world suicide prevention day: जिंदगी ना मिलेगी दोबारा

जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया ना रखना और हर परिस्थिति को अपनी प्रति प्राप्ति का भाव रखना,ना पाने की स्थिति में नकारात्मक सोच का नजरिया बना लेने से आदमी मनोवैज्ञानिक रूप से अपने आप को इतना कमजोर व कोमल हृदय का महसूस करता है कि वह आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम को उठाकर ईश्वर द्वारा प्रदत 84 योनियों के बाद जन्म की लीला को समाप्त कर देता है |दिन प्रतिदिन मानव के स्वभाव में यह आत्महत्या के भाव को बढ़ते हुए देखते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर आत्महत्या निवारण दिवस के रूप में मानव को जागृत करने के लिए मनाया जाने लगा हैं|

दुनियाभर में एक ओर जहां विभिन्न तरह की बीमारियों से हर साल लाखों लोगों की जान जा रही हैं। वहीं, ऐसे लाखों लोग भी हैं जो किन्हीं वजहों से अपने खुद के जीवन के दुश्मन बन जाते हैं और आत्महत्या जैसा कदम उठते हैं। कोविड-19 के प्रकोप से आज दुनिया बहुत बड़ी मानव त्रासदी से पीड़ित है| ऐसे में आर्थिक रूप से भी विश्व के मानव की कमर तोड़ दी है जो कि आत्महत्या की संख्या में इफ़जा कर रही हैं।

आत्महत्या सुनने भर से ही दिलों दिमाग में अजीब सी बैचेनी होने लगती है। जब सुबह अखबार उठाते हैं तो आत्महत्या की खबरों से दो चार होना ही पड़ता है।पुरी दुनिया में 8 लाख लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाकर समाज की संरचना और सोच पर नए सिरे से बहस को जन्म देते हैं।पूरे विश्व में हर 40 सेकंड में और भारत में हर 15 मिनिट में एक आत्महत्या होती हैं। आत्महत्या के पीछे व आत्मघाती व्यवहार के लिए कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारकों जैसे तलाक, दहेज, प्रेम सम्बंध, वैवाहिक अड़चन, अनुचित गर्भधारण, विवाहेतर सम्बंध, घरेलू कलह, कर्ज, गरीबी, बेरोजगारी, गंभीर बीमारी ,आर्थिक कमजोरी , सरकारी विभागो की निष्कियता और शैक्षिक समस्या आदि प्रमुख कारण होते हैं।

आत्महत्या करने वाले की व्यवहार और क़्रिया में परिवर्तन स्वाभाविक रूप से आता है परंतु आत्महत्या का वह एक सेकंड है जब विचार उत्पन्न होता है और आदमी इतना घातक कदम उठा लेता है | दुनिया में पुरुष को हम लौह पुरुष कहते हैं देखा जाए वही अंदर से कितना कमजोर होता है| यह डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों से पता चलता है की महिलाओं के मुकाबले में पुरुषों की संख्या अधिक है |आप इसे इस तरह से भी कह सकती हैं कि ईश्वर ने और प्रकृति ने नारी को वह क्षमता दी है जो बड़े से बड़े कष्ट को बड़े धैर्य से सामना करती है| आज अगर नारी पुरुष को संबल नही दे तो आत्महत्या के मामले बढ़ जाएँगे |

आज करोना महामारी में अनेक लोग नौकरी जाने के, व्यापार खत्म होने के, कर्जा ना चुका पाना , स्वास्थ्य से काफी चीजों से सामान्य दिनचर्या से अलग परेशानियों का सामना किया |इस समय अनेक चिकित्सकों मनोचिकित्सक व सामाजिक संस्थाओं द्वारा वेब पर व व्हाट्सएप पर फेसबुक पर आदमी के परेशानी में एक संबल व धैर्य दिया और यह बताया कि अगर वह अपने परिवार के साथ ,अपने दोस्तों के साथ ,अपने कार्यस्थल के साथियों से अपनी बातें शेयर करता है यह सब लोग उसके व्यवहार

