Smart City के कामकाज को नगर निगम के तहत लाया जाये: सिविल सोसाइटी

Smart City के नामपर ताज गंज ईस्‍टर्न ड्रेन को सीमेंटोंं के स्‍लैबों से पाटना गलत, नहीं माने तो NGT में ले जाया जायेगा मामला

आगरा। आगरा Smart City रक्षा विभाग की कोई गुपचुप तरीके से क्रियान्‍वयन की जाने वाली योजना नहीं है, सीधे तौर पर नागरिकों के आर्थिक और सामाजिक जीवन स्‍तर को प्रभावित करने वाली योजना के रूप में प्रचारित है, इसके बावजूद आगरा की जनता को इसके बारे में अब तक सटीकता के साथ कुछ भी खास मालूम नहीं है।

इसके कार्य क्षेत्र में पूरा आगरा आ रहा है या फिर केवल 8-10वार्डों के लिये ही इसे बनाया गया गया है, यह भी स्‍पष्‍ट नहीं है। कष्‍ट और आगरा की आम जनता के साथ धोखे की बात यह है कि इसे केवल ताजगंज क्षेत्र सहित कुल 10 म्‍यूनिस्‍पिल वार्डों तकही सीमित रखा गया है जबकि जनप्रतिनिधियों के द्वारा समय समय पर इसे पूरे महानगर का कल्‍याण करने वाली योजना के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। इससे लगता है कि जनप्रतिनिधि तक वस्‍तुस्‍थिति से अनभिज्ञ हैं या फिर जनता के साथ भ्रम फैलाने के इस कारनामे में वे भी संलिप्‍त हैं।

एक ओर खुद कमिश्‍नर सहाब जो कि आगरा Smart City लिमिटेड के अध्‍यक्ष हैं,कुछ ही दिन पूर्व कह रहे थे कि स्‍मार्ट सिटी प्राजेक्‍ट की डिटेल प्राजेक्‍ट रिपोर्ट तैयार नहीं हुई हैं,वही दूसरी ओर अब फतेहाबाद रोड के सौंदर्यीकरण की सौ करोड रुपये की योजना पर काम शुरू हो चुका है।

आगरा की जनता जानना चाहती है कि क्‍या योजना है, यह? पूर्व में फतेहाबाद रोड पर होटल कांप्‍लैक्‍स पर ताज मैगा प्रोजेक्‍ट, प्रोपुअर प्रोजेक्‍ट,जे एन यू आर एम के तहत ड्रेनेज और सीवरेज प्‍लान पर अरबो यपये खर्च हो चुके हैं अब फिर कंपनी की तरफ से एक अरब रूपये को ठिकाने लगाने के प्रयास का क्‍या कारण है। लगता है कि कंपनी का असली मकसद जनहितों से कही परे ठेके पर काम करने वालों मुनाफा है जनता का हित और सहूलियत नहीं।

हमारी अपेक्षा है कि फतेहाबाद रोड की कार्ययोजना को पहले सार्वजनिक किया जाये जिससे कि आगरा की जनता को खर्च की जाने वाली राशि की उपयोगिता पर विश्‍वास हो सके। हमारी अपेक्षा है कि स्‍मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट को आगरा की जनता की सहमति और उसका बोट बैंक के रूप में इस्‍तेमाल करके लाया गया था किन्‍तु अब जनता से ही इससे दूर रखा जा रहा है। क्‍यों नहीं इसकी डीपीआर नगर निगम सदन में रखी जाती। किस आधार पर इसके कार्य और योजना को जन सुनवायी और एन्‍वायरमैंट क्‍लीयरेंस से दूर रखा जा रहा है।नगर निगम जो एक संवैधनिक व्यवस्था की स्‍थानीय जनता का प्रतिनिधित्‍व करने वालाा निकाय है उसे किस विधिक संशोधन या कानून के अघोषित रूप से समाप्त किया जा रहा है?

हाल में ही मालूम पडा है,कि ताजगंज ईस्‍टर्न ड्रेन (ताजगंज पूर्वी गेट नाला) कंक्रीट के स्‍लैबों से पाट डालने की योजना है,कारण है कि इसमें महानगर के पूर्वी भाग का गंदापानी (ग्रेवाटर) के साथ सीवर का पानी जाता है जिससे इसके कारण गंदे पानी में से बदबू आती है।

हमारा कहना है कि ताजगंज क्षेत्र में जब ताजगंज जोन सीवर योजना पर पूरा काम हो चुका है फिर सीवर नाले मे कहाँ से जा रहा है । जल निगम ने यहां सीवर डलवाया था, उसके अधिकारियों से जबाब तलब कर जानकारी उपलब्‍ध करवायी जानी चाहिये। अगर नाले को पाटने का पर्यावरण विरोधी कृत्‍य जारी रखा जाता हे तो एन जी टी की हठर्धिता को नेशनल ग्रीन ट्रीबुनल में ले जाया जायेगा।

