योगी जी! विवेकशून्य अधिकारियों की ये करतूत को भी देख‍िए…

मथुरा। भगवान श्रीकृष्‍ण की जन्मभूमि मथुरा आदिकाल से तीर्थ है। मथुरा की सप्तपुरियों में गणना है। इसके बाद भी 72 वार्ड वाली मथुरा पुरी के केवल 22 वार्ड ही तीर्थस्थल घोष‍ित क्‍यों क‍िए गए।

ब्रज की आत्‍मा यहां की संस्‍कृत‍ि है , भाषा है परंतु इस ओर प्रदेश सरकार का सदैव उपेक्षा का भाव रहा है। इसी संदर्भ में पद्मश्री मोहन स्वरूप भाटिया ने कल मथुरा आ रहे मुख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ को एक पत्र ल‍िखा है ज‍िसमें ब्रज की उपेक्षा को उद्धृत क‍िया गया है।

पद्मश्री भाट‍िया ने आगे ल‍िखा है क‍ि सच तो ये है क‍ि मथुरा को तीर्थस्थल के रूप में न तो अमान्य किया जा सकता है और न किसी को उसकी सीमाओं में परिवर्तन का अधिकार है किन्तु आपके विवेकशून्य अधिकारियों ने 72 वार्ड की मथुरा के 22 वार्डों को तीर्थस्थल घोष‍ित किया है। इसके कारण सम्पूर्ण ब्रज में असन्तोष की चिंगारी प्रज्ज्वलित हो रही है जो निकट चुनावों में अर्न्तज्वाला के रूप में विस्फोट बन सकती है।

भाषा की उपेक्षा तो इस हद तक है क‍ि उत्तर प्रदेश में उर्दू अकादमी है, सिन्धी अकादमी है, पंजाबी अकादमी है किन्तु सबसे प्रमुख- मिठलौनी ब्रजभाषा की ही अकादमी नहीं है।

उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी आदि किसी अकादमी में भी ब्रज का प्रतिनिधि तक नहीं है।

उपरोक्त सम्बन्ध में आपको अनेक ज्ञापन दिए गए हैं किन्तु कोई परिणाम नहीं न‍िकला। इतना ही नहीं प्रदेश के संस्कृति विभाग में तो भ्रष्‍टाचार की पराकाष्‍ठा है जिसके कारण ब्रज के साहित्यकार – कलाकार आदि सम्मान, पुरस्कार से वंचित है।

दस दिवसीय ब्रज-रज-उत्सव का आप शुभारम्भ करने आ रहे हैं। इसमें सभी दिन प्रमुखत: बॉलीवुड कलाकारों के कार्यक्रम हैं जबक‍ि ब्रज के कलाकारों की पूर्णत: उपेक्षा की गई है। आप इन सभी बिन्दुओं से अनभिज्ञ हैं किन्तु इनके असंतोष का क्या प्रभाव होगा, आप अनुमान लगा सकते हैं। अत: सम्मानपूर्वक निवेदन है कि मेरे पत्र पर गम्भीरतापूर्वक विचार करने की कृपा करें।
– Legend News

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