यश भारती पुरस्कार: पेंशन देने के लिए अखिलेश सरकार ने पलट दी थी संस्कृति विभाग की संस्तुति

लखनऊ। अखिलेश सरकार में संस्कृति विभाग ने सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों और पेंशनधारकों को यश भारती पुरस्कार से जुड़ी पेंशन न दिए जाने की संस्तुति की थी, लेकिन अखिलेश मंत्रिमंडल ने विभागीय संस्तुति को पलट दिया था। यह जानकारी संस्कृति विभाग ने डॉ. नूतन ठाकुर की आरटीआई अर्जी के जवाब में द‍ि‍या।
डॉ. नूतन ठाकुर ने बताया कि विभागीय नोटशीट के अनुसार चार अक्टूबर 2015 को संस्कृति विभाग की राज्यमंत्री अरुण कुमारी कोरी द्वारा प्रस्तावित यश भारती पेंशन नियमावली के नियम-3 में सरकारी सेवक, सेवानिवृति पेंशन और अन्य सरकारी पेंशन पाने वालों को यश भारती पेंशन न दिए जाने की बात कही गई थी।
राज्यमंत्री अरुण कुमारी कोरी के आदेश के बावजूद 20 अक्टूबर 2015 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस नियम को विलोपित कर यश भारती पाने वाले सभी लोगों को पेंशन देने का निर्णय लिया गया था।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार में यश भारती और पद्म सम्मान पाने वालों को पेंशन देने के लिए बनी नियमावली में संशोधन किया है और पेंशन की राशि 50 हजार से घटाकर 25 हजार रुपये प्रति माह कर दी है। साथ ही यश भारती से सम्मानित सरकारी सेवकों, सरकार के पेंशनरों और आयकरदाताओं को इस पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। सीएम योगी ने इससे पहले यश भारती पेंशन को बंद करने का निर्णय लिया था, लेकिन बीजेपी के अंदर से बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने पेंशन नियमावली में संशोधन करते हुए यश भारती सम्मान पेंशन की राशि आधी घटाकर इसे चालू रखने का फैसला लिया है।
सरकार ने संशोधन के बाद यश भारती पुरस्कार और पेंशन संबंधी आवेदन की तिथि बढ़ाते हुए 31 जुलाई कर दी है। 31 जुलाई के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनपत्रों पर संस्कृति विभाग द्वारा विचार नहीं किया जाएगा। अखिलेश सरकार में यश भारती और पद्म सम्मान से सम्मानित लोगों के लिए मासिक पेंशन नियमावली-2015 जारी की गई थी। इसके तहत यश भारती सम्मान से सम्मानित लोगों को 50 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती थी लेकिन प्रदेश की सत्ता में परिवर्तन का लाभ मिलने के बजाय यश भारती सम्मानितों को हानि हुई।
योगी सरकार ने इस पेंशन को बंद करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद बीजेपी पदाधिकारियों समेत कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर यश भारती पेंशन दोबारा शुरू करने की मांग की थी। अब सरकार ने यश भारती सम्मान को जारी रखने, लेकिन अखिलेश सरकार में जारी की गई मासिक पेंशन नियमावली-2015 में संधोशन करते हुए मासिक पेंशन नियमावली-2018 जारी कर दी है।
नई नियावली के मुताबिक यश भारती और पद्म पुरस्कारों से सम्मानित ऐसे लोग पेंशन के पात्र नहीं होंगे, जो सरकारी पेंशन पा रहे हों, सरकारी सेवा में कार्यरत हों या आयकर दाता हों। साथ ही आवेदकों की जन्मभूमि और कर्मभूमि उत्तर प्रदेश ही होनी चाहिए। ऐसे पात्र लोगों को जीवन भर प्रतिमाह 25 हजार रुपये पेंशन दी जाएगी। वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में पेंशनर को जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होगा। पेंशन की स्वीकृति के लिए निर्धारित प्रारूप पर निदेशक संस्कृति को आवेदन देना होगा।
-Legend News

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