विश्व हिन्दी दिवस: नागपुर में पहली बार 10 जनवरी को हुआ था विश्व हिन्दी सम्मेलन

नई दिल्‍ली। नागपुर में 10 जनवरी 1975 को पहली बार विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसके बाद मॉरीशस, यूनाइटेड किंगडम, त्रिनिदाद, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि में भी विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत में प्रतिवर्ष ‘विश्व हिन्दी दिवस’ मनाए जाने की घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वर्ष 2006 में की थी। 10 जनवरी का दिन इसलिए तय किया गया क्योंकि पहली बार इसी दिन विश्व हिन्दी सम्मेलन आयोजित किया गया था।

इंटरनेट पर हिन्दी का दायरा ब्लॉग्स को लांघ चुका है। हिन्दी अखबारों की वेबसाइट्स ने करोड़ों नए हिन्दी पाठकों को अपने साथ जोड़कर हिन्दी को और समृद्ध बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इंटरनेट पर हिन्दी के बढ़ते चलन से माना जा रहा है कि अगले साल तक हिन्दी में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या अंग्रेजी में इसका उपयोग करने वालों से ज्यादा हो जाएगी। सर्च इंजन गूगल का मानना है कि हिन्दी में इंटरनेट पर सामग्री पढ़ने वाले प्रतिवर्ष 94 फीसदी बढ़ रहे हैं जबकि अंग्रेजी में यह दर हर साल 17 फीसदी घट रही है। गूगल के अनुसार 2021 तक इंटरनेट पर 20.1 करोड़ लोग हिन्दी का उपयोग करने लगेंगे। यह हिन्दी के प्रचार-प्रसार और वैश्विक स्वीकार्यता का ही परिणाम है कि आज हिन्दी अपनी तमाम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए लोकप्रियता का आसमान छू रही है। आज दुनिया के 176 विश्वविद्यालयों में हिन्दी विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। हिन्दी वहां अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान की भाषा भी बन चुकी है। अमेरिका के ही 30 से भी ज्यादा विश्वविद्यालयों में भाषायी पाठ्यक्रमों में हिन्दी को महत्वपूर्ण दर्जा मिला हुआ है। दक्षिण प्रशान्त महासागर के देश फिजी में तो हिन्दी को राजभाषा का आधिकारिक दर्जा मिला हुआ है। फिजी में इसे ‘फिजियन हिन्दी’ अथवा ‘फिजियन हिन्दुस्तानी’ भी कहा जाता है, जो अवधी, भोजपुरी और अन्य बोलियों का मिला-जुला रूप है। विश्व में लगभग 6900 मातृभाषा बोली जाती हैं, जिनमें से 35-40 फीसदी अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही हैं।

विश्वभर की भाषाओं का इतिहास रखने वाली संस्था ‘एथ्नोलॉग’ के अनुसार चीनी और अंग्रेजी भाषा के बाद हिन्दी दुनियाभर में सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा है

पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, सूरीनाम, त्रिनिदाद, मॉरीशस, युगांडा, गुयाना, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूजीलैंड, यूएई, साउथ अफ्रीका में हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ी है। अमेरिका के अलावा यूरोपीय देशों, एशियाई देशों और खाड़ी के देशों में भी हिन्दी का तेजी से विकास हो रहा है। रूस के कई विश्वविद्यालयों में हिन्दी साहित्य पर लगातार शोध हो रहे हैं। हिन्दी साहित्य का जितना अनुवाद रूस में हुआ है, उतना शायद ही दुनिया में किसी अन्य भाषा के ग्रंथों का हुआ हो। हिन्दी को विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार विश्व की 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक माना गया है। ‘लैंग्वेज यूज इन यूनाइटेड स्टेट्स- 2011’ रिपोर्ट में कहा गया है कि हिन्दी अमेरिका में बोली जाने वाली शीर्ष 10 भाषाओं में से एक है, जहां इसे बोलने वालों की संख्या साढ़े छह लाख से भी अधिक है। अमेरिकी कम्युनिटी सर्वे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में हिन्दी सौ फीसदी से अधिक तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

विश्वभर में हिन्दी की बढ़ती स्वीकार्यता का ही असर है कि वर्ष 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी पहली बार ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, ‘बच्चा’ और ‘सूर्य नमस्कार’ जैसे हिन्दी शब्दों को सम्मिलित किया गया। अमेरिका की ‘ग्लोबल लैंग्वेज मॉनीटर’ संस्था ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि अंग्रेजी भाषा में करीब 10 लाख शब्द हैं, वहीं हिन्दी में करीब 1 लाख 20 हजार शब्दों का समृद्ध कोष है। हिन्दी शब्द कोष में लगातार वृद्धि हो रही है। तकनीकी रूप से हिन्दी को और ज्यादा उन्नत, समृद्ध तथा आसान बनाने के लिए अब कई सॉफ्टवेयर भी हिन्दी के लिए बन रहे हैं।

साभार – योगेश कुमार गोयल

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