पत्नी का किसी से Affair पति का मानसिक उत्पीड़न है: हाई कोर्ट

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक केस में टिप्पणी करते हुए कहा कि महिला का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ Affair उसके पति के लिए मानसिक उत्पीड़न है।
इस आधार पर वह शादी को तोड़ने का हकदार भी है।
जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस मंजरी नेहरू कौल की डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर इसे क्रूरता नहीं माना जाएगा तो क्रूरता की असली परिभाषा क्या होगी, कोर्ट को भी इसका अंदाजा नहीं है।
कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया। महिला ने गुरुग्राम फैमिली कोर्ट के शादी को भंग करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी।
शादी को इस आधार पर तोड़ने का फैसला सुनाया गया कि महिला का किसी और शख्स के साथ Affair था और इसके चलते पति तनाव में था।
फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए महिला ने हाई कोर्ट में अपनी अपील में कहा कि फैमिली कोर्ट इस तथ्य को आंकने में असफल रही कि उसके खिलाफ उत्पीड़न के आरोप पर उसके पति ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया था।
उसने अपनी अपील में तर्क दिया कि इन आरोपों को हल्के मतभेद या गलतफहमी भी कहा जा सकता है जो कि हर शादी में होता है।
दंपती की शादी 2014 में हुई थी और कोई बच्चे भी नहीं हैं। दूसरी ओर पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी का व्यवहार उसके और उसके परिवार के प्रति बहुत ज्यादा खराब और गंदा हो गया था। यहां तक हनीमून के दौरान भी महिला ने उसके साथ संबंध बनाने से इंकार कर दिया था।
शख्स ने यह भी बताया कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है और मेसेज-ईमेल के रूप में इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत भी हैं। शख्स ने कहा कि वह काफी तनाव में आ गया था। उसने कहा कि उसने अपनी शादी को बचाने के काफी प्रयास किया लेकिन असफल रहा।
शादी में उत्पीड़न की सटीक परिभाषा संभव नहीं: कोर्ट
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आंकलन किया कि शादी में उत्पीड़न की सटीक परिभाषा देना संभव नहीं है। कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला ने दूसरे शख्स के साथ ई-मेल एक्सचेंज करने की बात स्वीकारी और पति से माफी भी मांगी। कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला ने अपने पति के खिलाफ झूठा आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें बाद में उसे बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि यह इस प्रकार यह स्पष्ट है कि पत्नी ने जान-बूझकर ऐसा व्यवहार किया था। उसने यह भी नहीं सोचा कि उसके आचरण से पति को मानसिक पीड़ा और यातना का सामना करना पड़ा होगा। अगर इसे क्रूरता नहीं माना जाएगा तो फिर किसे कहा जाएगा।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »