योगी सरकार का निर्णय: नाव हादसे और सर्पदंश भी आपदा की श्रेणी में शामिल

लखनऊ। मुंख्‍यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ ने नाव हादसे और सर्पदंश को आपदा की श्रेणी में शाम‍िल कर ल‍िया है। इस बात की घोषणा उन्‍होंने यूपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में की। उन्‍होंने कहा सर्पदंश और नाव हादसे के पीड़‍ित पर‍िवारों को मुआवजे में चार लाख रुपये द‍िए जाएंगे। वहीं आपदा से निपटने की पूर्व तैयारी के तौर पर प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए सीएम स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम शुरू होगा। बाढ़ प्रभावित और सूखा प्रभावित जिलों में इस कार्यक्रम का विशेष जोर होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आपदाओं से निपटने के लिए निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक सुरक्षा कार्यक्रम बनाने को कहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत शिक्षण और प्रशिक्षण को आपदा से लड़ने का हथियार बनाया जाएगा। स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर्स ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर शिक्षकों को आपदा से बचाव के लिए प्रशिक्षित करेंगे। हर विद्यालय पर इनमें से एक शिक्षक नोडल ट्रेनर नियुक्त किया जाएगा, जो बच्चों को सुरक्षा और राहत का पाठ पढ़ाएगा। बाढ़, सूखा और वज्रपात प्रभावित जिलों में इस कार्यक्रम पर खास जोर होगा।
वज्रपात प्रभावित जिलों के लिए भी योजना
प्रदेश में हर साल 300 से अधिक मौतें बिजली गिरने से होती हैं। देश में यह आंकड़ा सर्वाधिक है। राहत आयुक्त संजय कुमार ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़े के आधार पर उन जिलों और स्थलों को चिह्नित किया जाएगा जहां पर वज्रपात की घटनाएं सर्वाधिक हैं। यहां मुख्यमंत्री वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। गे। वज्रपात प्रभावित क्षेत्रों में लाइट अरेस्टर लगाया जाएगा। इसके डेढ़ किमी की परिधि में वज्रपात का असर नहीं होता है। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा मित्र तैयार किए जाएंगे।
अग्नि आपदा सुरक्षा में लखनऊ बनेगा मॉडल
मुख्यमंत्री ने अग्नि आपदा सुरक्षा और अन्य आपदाओं में राहत प्रबंधन के लिए लखनऊ को मॉडल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अग्निशमन विभाग के साथ बैठक कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। भवनों को ‘स्टेट ऑफ आर्ट’ के तौर पर विकसित किया जाएगा। आम तौर पर किसी भी आपदा में सबसे पहले अग्निशमन विभाग के ही कर्मचारी पहुंचते हैं। इसलिए उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण के साथ आधुनिक उपकरणों से भी लैस किया जाएगा। गलियों में बड़े वाहनों के प्रवेश की समस्या को देखते हुए मोबाइल फायर टेंडर उपलब्ध करवाए जाएंगे। हर दस किमी पर वॉटर स्टेशन की व्यवस्था की जाएगी।
-एजेंसी

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