मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर गिरफ्तार

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज तड़के दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यस बैंक के को-फाउंडर राणा कपूर को गिरफ्तार कर लिया।
ईडी अधिकारियों ने उनसे करीब 20 घंटे से ज्यादा की पूछताछ की जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
राणा कपूर को सुबह करीब 11 बजे कोर्ट में पेश किया गया। ईडी ने शनिवार को वर्ली में राणा कपूर के समुद्र महल आवास में अपनी जांच जारी रखी। ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यस बैंक प्रमोटर राणा कपूर और उनकी दो बेटियों की डमी कंपनी अर्बन वेंचर्स को घोटालेबाजों से 600 करोड़ रुपये मिले थे।
भ्रष्टाचार में लिप्त डीएचएफएल ने बैंक द्वारा दिए गए 4,450 करोड़ रुपये के लिए इस कंपनी को पैसे दिए थे, जिसकी जांच की जा रही थी।
ईडी अधिकारियों ने कहा कि यस बैंक ने डीएचएफएल को 3,750 करोड़ रुपये का ऋण और डीएचएफएल द्वारा नियंत्रित फर्म आरकेडब्ल्यू डिवेलपर्स को 750 करोड़ रुपये का एक और ऋण किया था।
अधिकारियों के मुताबिक जब इन दोनों कंपनियों ने लोन नहीं चुकाया तो तो यस बैंक ने कार्यवाही शुरू नहीं की। कपूर और उनकी दो बेटियों पर संदेह है, जो डूइट अर्बन वेंचर्स के निदेशक हैं, कि उन्होंने कथित तौर पर कार्यवाही नहीं करने के लिए डीएचएफएल से पैसे लिए।
ईडी को इस बात का संदेह है कि 4,450 करोड़ रुपये की यह राशि, उस 13,000 करोड़ रुपये का हिस्सा है जो डीएचएफएल की ओर से 79 डमी कंपनियों को कथित तौर पर दी गई। इन्ही कंपनयों में अर्बन वेंचर्स भी शामिल है।
ईडी अधिकारियों ने शुक्रवार देर शाम ही राणा कपूर से पूछताछ शुरू कर दी थी। उन्होंने सुबह तक पूछताछ जारी रखी और शनिवार को सुबह 11 बजे के आसपास उन्हें आगे की जांच के लिए बलार्ड एस्टेट में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय में ले गए। इसके बाद उन्हें तड़के 3 बजे गिरफ्तार कर लिया गया।
ईडी के अधिकारियों ने मुंबई और दिल्ली में उनकी तीन बेटियों और प्रभादेवी में यस बैंक के मुख्यालय की भी जांच की। अधिकारियों ने कहा कि बेटियों के बयान दर्ज किए जाएंगे और कपूर परिवार के वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जाएगी।
डीएचएफएल के पूर्व सीएमडी कपिल वधावन भी आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स के प्रमोटरों में से एक हैं। ईडी ने जनवरी में वधावन को एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था, जिस मामले में ड्रग स्मगलर इकबाल मिर्ची के खिलाफ जांच जारी थी। वधावन फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
कौन हैं राणा कपूर
देश के टॉप प्राइवेट बैंकों में शुमार यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर बचपन से ही बिजनेसमैन बनना चाहते थे। राणा ने बैंक ऑफ अमेरिका में पहली नौकरी की थी और भारत में बैंकिंग की शुरुआत राबो के गैर वित्तीय बैंकिंग कंपनी से बिजनेसमैन बनने का सफर शुरू किया था।
उधर, यस बैंक संकट से उसके ग्राहक सकते में हैं। दिवाली के आसपास जहां पीएमसी बैंक के ग्राहक परेशान थे, वहीं होली के समय देश के टॉप प्राइवेट बैंकों में शुमार यस बैंक के ग्राहक अपना पैसे डूबने को लेकर डरे हुए हैं।
अब ईडी ने इसके संस्थापक राणा कपूर को घंटों चली पूछताछ के बाद अरेस्ट कर लिया है।
जन्म, पढ़ाई और परिवार
राणा कपूर का जन्म 9 सितंबर 1957 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता लंबे समय तक एयर इंडिया में पायलट रहे थे और उनके पिता के 3 और भाई थे। राणा ने स्कूली पढ़ाई के बाद न्यू जर्सी की रटगर्स यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। उनकी तीन बेटियां हैं और पत्नी का नाम बिंदू कपूर है। उनके दादा का ज्वैलरी का बिजनेस था। शायद यही वजह थी कि अपने शेयरों को हीरा-मोती कहते थे और उन्हें बेचना नहीं चाहते थे।
अमेरिका के सिटी बैंक में किया काम
