‘सद्गुरु’ के इंटरव्यू का एक अंश क्‍यों हो रहा है वायरल?

सद्गुरु के नाम से मशहूर धार्मिक उपदेशक जग्गी वासुदेव के ताजा इंटरव्यू का एक अंश काफी वायरल हो गया है। सद्गुरु ने एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान तर्क दिए कि आखिर मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त क्यों किया जाए। उनके इस तर्क की बड़ी तारीफ हो रही है और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग सद्गुरु के तर्कों का समर्थन कर रहे हैं। यही कारण है कि ट्विटर पर Sadhguru टॉप ट्रेंड में आ गया है।
जानें मंदिर मुक्ति पर सद्गुरु के तर्क
सबसे पहले जानते हैं कि सद्गुरु ने न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में क्या कहा। दरअसल, सद्गुरु ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण की पृष्ठभूमि की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि आज के जमाने में हम सभी सेवाओं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना चाहते हैं, लेकिन मंदिरों का प्रबंधन सरकार के हाथ में रखना चाहते हैं। यह तर्क समझ से बाहर है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे जमाने में रह रहे हैं जब हमें लगता है कि सरकार को एयरलाइंस, एयरपोर्ट्स, इंडस्ट्री, माइनिंग, ट्रेड आदि से अपना नियंत्रण हटा लेना चाहिए लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है कि पवित्र मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथ में हो। इसके पीछे क्या तर्क हो सकता है?”
विशेषज्ञ सुभाष काक ने की तारीफ
भारतीय संस्कृति एवं पुरातन परंपरा पर लगातार अपने विचार प्रकट करने वाले लेखक और वैज्ञानिक सुभाष काक ने सद्गुरु के इस तर्क का जोरदार समर्थन किया।
उन्होंने लिखा, “सद्गुरु ने महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं। मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पीछे कोई तर्क ही नहीं है। यह मुद्दा देश की राजनीति को नुकसान पहुंचा रहा है और प्रशासनिक सेवाओं को भ्रष्ट बना रहा है।”
कंगना की अपील, सभी लोग जरूर सुनें
उधर, अपनी बेबाकी के लिए मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लोगों से फुर्सत मिलते ही यह इंटरव्यू देखने की अपील की। उन्होंने लिखा, “जब भी हो सके तो कृपया इसे जरूर देखें। यह बहुत महत्वपूर्ण है।”
मंदिर मुक्ति अभियान को चुनावी मुद्दा बनाने का सुझाव
वहीं, ट्विटर हैंडल @rajasekharv1979 ने तो मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग को चुनावी मुद्दा बनाने की सलाह दे डाली। उन्होंने सद्गुरु के बारे में लिखा, “वो इस मुद्दे पर बिल्कुल स्पष्ट हैं… अपनी आखों के सामने जो अन्याय हो रहे हैं, उन्हें रोकिए। इसे राजनीतिक दलों के लिए चुनावी मुद्दा बनाइए। जाति और नस्ल के अंतर को किनारे कर लोगों को मंदिरों के मैंटेनेंस की जिम्मेदारी बेहद सक्रियता से उठानी चाहिए।”
“मोदीजी, राम मंदिर का शिलान्यास करना पर्याप्त नहीं”
ट्विटर हैंडल @lalitnc1 ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस को टैग करते हुए गुहार लगाई है। उन्होंने लिखा, “कृपया सद्गुरु को सुनें। कृपया पूरे देश में हिंदू मंदिरों को मुक्त करने के लिए गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी एक्ट 1935 के लिए भी इसी तरह का कानून लाइए। नरेंद्र मोदी जी राम मंदिर का शिलान्यास कर देना पर्याप्त नहीं है, आपको मंदिरों को मुक्त करने की जरूरत है।”
“दक्षिण के राज्यों में मंदिरों के फंड का हो रहा दुरुपयोग”
ट्विटर हैंडल @krishnakacker ने लिखा, “जिन राज्यों में धर्मनिरपेक्ष दलों का शासन है, वहां मंदिरों के फंड के दुरुपयोग का मौका दिया जाता है। केरल, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश इसके उदाहरण हैं। अदालतें भी हमेशा मदद नहीं कर पातीं।”
ट्विटर हैंडल @kalyanpatil90 ने लिखा कि “सद्गुरु, पूरा भारतीय तंत्र हिंदू संस्कृति को नष्ट करने पर तुला है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तरी कर्नाटक, तमिलनाडु में इसाई मिशनरियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। वो उन गावों में भी चर्च बना रहे हैं जहां एक भी इसाई नहीं है। यह सरकार के समर्थन से चल रहा रैकेट है।”
“मंदिर मुक्त हों या फिर सभी धर्मस्थल आएं सरकारी नियंत्रण में”
ट्विटर हैंडल @Shweta_India ने कहा, “सरकार या तो मंदिरों को मुक्त करे या फिर सभी धार्मिक संस्थानों को अपने नियंत्रण में ले। यह सिर्फ एक समुदाय के प्रति भेदभाव है जो अस्वीकार्य है।”
सवाल- हिंदू देश चला सकते हैं तो मंदिर नहीं?
वहीं, ट्विटर हैंडल @RituRathaur ने लिखा, “हम ऐसे वक्त में रह रहे हैं जब धर्मच्युत हिंदुओं को लगता है कि हिंदू देश और बड़ी-बड़ी कंपनियां चला सकते हैं लेकिन अपने मंदिर नहीं।”
लंबे समय से हो रही है मंदिर मुक्ति की मांग
दरअसल, देश में हिंदू मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के खिलाफ आवाजें जोर पकड़ रही हैं। लोग सरकार पर हिंदुओं के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए मंदिरों के प्रबंधन से अपना नियंत्रण वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अन्य किसी धर्म के पूजा या प्रार्थना स्थलों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है तो हिंदुओं के मंदिरों पर क्यों? इसी बहस के बीच सद्गुरु का यह इंटरव्यू वायरल हो गया है।
-एजेंसियां

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