KD हॉस्पिटल में प्रोन वेंटिलेशन तकनीक से बचाई महिला की जान

मथुरा। वैश्विक महामारी के खिलाफ विशेषज्ञ चिकित्सक वैक्सीन के बिना भी अपनी समझ-बूझ से लोगों को नई जिन्दगी प्रदान कर रहे हैं। KD मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के क्रिटिकल केयर और विभागाध्यक्ष निश्चेतना डॉ. एपी भल्ला और उनकी टीम ने प्रोन वेंटिलेशन तकनीक से एक 32 साल की महिला को नई जिन्दगी प्रदान की है। इस तकनीक से न केवल महिला को नई जिन्दगी मिली बल्कि प्रोन वेंटिलेशन का 68 घण्टे का नया विश्व कीर्तिमान भी बन गया। इसे चिकित्सा के क्षेत्र में KD हाॅस्पिटल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है।

डाॅ. भल्ला का कहना है कि कोरोना संक्रमित तीन बच्चों की मां जब KD हॉस्पिटल में आई थी तब उसकी स्थिति काफी नाजुक थी लिहाजा उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती कर उसका उपचार शुरू कर दिया गया क्योंकि उसकी आक्सीजन सेचुरेशन 50 प्रतिशत से कम हो गई थी जिसे जानलेवा स्थिति कह सकते हैं। डॉ. भल्ला ने बताया कि अमूमन प्रोन वेंटिलेशन लगातार 12 घण्टे का ही दिया जाता है लेकिन इस रोगी में जब देखा गया कि उसे काफी लाभ मिल रहा है तो उसकी अवधि बढ़ा दी गई और इसे 68 घण्टे तक जारी रखा गया तथा मरीज की स्थिति सामान्य होने के बाद उसे सीधा लिटा दिया गया। डॉ. भल्ला का कहना है कि 68 घण्टे की लगातार प्रोन वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल दुनिया में पहली बार किया गया है। डॉ. भल्ला ने बताया कि प्रोन वेंटिलेशन तकनीक अमूमन एडल्ट रेसप्रेट्री डिसट्रेस सिंडोम में अपनाई जाती है।

डॉ. भल्ला ने बताया कि जब मरीज बहुत कमजोर होता है, उसके गले में ट्यूब लगी होती है, लंग्स खराब होता है तथा उनमें फ्लूड भरा होता है। ऐसी स्थिति में सही से ऑक्सीजिनेशन नहीं हो पाता। ऐसे मरीजों को प्रोन वेंटिलेशन दिया जाता है और मरीज को उल्टा कर लिटा दिया जाता है। इससे लंग्स में मौजूद फ्लूड इधर-उधर हो जाता है और लंग्स में ऑक्सीजन पहुंचने लगता है। हालांकि मरीज में यह प्रक्रिया करना आसान नहीं होता क्योंकि इसमें मरीज के सभी अंगों आंख, नाक, गला, बाजू तथा जांघों आदि की सुरक्षा के साथ उस पर लगातार नजर रखनी होती है।

डॉ. भल्ला का कहना है कि मरीज को प्रोन वेंटिलेशन की पोजीशन में लेने और उसका ध्यान रखने के लिए जूनियर डॉक्टर्स तथा नर्सेज का सहयोग नितांत आवश्यक होता है। यह खुशी की बात है कि KD हॉस्पिटल में आईसीयू के डॉक्टर्स और नर्सेज ने इस मामले में पूरी सजगता बरतते हुए रोगी के शरीर को कोई क्षति नहीं पहुंचने दी। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। डॉ. भल्ला का कहना है कि कोविड संक्रमण में भी अन्य जानलेवा रोग जैसे हार्ट-अटैक, मिर्गी और ट्रामा आदि में पहले घण्टे का उपचार जिसे हम अंग्रेजी में द गोल्डन आवर कहते हैं, बहुत महत्वपूर्ण होता है। आर. के. एजुकेशन हब के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने महिला की जान बचाने के लिए चिकित्सकों, नर्सेज तथा पैरा मेडिकल कर्मचारियों को बधाई देते हुए उनके सेवाभाव की मुक्तकंठ से तारीफ की।

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