रगटर्स यूनिवर्सिटी से एमबीए के दौरान ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था। 1979 में उन्होंने अमेरिका के सिटी बैंक में बतौर इंटर्न अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि वह बैंक आईटी डिपार्टमेंट में काम करते थे। बैंकिंग सेक्टर उन्हें पसंद आया और धीरे-धीरे वह इसमें करियर बनाने की ओर कदम बढ़ाने लगे।
राणा कपूर का पहला जॉब ‘बैंक ऑफ अमेरिका में’
बिजनेसमैन बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्हें एक्सपीरियंस की जरूरत थी। उन्होंने बैंकिंग में करियर बनाने का सोच लिया था तो बैंकिंग का कुछ अनुभव लेने के लिए उन्होंने 1980 में बैंक ऑफ अमेरिका में पहला जॉब किया। उन्होंने करीब 15 साल इस बैंक के साथ काम किया और सेक्टर की हर बारीकी सीखी।
NBFC शुरू करने का प्लान
अब बैंकिंग की अच्छी-खासी समझ डेवलप करने के बाद अपने 5 कलीग्स के साथ मिलकर उन्होंने नॉन-बैंकिंग फाइनैंस (NBFC) शुरू करने का प्लान बनाया, जो अमेरिकी इंश्योरेंस ग्रुप ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने करीब 3 साल उन्होंने एएनजेड ग्रिंडलेज इन्वेस्टमेंट में काम किया। यह समय था 1996 से 1998 का।
1998 में बिजनेसमैन के रूप में शुरू हुआ राणा का सफर
राणा कपूर ने नीदरलैंड के राबो बैंक की एनबीएफसी के सीईओ बन गए। इसमें उनके दो पार्टनर्स थे अशोक कपूर और हरकित सिंह। इसमें तीनों की मिलाकर 25% हिस्सेदारी थी। यह इकाई भारत में स्थापित की गई थी।
2003 में RBI ने दिया बैंकिंग लाइसेंस, पड़ी यस बैंक की नींव
बैंकिंग सेक्टर ने राणा कपूर को एक पहचान तो दी लेकिन बैंक भारत में ज्यादा बड़ी पहचान नहीं बना पा रहा था। इसे देखते हुए राणा और उनके पार्टनर्स ने बैंक में अपना पूरा स्टेक बेच दिया और फिर रखी गई यस बैंक की नींव। यह 2003 की बात है। रिज़र्व बैंक से उन्हें बैंकिंग लाइसेंस मिला और 200 करोड़ रुपये के साथ उन्होंने अशोक कपूर के साथ मिलकर 2004 में यस बैंक की शुरुआत की, जो उनके रिश्तेदार थे।
अशोक कपूर की मौत के बाद शुरू हुई बर्बादी की कहानी
26/11 के मुंबई हमले में अशोक कपूर की मौत हो गई, उसके बाद अशोक कपूर की पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच बैंक के मालिकाना हक को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। मधु अपनी बेटी के लिए बोर्ड में जगह चाहती थीं। कोर्ट से राणा कपूर को जीत मिली। कुछ समय तक सब ठीक चला लेकिन प्रमोटर्स ने बाद में हिस्सेदारी बेचनी शुरू कर दी और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से समझौते के मामले सामने आने लगे।
…और फिर, हर कर्ज को Yes कहना पड़ गया भारी
बैंकिंग जगत में राणा कपूर की पहचान एक ऐसे बैंकर की बनी, जो ऐसे कर्ज देने में भी नहीं हिचकते, जिसकी वसूली मुश्किल हो।
यस बैंक अनिल अंबानी ग्रुप, आईएलएंडएफएस, सीजी पावर, एस्सार पावर, रेडियस डिवेलपर्स और मंत्री ग्रुप जैसे कारोबारी घरानों को कर्ज देने में आगे रहा। बाद में जब ये कारोबारी समूह डिफॉल्टर साबित हुए तो बैंक को करारा झटका लगा। 2017 में बैंक ने 6,355 करोड़ रुपये की रकम को बैड लोन में डाल दिया था। 2018 में आरबीआई ने कपूर पर कर्ज और बैलेंसशीट में गड़बड़ी के आरोप लगाए और उन्हें चेयरमैन के पद से जबरन हटा दिया।
लंबे समय से रडार पर था बैंक
बैंक में जान फूंकने की तमाम कोशिशों के बाद आखिरकार आरबीआई को इसके बोर्ड को भंग करना पड़ा और इसे बचाने के लिए प्रशासक नियुक्त करना पड़ा। इस पर कई पाबंदियां लगाई गईं और ग्राहकों की परेशानियों के बीच घंटों चली पूछताछ के बाद राणा कपूर को अरेस्ट कर लिया गया है। संकट के बीच स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने यस बैंक को बचाने का प्लान पेश किया और उस पर काम भी शुरू कर दिया है। एसबीआई 2,450 करोड़ रुपये में यस बैंक के 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 245 करोड़ शेयर खरीदेगा। एसबीआई संकटग्रस्त यस बैंक में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ले सकता है। हालांकि यस बैंक को 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। SBI ने यस बैंक के कर्मियों को नौकरी न जाने को लेकर आश्वस्त किया है और कहा है कि इन्क्रीमेंट नहीं होगा इस साल।
-एजेंसियां

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