योगी जी…लेकिन वैध कॉलोनियों के अवैध निर्माणों पर कार्यवाही कब?

कल एक खबर पढ़ने को मिली। इस खबर के मुताबिक अवैध कॉलोनियों को वैध न कराने वालों के खिलाफ योगी सरकार विधिक कार्यवाही करेगी और इसके लिए विकास प्राधिकरणों ने कदम उठाना भी शुरू कर दिया है।
कार्यवाही के तहत पहले चरण में ऐसी कॉलोनियां बनाने वालों को नोटिस दिया जाएगा और दूसरे चरण में विधिक कार्यवाही की जाएगी।
खबर पर भरोसा करें तो योगी सरकार ने प्रदेशभर में ऐसी 3074 कॉलोनियों को चिन्‍हित किया है और उनमें से 2675 को विकास प्राधिकरण से नोटिस जारी किया जा चुका है।
कहां कितनी अवैध कॉलोनियां
खबर के अनुसार आगरा में 224, अलीगढ़ में 167, अयोध्या में 17, बागपत में 92, बरेली में 187, बुलंदशहर में 33, फिरोजाबाद में 60, गाजियाबाद में 321, गोरखपुर में 25, हापुड़ में 79, झांसी में 34, कानपुर में 197, लखनऊ में 194, मथुरा में 220, मेरठ में 308, मुरादाबाद में 189, मुजफ्फरनगर में 37, सहारनपुर में 166 और उन्नाव में 30 अवैध कालोनियां हैं।
योगी सरकार का कदम सराहनीय लेकिन…
इसमें कोई दो राय नहीं कि योगी सरकार का ये कदम सराहनीय एवं स्‍वागत योग्‍य है क्‍योंकि इससे अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को जहां जरूरी सुविधाएं प्राप्‍त होंगी वहीं बिल्‍डर से सरकार को अच्‍छा-खासा डेवलपमेंट चार्ज मिलेगा, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल यह भी पैदा होता है कि जब ये अवैध कॉलोनियों खड़ी हो रही होती हैं, तब विकास प्राधिकरण क्‍यों चुप्‍पी साधकर बैठ जाता है?
पांचों उंगलियों घी में, और सिर कढ़ाई में
सच पूछें तो विकास प्राधिकरण की मर्जी के बिना पूरी अवैध कॉलोनी तो क्‍या, किसी मकान या दुकान तक का अवैध निर्माण नहीं कराया जा सकता। विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को अपने क्षेत्र में होने वाले ऐसे प्रत्‍येक निर्माण की पूरी जानकारी होती है किंतु वो आंखें बंद किए बैठे रहते हैं क्‍योंकि वही निर्माण उनकी अतिरिक्‍त आमदनी का बड़ा जरिया बनते हैं।
हकीकत तो यह है कि किसी भी प्रकार का वैध निर्माण कराना भी तभी संभव है जब विकास प्राधिकरण में ऊपर से नीचे तक सेटिंग कर ली गई हो अन्‍यथा इतने रोड़े अटकाए जाते हैं कि वैध काम भी अवैध लगने लगता है।
ऐसा नहीं है कि ये स्‍थिति प्रदेश में किन्‍हीं चार-छ: जिलों के विकास प्राधिकरण की हो, हर जिले का यही हाल है और इसलिए सभी जगह जिलों से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का अपना विकास हो रहा है।
यही कारण है कि सरकार द्वारा चिन्‍हित अवैध कॉलोनियों की संख्‍या एक-एक जिले में सैकड़ों तक जा पहुंची है और प्रदेश में यह संख्‍या तीन हजार से अधिक पायी गयी है।
वैध कॉलोनियों में अवैध निर्माण का क्‍या?
