वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे आज, पत्रकारों के लिए नर्क बन चुकी है दुनिया

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे पूरी दुनिया में आज मनाया जा रहा है। दुनियाभर की नामचीन हस्तियां इस मौके पर पत्रकारों को बधाई दे रही हैं। वैश्विक संगठन यूनेस्को ने ट्वीट कर लिखा- पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। बिना सुरक्षित पत्रकारिता के सुरक्षित सूचना हो नहीं सकती। बिना सूचना के कोई आजादी नहीं होती। आज और रोजाना प्रेस की आजादी के लिए खड़े हों।
भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है मगर हमारे देश में पत्रकारों की स्थिति पिछले कुछ सालों के दौरान बदतर हुई है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 180 मजबूत देशों की सूची में भारत तीन पायदान फिसलकर 136वें नंबर पर आ गया है। इससे पहले भारत 133वें स्थान पर था। इस सूची में पहले नंबर पर जहां नॉर्वे है, वहीं दक्षिण कोरिया सबसे नीचे पायदान पर मौजूद है। पूरी दुनिया में इस समय 193 पत्रकार जेल में हैं।
भारत के पिछले सात सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो परिस्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साल 2012 में 74, 2013 में 73, 2014 में 61, 2015 में 73, 2016 में 48, 2017 में 46 और साल 2018 में अब तक 14 पत्रकारों ने काम के दौरान अपनी जान गंवाई है। यानी सात सालों में 389 पत्रकारों की जान केवल भारत में गई है।
दुनिया पत्रकारों के लिए नर्क वाली जगह बन चुकी है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 21 देशों को काले रंग में दिखाया गया है। जिसका मतलब है कि इन देशों में प्रेस की आजादी बहुत खराब है। वही 51 देशों को खराब स्थिति वाले वर्ग में रखा गया है।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पत्रकारों को प्रेस फ्रीडम की बधाई देते हुए लिखा है- आज भारतीय पत्रकारों के लिए कठिन समय है। ईमानदार और संतुलित आवाजों को झूठ से दबा दिया जाता है। यह बहुत जरूरी है कि हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत बनाया जाए और इसे और निडर बनाने के लिए योगदान दिया जाए।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी पत्रकारों को सूचना का महत्वपूर्ण जरिया बताया है। उन्होंने लिखा- मुक्त और ईमानदार प्रेस लोकतंत्र के रीढ़ है। प्रेस हमेशा से दुनिया भर में सूचना, आलोचना और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। इसलिए प्रेस की स्वतंत्रता आवश्यक है।
यूं तो प्रेस को किसी भी लोकतांत्रिक देश में चौथा स्तंभ माना जाता है लेकिन कई देशों में इस पर सेंसरशिप लगाई हुई है। भारत और अमेरिका में कई बार प्रेस की आजादी को कंट्रोल करने की कोशिश की गई है। इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं, जब पत्रकारिता ने दुनिया को बदला है। कई बड़े पत्रकारों ने अपनी खोजी पत्रकारिता से दुनिया के सबसे ताकतवार शख्स को झुकने के लिए मजबूर कर दिया है।
पुल्तिजर पुरस्कार विजेता पत्रकार सेमॉर हैरेस ने एक बार कहा था, “हम यहां आपको बताने के लिए आए हैं कि कुछ बदलने जा रहा है, लेकिन सच पूछिए तो कुछ भी नहीं बदलने वाला क्योंकि इसका सबसे बड़ा कारण नेता हैं। यह बदलाव सिर्फ आपकी तरफ से आ सकता। उससे जिसकी आप कहानी कहना चाहते हैं।”
-एजेंसी

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