍वर मिलाकर बोलेगी।
-एजेंसियां

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