वाह! उस्ताद वाले उस्‍ताद ज़ाकिर हुसैन का जन्‍मदिन आज 9 मार्च को

Wow! Ustad Zaqir Hussain's Birthday on March 9
वाह! उस्ताद वाले उस्‍ताद ज़ाकिर हुसैन का जन्‍मदिन आज 9 मार्च को

प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन ने कहा है कि सितार सम्राट पंडित रविशंकर का उन्हें उस्ताद कहना उनके जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है, जिसे वे कभी नहीं भूल सकते।

जाकिर हुसैन तबला वादक और संगीत दोनों ही क्षेत्रो के अंतरराष्ट्रिय महारथी है. वे एक शास्त्रीय तबला वादक है जो उत्कृष्ट तरीके से तबला बजाते है, बेहतर तरीके से तबला बजाने की उनकी इस कला ने उन्हें अपने देश भारत में ही नही बल्कि विश्व प्रसिद्धि दिलवाई. जब भी वे तबला बजाते थे तो उससे निकलने वाले संगीत और धुन से काफी अंतर्बोध होता था. वे पूरी निपुणता से अपना तात्कालिक प्रदर्शन करते हुए, अपने तबले की धुन से लोगो के दिलो को छू जाते थे. तबला बजाने की उनकी कला, उनके ज्ञान और अभ्यास को देखकर सभी अचंभित है.

ये ऐसी शख्सियत हैं जिनका परिचय देना मतलब सूर्य को दीपक दिखाने जैसा होगा, लेकिन इनके बारे में कुछ रोचक बातें हैं जिनके बारे में जानना तो बनता है। हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे प्रसिद्ध तबला वादक ज़ाकिर हुसैन की जिनका आज जन्मदिन है। उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1951 को हुआ था। वे भारत के सबसे प्रसिद्ध तबला वादक हैं। आपको बताते चले की ज़ाकिर हुसैन तबला वादक उस्ताद अल्ला रखा के बेटे हैं और ये महाराष्ट्र से हैं।

ज़ाकिर हुसैन का बचपन मुंबई में ही बीता। 12 साल की उम्र से ही ज़ाकिर हुसैन ने संगीत की दुनिया में अपने तबले की आवाज़ को बिखेरना शुरू कर दिया था। प्रारंभिक शिक्षा और कॉलेज के बाद ज़ाकिर हुसैन ने कला के क्षेत्र में अपने आप को स्थापित करना शुरू कर दिया।

पहला एलबम ‘लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड’

1973 में उनका पहला एलबम ‘लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड’ आया था। उसके बाद तो जैसे ज़ाकिर हुसैन ने ठान लिया कि अपने तबले की आवाज़ को दुनिया भर में बिखेरेंगे। 1973 से लेकर 2007 तक ज़ाकिर हुसैन विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समारोहों और एलबमों में अपने तबले का दम दिखाते रहे। ज़ाकिर हुसैन भारत में तो बहुत ही प्रसिद्ध हैं साथ ही विश्व के विभिन्न हिस्सों में भी बेहद लोकप्रिय हैं।

कई फिल्मों के लिए म्यूजिक कंपोज किया

इस्तांबुल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टर्की), 2000 मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (इंडिया) और 2000 नेशनल फिल्म अवॉर्ड (इंडिया) जीता। जाकिर ने कई फिल्मों के लिए म्यूजिक कंपोज किया। उनका नाम दुनिया के मशहूर तबला वादकों में लिया जाता है।
जब उन्हें पद्म श्री का पुरस्कार मिला था तब वह महज 37 वर्ष के थे और इस उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी थे। इसी तरह 2002 में संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण का पुरस्कार दिया गया था। ज़ाकिर हुसैन को 1992 और 2009 में संगीत का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रैमी अवार्ड भी मिला है।
उस्ताद जाकिर हुसैन की जीवनी

https://youtu.be/V75dWWndxRQ

जाकिर हुसैन अपने जीवन में भारतीय फिल्म जगत के कई महान गायन, नृतक और अभिनेताओ के साथ प्रदर्शन किया है. भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास में उनके योगदान को कोई नही भूल सकता, उन्होंने अपने हुनर से भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई. उनके इस योगदान में उनका इतिहासिक योगदान ‘शक्ति’ भी शामिल है, जिसकी स्थापना उन्होंने जॉन मैकलौघ्लीन और एल.शंकर के साथ मिलकर की थी. संगीत और तबला वाद्य के क्षेत्र में उनके इस महान योगदान को देखते हुए अप्रैल 2009 में उन्हें सम्मानित भी किया गया था.

भारत सरकार द्वारा उन्हें 1988 में पद्म श्री और 2002 में उन्हें पद्म भुषण से सम्मानित किया गया था. उन्हें 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है. यही नहीं बल्कि 1999 में उन्हें यूनाइटेड स्टेट नेशनल एंडोमेंट द्वारा कला के क्षेत्र में भी पुरस्कृत किया गया था, जो की किसी भी कलाकार और संगीतकार को मिलने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है.
-Legend News

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