KD डेंटल काॅलेज में टेढ़े-मेढ़े दांतों के ल‍िए लिंगुअल Braces पर कार्यशाला

मथुरा। दंत चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर बदलाव हो रहे हैं, जो बातें कल तक असम्भव मानी जाती थीं वे अब आधुनिकतम तकनीक के समावेश से सम्भव हो चुकी हैं। के.डी. डेंटल कालेज एण्ड हास्पिटल में हुई कार्यशाला में विशेषज्ञ दंत चिकित्सकों ने देश भर से आए दंत चिकित्सकों और युवा दंत चिकित्सकों को टेढ़े-मेढ़े दांतों को तारों के माध्यम से सीधा करने की आधुनिकतम तकनीक से अवगत कराया। कार्यशाला में lingual braces से दांतों को कैसे सीधा किया जाता है, इस पर विशेष प्रकाश डाला गया। कार्यशाला का शुभारम्भ होने से पहले के.डी. डेंटल कालेज एण्ड हास्पिटल के उप-प्राचार्य प्रो. (डा.) शिशिर मोहन ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया।

के.डी. डेंटल कालेज एण्ड हास्पिटल में हुई एकदिनी कार्यशाला में जाने-माने विशेषज्ञ दंत चिकित्सक डा. कुलदीप डिमेलो ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े दांतों की समस्या होने पर सबसे पहले Braces लगवाकर उन्हें सीधा करवाने का विचार आता है लेकिन Braces के लगने की प्रक्रिया और दांतों में स्पष्ट दिखने के कारण हर कोई इस इलाज के लिए जल्दी तैयार नहीं होता। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए अब ऐसे ब्रेसेस भी आने लगे हैं जो लगने में आसान भी हैं और दिखते भी नहीं। डा. डिमेलो ने कहा कि अब ऑर्थोडॉटिक एक्सपर्ट्स नई तकनीक लिंगुअल ब्रेसेस का इस्तेमाल कर टेढ़े-मेढ़े दांतों को कुशलता से सीधा कर रहे हैं। डा. डिमेलो ने कहा कि चूंकि लिंगुअल ब्रेसेस का इस्तेमाल अंदर से दांतों को सीधा करने में किया जाता है लिहाजा तार दिखते भी नहीं हैं।

कार्यशाला में यूरोपियन सोसायटी आफ लिंगुअल आर्थोडोंटिक्स और वर्ल्ड सोसायटी आफ लिंगुअल आर्थोडोंटिक्स के सदस्य प्रो. (डा.) सूर्यकांता दास ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े दांतों का निदान किसी भी उम्र में किया जा सकता है तथा दांतों की सही शेप पाई जा सकती है। लिंगुअल ब्रेसेस दांतों को सीधा करने की सही और लेटेस्ट टेक्निक है। प्रो. दास ने कहा कि यदि आप पारम्परिक ब्रेसेस लगवाकर ही इलाज करवाना चाहते हैं तो सेरेमिक ब्रेसेस इसके लिए उपयुक्त विकल्प है। ये आकार और बनावट में मेटल ब्रेसेस की तरह होते हैं। ये सफेद और थोड़े से पारदर्शी होते हैं और आसानी से दांतों के रंग के साथ घुल-मिल जाते हैं। इन्हें एक से दो साल तक लगाकर रखना होता है। मेटल ब्रेसेस की ही तरह सेरेमिक ब्रेसेस को भी ट्रीटमेंट शुरू होने से खत्म होने तक लगाकर रखना होता है। उन्होंने बताया कि इन्विजिबल ब्रेसेस दो प्रकार के होते हैं लिंगुअल और क्लियर ब्रेसेस। लिंगुअल ब्रेसेस चूंकि दांतों के पीछे की तरफ से लगाए जाते हैं इसलिए ये ब्रेसेस लगे होने के बावजूद दिखाई नहीं पड़ते।

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