ताज गंज की मलीन बस्‍तियों के लिये अर्बन बेसिक सर्विसेस फॉर द पूअर,जे एन यू आर एम योजना,प्रो पुअर टूरिजम योजना,डूडा के तहत काफी धन खर्च होता रहा है किन्‍तु लगता हे कि अब तक वहां कुछ भी नहीं हुआ तभी तो स्‍मार्ट सिटी प्राजेक्‍ट के नाम पर एक बार फिर भारी भरकम राशि खर्च की जाने वाली है।

हम यह मानते हैं कि Smart City प्राजेक्‍ट एक बढिया प्रोजेक्‍ट हो सकता था , किन्‍तु इसका क्रियान्‍वयन करवाने वाली नोडल एजैंसी ”आगरा स्‍मार्ट सिटी लिमिटेड” कंपनी है । जबकि स्‍मार्ट सिटी प्राजेक्‍ट पूरी तरह से नगर निगम की सेवाओं और दायित्‍वों से संबधित है। जबकि इस कंपनी के द्वारा खर्च किये जा रहे धन और उससे सर्जित अवस्‍थपनाओं के अनरक्षण का सीधे जनता और नगर निगम को ही खामियाजा भुगतना पडेगा।

सफाई,सड़क निर्माण,नाला बनाना आदि जो सामान्य काम हैं उसके लिए कंपनी के गठन की क्या आवश्यकता पड़ गयी?

मिल्टन फ्रीडमेन के अनुसार कंपनी की सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी सिर्फ मुनाफ़ा कमाना होता है

आगरा स्मार्ट सिटि कंपनी लिमिटेड भी सिर्फ मुनाफे वाले काम पर ध्यान दे रही है जनता के हित वाले कामों पर नहीं।यह सही है कि कंपनी में सरकारी अधिकारी हैं किन्‍तु जन सहभागिता और जननियंत्रण से यह पूरी तरह से बाहर है।अधिकारी जो पद पर रहते हुए अपने दायित्वों को पूरा ना कर सके वो अब कंपनी के निदेशक हैं। एक व्यक्ति दो पद पर कैसे रह सकता है? एक हज़ार करोड की राशि अब तक स्‍मार्ट सिटी कंपनी लि के कामों के लिये चिन्‍हित हो चुकी है और इसका एक बडा भाग अवमुक्‍त किया जा चुका है। एक हजार करोड रुपया ही 2019तक फिर अवमुक्‍त हो जाना है। जनधन की बर्बादी और भारी टैकस व सेवा शुल्‍क की मार से जनता पहले से ही परेशान है,अब स्‍मार्ट सिटी का एक और वज़न उस पर थोपा जा रहा है ।

हमारी मांग है कि जितना जल्दी हो इस कंपनी के कार्य और अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करवाया जाये जिससे कि नगर निगम के स्‍थानीय स्‍वशासन की स्‍वयत्‍ता प्रभावित नहीं हो और संविधान के 74वें संशोधन का अपमान नहीं हो।

फिर भी आगरा की जनता की जानकारी के लिये एक बार पुन: स्‍पष्‍ट करना चाहेंगे कि स्‍थानीय स्‍वशासन मे दखल करने की कार्रवाही को ततकाल बन्‍द करवाया जाये। स्‍मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड के काम काज और योजनाओं को मेयर और नगर निगम सदन के आधीन किया जाये।जनता द्वारा चुने गए प्रबुधजन एवं विशिष्‍ठ दक्षता वाले इसकी समितियों में शामिल किए जाएँ, ना की वो लोग जो जनता द्वारा नकार दिये गए हैं।

सिविल सोसाइटी ने कहा के ताजगंज एरिया में बहुत समय से पैसा लग रहा है और स्मार्ट सिटी में भी उसी एरिया में फिर से पैसा लगाया जा रहा है। ताजगंज एरिया में तीन – जालमा, कुश्त आश्रम और शेरोस हैंग आउट रेस्टोरेंट – को स्मार्ट सिटी में प्लान नहीं किया गया है.

सिविल सोसाइटी ने कहा पूरे सहर ने Smart City के लिये किया था, इसलिए पूरे शहर को फायदा मिलना चाहिए।
आज की प्रेस वार्ता को  अभिनय प्रसाद,  शिरोमणि सिंह,  रमण बल्ला – सदस्य सुप्रीम कोर्ट मोनिटरिंग समिति,  अनिल शर्मा ने सम्बोदित किया।

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