नहाने के बाद ही भोजन क्यों- परंपरा, धर्म और आयुर्वेद में बताये हैं इसके लाभ

सनातन धर्म की परंपरानुसार नहाने के बाद ही खाना खाया जाना चाह‍िए, महाभारत, स्मृति ग्रंथों और पुराणों में बिना नहाए भोजन करने की मनाही है। धर्म ग्रंथों का कहना है कि नहाने के बाद पवित्र होकर ही भोजन करना चाहिए। बिना नहाए भोजन करना पशुओं के समान है और अपवित्र भी माना गया है। माना जाता है ऐसा करने से दोष लगता है।

स्नान से न केवल तन की शुद्धि होती है, बल्कि यह मन में पवित्र भाव पैदा करता है। तन व मन की ऐसी पवित्रता और ताजगी से कार्य व संकल्प बिना बाधा के पूरे ही नहीं होते, बल्कि बेहतर नतीजे भी देते हैं।

मनुष्य को स्नान करने से दस गुणों की प्राप्ति होती है :-

१- रूप,
२- बल,
३- तेज,
४- शुद्धता,
५- आयु,
६- आरोग्य,
७- आलोलुप्तता (स्पष्टता और स्फूर्ति)
८- कुस्वप्ननाश (बुरे सपने का नाश)
९- तप,
१०- मेधा (बुद्धि)

कुछ ग्रंथों में कहा गया है कि बिना नहाए भोजन कर लेने से दरिद्रता आती है। यानी आलस्य बढ़ने लगता है। हालांकि मौजूदा समय में इन बातों पर गौर नहीं किया जाता, लेकिन इस तथ्य के पीछे धार्मिक कारण के अलावा आयुर्वेदिक महत्व भी है।

पाचन में होती है आसानी
नहाने से शरीर के हर हिस्से को नया जीवन मिलता है। सेहत के नजरिये से देखा जाए तो शरीर में पिछले दिन का मौजूद हर तरह का मैल नहाने से साफ हो जाता है। शरीर में ताजगी और स्फूर्ति भी आ जाती है, जिससे स्वाभाविक रूप से भूख लगती है। उस समय भोजन करने से भोजन का रस शरीर के लिए पुष्टिवर्धक होता है। जबकि नहाने से पहले खाना खाने से पेट की जठराग्नि उसे पचाने में लग जाती है।

खाना खाने के बाद नहाने से शरीर ठंडा हो जाता है, जिससे पेट की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। इसके कारण हमारा आंत्रशोध कमजोर होता है, कब्ज की शिकायत रहती है और भी कई तरह के रोग हो जाते हैं। जरूरत हो तो नहाने से पहले गन्ने का रस, पानी, दूध, फल या औषधि ली जा सकती है क्योंकि, इनमें पानी ज्यादा होता है। जिससे ये जल्दी पच जाते हैं।
– Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *