सिविल एन्‍कलेव योजना से cargo सुविधा क्‍यों हटाई गई?

आगरा। सिविल सोसायटी ने निर्माणाधीन सिविल एन्‍कलेव योजना में शामिल रहे cargo की सुविधा को हटाये जाने का मामला उठाया है। नये सिविल एन्‍क्लेव के लिये जो जमीन खरीदी गयी है, उसमें जरूरत को निर्धारित जमीन से चार हेक्‍टेयर जमीन कम है। इस ज़मीन की कमी से एयर cargo की सुविधा यहां संभव नहीं हो पायेगी।

सिविल सोसायटी आगरा, नये बन रहे सिविल एन्‍कलेव की योजना को विभिन्‍न माध्‍यमों से प्रभावित किये जाने वाले प्रयासों को अत्‍यंत गंभीरता से लेती है। जब भी जरूरी समझा सोसायटी ने अधिकारियों से सीधा संवाद किया और यथासंभव अधिकारिक जानकारियां जुटाने को जनसूचना के अधिकार कानून ( आर टी आई) का सहारा लिया।

इस सुविधा का नये सिविल एन्‍कलेव में न होना आगरा के सभी निर्यातकों ओर आयातकों के लिये तो जरूरी है ही शैड्यूल्‍ड एयर आप्रेशन करने वालों के लिये भी फ्लाइट आप्रेशन मुनाफे में बनाये रखने के लिये जरूरी है।

वैसे भी देखा जाये तो आगरा में पिछले तीन दशक सेे रेलवे कामयाबी के साथ कंटेनर कार्पोरेशन के कंटेनर आप्रेशन के लिये भरपूर सुविधा प्रदान कर रही है जिसका सकल असर कारोबार के बढावे के रूप में हुआ है। जब रेलवे को भरपूर मालढुलाई का कारोबार मिल सकता है तो फिर सिविल एवियेशन के कार्गों डिवजीन को क्‍यों नहीं।

कार्गो सुविधाओं को सिविल एन्‍कलेव क्रियान्‍वयन की योजना से हटाये जाने के प्रयासों को लेकर सिविल सोसायटी तो एक्‍शन में है ही,  आगरा के कारोबारियों के संगठन भी अब सक्रिय हो गये हैं।

हमें खुशी होगी कि cargo सुविधा की उपलब्‍धता को सुनिश्‍चित करने के मामले को लेकर आगरा के कारोबारियों और उत्‍पादकों के संगठन ही नहीं आगरा के ‘माननीय’ भी आवाज उठायें , सरकार पर दबाब डाल कर अधिग्रहण से रह गयी चार एकड जमीन को भी खरीदा जाये।

सिविल टर्मिनल पर एयर फ्लाइट, कार्गो आदि के लिये प्रशासन और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के साथ २०१० में कई महत्व पूर्ण अप्रूवल पर कार्य करने वाले डॉ संजय चतुर्वेदी ने बताया के आगरा एयरपोर्ट को कार्गो एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट करने कि परमिशन 21-11-1994 से है.- notificatification no- 61/94 Customs N.T. डॉ चतुर्वेदी ने कहा के आगरा और कानपूर RCS स्कीम के पहले फेज में डेवेलोप होना था, क्यूँ कि दोनों एयरपोर्ट सब सुवीधा होने के बावजूद अंडर डेवलप्ड हैं, पर सरकार ने दोनों एयरपोर्ट को ठंडे बस्‍ते में डाल दिया है।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा इस का विरोध करती है। साथ ही एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आगरा में कार्गो अप्रूवल का नया GST नंबर नहीं लिया है इसलिए AAI यह बात मने को तैयार नहीं है कि आगरा में कार्गो इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट परमिशन है। सिविल सोसाइटी AAI से अनुरोध करती है कि वैध अनुमति पर तुरंत कार्य करें और आगरा के विकास में सहभागीदार बनें।

सिविल सोसायटी का मानना है कि तहसील प्रशासन की बिना अनुमति के ‘चार हेक्‍टेयर जमीन’ का जो अधिग्रहण होना है, उस पर मकान और भवन बने हैं इसलिये इस पर विवाद होना ही है। विवाद से उबरने के लिये सरकार जमीन अधिग्रहण की अपनी प्रचारित नीति पर ही केन्‍द्रित न रहे बल्‍कि ‘आपसी सहमति’ के फार्मूले को भी अपनाये।

जो भी हो अब आगरा की जनता सरकारी अफसरों व राजनीतिज्ञों से अपेक्षा करती है कि उसके साथ होते रहे झूठे वायदे अब रुकना चाहिये और आगरा की अवस्‍थापना सुविधाओं के वे सभी काम जो कि पिछले चार साल में घोषित हुए हैं जमीनी स्‍तर पर क्रियान्‍वित होते दिखें। इन में सबसे अहम अंतर्राष्‍ट्रीय सुविधाओं के मानकों को पूरा करने वाला सिविल एन्‍कलेव सबसे मुख्‍य है।

सिविल सोसाइटी का कहना है कि “आगरा में एयर cargo की वैध अनुमति १९९४ से है, जरुरत एयर कार्गो हब बनाने की है, दूसरी ओर जेवर एयरपोर्ट के लिये वैध परमिशन नहीं है और सरकार बनाने पर अमादा है।”

प्रेस वार्ता में सर्वश्री अनिल शर्मा, श्री शिरोमणि सिंह, श्री राजीव सक्सेना, डॉ संंजय चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।

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