योगी सरकार ने संभवत: फिलहाल इस ओर ध्‍यान ही नहीं दिया कि जितनी बड़ी संख्‍या प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की है, उससे कई गुना अधिक संख्‍या उन कॉलोनियों की है जो खड़ी तो विकास प्राधिकरण से अप्रूवल लेकर की गईं परंतु अब वहां के निवासी अपनी सुविधानुसार मनमाना निर्माण कार्य कराए चले जा रहे हैं लेकिन उन्‍हें कोई टोकने वाला तक नहीं है।
किसी की शिकायत पर यदि विकास प्राधिकरण से कोई जेई या एई आता भी है तो वह अपने चाय-पानी का बंदोस्‍त करके चलता बनता है और शिकायतकर्ता दुश्‍मनी पालकर बैठने पर मजबूर हो जाता है लिहाजा वैध कॉलोनियों में लगातार हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत करने से पहले किसी को भी दस बार सोचना पड़ता है।
इन वैध कॉलोनियों के अवैध निर्माण पर नजर डालें तो एक ओर जहां तीन-तीन और चार-चार मंजिलों तक ऊँचे भवन दिखाई देंगे वहीं चौबीसों घंटे की पानी की सप्‍लाई के बावजूद अधिकांश घरों में नलकूप के लिए बोरिंग भी देखने को मिलेगी। बहुमंजिला इमारतों की बात करें तो वहां फ्लैट लेने वाले अपनी सुविधा से जैसा चाहे वैसा परिवर्तन निर्माण कार्य में कराते रहते हैं, बिना यह सोचे-समझे कि उनके द्वारा की जाने वाली तोड़-फोड़ कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।
एक उदाहरण: मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण
वैध कॉलोनियों में बेहिसाब अवैध निर्माण कार्य देखना हो तो योगी सरकार अपने किसी नुमाइंदे को मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के दायरे में आने वाली अप्रूव्‍ड कॉलोनियों का मुआयना करने भेज सकती है। हालांकि प्रदेशभर का हाल कमोबेश ऐसा ही है।
पचास-पचास और साठ-साठ एकड़ में फैलीं इन वैध कॉलोनियों के निवासी बिना किसी रोक-टोक के न सिर्फ अट्टालिकाएं खड़ी किए जा रहे हैं बल्‍कि नलकूप की बोरिंग करा-कराकर जमीन को इतना खोखला भी कर रहे हैं कि निकट भविष्‍य में वह बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।
सवाल तो यह भी…
इन हालातों में सवाल तो यह भी बनता है कि योगी सरकार जितना ध्‍यान अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने पर दे रही है, उतना ध्‍यान उसे क्‍या वैध कॉलोनियों में हो रहे अवैध निर्माण पर नहीं देना चाहिए?
अवैध कॉलोनियां ही क्‍यों… उन सभी मॉल, मैरिज होम्‍स, मार्केट, शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स, होटल, गेस्‍ट हाउसेस आदि के खिलाफ भी सख्‍त कार्यवाही की जानी चाहिए जिन्‍होंने सुविधा शुल्‍क देकर पार्किंग की जगह दिए बिना अपने नक्‍शे पास करा लिए हैं और जो आज आमजन की राह में कांटे बन चुके हैं। शादियों के दिनों में इनके सामने से निकलना तक दूभर होता है लेकिन ये किसी की परवाह किए बगैर अपना धंधा करते रहते हैं।
बेहतर होगा कि योगी सरकार अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने के साथ-साथ इस ओर भी ध्‍यान दे ताकि भविष्‍य में न तो कोई अवैध कॉलोनी खड़ी करने की हिमाकत कर सके और न किसी वैध कॉलोनी में अवैध निर्माण करा पाए।
ठीक यही नियम तमाम व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठानों पर भी लागू हो, क्‍योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता और फोकस सिर्फ अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने पर रहता है तो आगे आने वाले समय में वैध कॉलोनियों के अंदर हो रहा अवैध निर्माण भी प्रदेश सरकार के सामने चुनौती के रूप में खड़ा होगा। फिर ये चुनौती बड़ी भी होगी और भारी भी।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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