को सजगता से लेते हैं तो निश्चित हम अपने प्रिय को अपने साथ पाएँगे ।मनोविज्ञनिक कहते है जो अपने शौक को जिंदा रखता है तो वह आदमी आत्महत्या की तरफ सोच भी नहीं सकता है| कहने का तात्पर्य है आपका एक अजीज दोस्त चाहे आपकी पत्नी, बहन , भाई ,दोस्त ,या सहपाठी कार्यस्थल का हो सकता है उनके साथ अगर आप अपनी परेशानियों को शेयर करते हैं तो आत्महत्या जैसे नपुंसक कार्य करने के लिए आप कभी भी प्रेरित नहीं होंगे |
आगरा शहर में 1 हफ्ते पहले 22 साल की इकलौते बेटे ने नीट की परीक्षा के परिणाम से डर के आत्महत्या कर ली वही 3 सप्ताह पहले एक व्यापारी ने कर्ज न चुका पाने के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त की| आंकड़े यह बताते हैं कि जिस तेजी से व्यापारिक लोग अपनी कर्ज न चुका पाने के कारण आत्महत्या कर रहे हैं उन सब को मिलाकर आगरा में हर साल अनेक मामले आत्महत्या के आ रहे हैं|

कई मेट्रोपॉलिटन सिटी में सरकारी अस्पतालों में मन कक्ष की स्थापना से मन की बीमारियों का इलाज व मानसिक परेशानियों की काउंसलिंग करके इस स्थिति में लाने से बचाया जाता है| कई शहरों में तो सप्ताह में दो बार शहर और गांव में इस तरीके के कैंप भी लगाए जाते हैं |आज अगर मनोचिकित्सक समाजिक संगठन समय-समय पर मनोवैज्ञानिक कार्यक्रम करके मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के साथ समाज को भी जागरूक करते हैं कि वह अपने आसपास के रहने वाले प्रिय जनों के व्यवहार में अगर कोई परिवर्तन देखें तो उसके मन में जरूर झांके| यह ना सोचें कि हमें क्या है हम क्यों किसी के दूसरे के घर में जाकर मनोवैज्ञानिकों का यहां तक कहना है कि आपका खान-पान भी आपके विचारों को सकारात्मक विचारों में तब्दील करता है इसलिए हमेशा हमें स्वास्तिक व शुद्ध शाकाहारी भोजन करना चाहिए| ज्यादा से ज्यादा हमें अपने परिवार व दोस्तों के बीच में रहने का प्रयत्न करना चाहिए अकेले रहने से हमें हमेशा बचना चाहिए|
आत्महत्या निवारण दिवस वर्ष 2021 के लिए थीम का विषय बहुत ही सुन्दर रखा गया है क्रिएटिंग होप थ्रू एक्शन अर्थात हम एक दूसरे से प्रतिद्वंदिता तो रखें पर देृष ना रखें तभी हम अपने आसपास के लोगों के साथ अपने प्रिय को एक आशा के साथ जीवित रख पाएंगे|
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस साल 2003 से मनाया जा रहा है। इस दिवस की शुरुआत आईएएसपी (इंटरनेशनल असोसिएशन ऑफ सुसाइड प्रिवेंशन) ने की थी। इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन और मानसिक स्वास्थ्य फेडरेशन को-स्पॉन्सर करते हैं।यह डाटा बताता है कि दुनियाभर में 79 फीसदी आत्महत्या निम्न और मध्यवर्ग इनकम वाले देशों के लोग करते हैं। सबसे चोकने वाला तत्व हैं 15 से 30 वर्ष के युवा जो अपने सोच के अनुरूप परीक्षा परिणाम व कैरीअर की कल्पना करके कदम उठाते हैं|
आत्महत्या निवारण दिवस पर समाज के सभी चिंतनशील व संवेदनशील लोगों को आज कोविड-19 की परिस्थिति में सजगता से एक सजग मनोवैज्ञानिक प्रभारी का फर्ज अदा करना होगा तभी हम ईश्वर द्वारा दी गई जिंदगी को बचा पाएंगे|

– राजीव गुप्ता जनस्नेही कलम से
लोक स्वर, आगरा

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