तीन महीने में नदियों को जोड़ने की परियोजना पर कार्य हो जाएगा शुरू: नितिन गडकरी

नई दिल्ली। केंद्रीय जल संसाधन और नदी विकास मंत्री नितिन गडकरी जानकारी दी है कि अगले तीन माह के अंदर तीन नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना पर कार्य शुरू होगा।
नितिन गडकरी जल संसाधन और नदी विकास मंत्रालय का पद संभालने के बाद से ही इस परियोजना को लेकर सक्रिय हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण की समीक्षा के बाद कहा कि वह जल्द ही अंतर-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए संबंधित मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे ताकि अगले तीन महीने के अंदर इन परियोजनाओं पर कार्य शुरू हो सके। जिन तीन नदियों को जोड़ने का कार्य किया जाएगा, उनमें केन-बेतवा संपर्क परियोजना, दमनगंगा- पिंजाल संपर्क परियोजना तथा पार-तापी-नर्मदा संपर्क परियोजना शामिल हैं।
गडकरी ने जानकारी दी कि तीनों प्रोजेक्ट को जरूरी स्वीकृति मिल गयी है। उन्होंने कहा कि दमनगंगा-पिंजल पहला प्रोजेक्ट होगा, जिस पर सबसे पहले कार्य शुरू होगा क्योंकि महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों के बीच इन नदियों के पानी के बंटवारे का मुद्दा सुलझा लिया गया है। उन्होंने देश के 13 सूखाग्रस्त और सात बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की और इसके निदान के लिए जल संरक्षण और आवश्यकता से अधिक पानी की शेयरिंग के लिए एक नदी लिंक परियोजना के विकास पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि करीब 60 से 70 फीसदी जल बह जाता है, जिसे संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।
नदियों को आपस में जोड़ने की योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। रिवर इंटरलिंकिंग के ज़रिए देशभर में जलाशयों और नहरों के नेटवर्क के माध्यम से नदियों को आपस में जोड़ा जाना है। इस योजना के तहत गंगा सहित करीब 60 नदियों को जोड़ा जाना है। इसके लिए पीएम मोदी की ओर से 5.5 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान है। इस प्रोजेक्ट का मकसद यह है कि जिन जगहों में पानी ज्यादा है, वहां से ऐसे इलाकों में पानी भेजा जाए जहां पर सूखा पड़ता है। रिवर इंटरलिंकिंग से किसानो की सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता को कम होगी।
क्यों जरूरी है रिवर लिंक परियोजना
इस प्रोजेक्ट के पीछे की वजह देश में सूखे और बाढ़ की समस्या को दूर करने का लक्ष्य है। इस राष्ट्रीय योजना के जरिए करीब 15 लाख एकड़ फीट या 185 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी के भंडारण करने की योजना है।
प्रोजेक्ट कैसे कार्य करेगा
इस प्रोजेक्ट की निगरानी जल संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली राष्ट्रीय जल विकास एंजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) करेगी। इस प्रोजेक्ट को तीन चरणों में बांटा गया है।
1. उत्तरी हिमालय नदी इंटरलिंक परियोजना
2. दक्षिणी पेंनिंसुलर कांपोनेंट
3. अंतर राज्यीय नदी लिंक परियोजना
देश में नदियों को जोड़ने का एक लंबा इतिहास रहा है। 19वीं सदी में ब्रिटिश इंजीनियर ने नदियों को जोड़ने की योजना का प्रस्ताव रखा था और इससे आंध्र प्रदेश व ओडिशा क्षेत्र में सूखे की समस्या दूर होने की बात कही गई थी। वर्ष 1970 में डॉ. केएल राव डैम डिजाइनर और पूर्व सिंचाई मंत्री ने ब्रह्मपुत्र और गंगा बेसिन के आवश्यकता से अधिक जल को मध्य और दक्षिण भारत की ओर मोड़ने का प्रस्ताव रखा था। वर्ष 1980 में नदियों को जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाया गया लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने पर इसे रोक दिया गया।
वर्ष 1982 से 2013 के बीच के तीस वर्षों के समय में विकास एंजेंसी ने नदी जोड़ने की कई योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने नदी जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाया लेकिन 2004 में यूपीए के सत्ता में आने के बाद योजना फिर फंस गयी। मामले में एक जनहित याचिका दाखिल की गयी। हालांकि कोर्ट ने नदी जोड़ने की परियोजना के क्रियान्वयन पर किसी तरह का निर्देश नहीं दिया। लेकिन कोर्ट ने जल संसाधन मंत्रालय को जरूर निर्देश दिये।
एनडीए की सरकार आने के बाद वर्ष 2014 में नदी जोड़ने की परियोजना को लेकर एक स्पेशल कमेटी गठित की गई। जल संसाधन मंत्रालय की ओर से अप्रैल 2015 में नदी जोड़ने की परियोजना को लेकर एक टास्ट फोर्स गठित की गई, जिसे कैबिनेट की ओर से गठित की गयी स्पेशल कमेटी के साथ बैठक कर रिपोर्ट सौंपनी थी।
नदी जोड़ परियोजना का ब्योरा
1. केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट
भारत सरकार की ओर से केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट घोषित किया गया, जिसके तहत केन नदी पर एक बांध बनाया जाएगा। इस नदी को कर्णवती के नाम से भी जाना जाता है, जो कि उत्तर मध्य भारत में बहती है। इसे 22 किमी. की लंबी नहर से बेतवा नदी से जोड़ा जाएगा। केन-बेतवा नदी लिंक के पहले चरण का ब्योरा वर्ष 2015 में मध्य प्रदेश के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जा चुका है।
2. दमनगंगा-पींजल लिंक प्रोजेक्ट
दमनगंगा और पिंजल लिंक प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट मार्च 2014 में महाराष्ट्र और गुजरात सरकार को सौंप दी गई थी। ग्रेटर मुंबई नगर पालिका ने मामले में केंद्रीय जल कमीशन को जनवरी 2015 में रिपोर्ट सौंप दी थी।
3. पार-तापी-नर्मदा लिंक प्रोजेक्ट
पार-तापी-नर्मदा लिंक प्रोजेक्ट का पीडीआर राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी को अगस्त 2015 में गुजरात और महाराष्ट्र सरकार को सौप दिया गया था।
इन नदियों के जुड़ जाने से करीब 35 मिलियन हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी, साथ ही 34,000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा। इसके साथ ही जल परिवहन, वाटर सप्लाई, मत्यस्य पालन किया जा सकेगा।
-एजेंसी