किसानों के पक्ष में अनशन शुरू करने वाले अन्‍ना ने रद्द क्‍यों कर दिया अपना कार्यक्रम?

नई दिल्‍ली। किसान आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने एक उच्‍चस्‍तरीय समिति बनाने का फैसला किया है। यह समिति सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे की तरफ से उठाए गए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य MSP समेत खेती से जुड़े कई मुद्दों पर विचार करेगी। इस समिति को बनाने का फैसला जल्‍दबाजी में इसीलिए हुआ ताकि अन्‍ना को अनशन पर बैठने से रोका जा सके। आंदोलनरत किसानों के समर्थन में अन्‍ना शनिवार से अनशन पर बैठने वाले थे। इस बीच केंद्र ने फौरन कृषि राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी और महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उनके गांव रालेगण सिद्धि भेजा। दोनों ने अन्‍ना को आश्‍वासन दिया कि वे उनकी मांगों पर विचार के लिए एक पैनल बनाएंगे।
इसके बाद शुक्रवार देर रात अन्‍ना ने अनशन रद्द करने की घोषणा कर दी।
समिति में कौन-कौन होगा?
कृषि मंत्रालय में सूत्रों के मुताबिक इस उच्‍चस्‍तरीय समिति में निम्‍न सदस्‍य होंगे:
रमेश चंद, नीति आयोग के सदस्‍य
पुरुषोत्तम रूपाला, पंचायती राज, कृषि और किसान कल्‍याण राज्‍य मंत्री
विजय सरदाना, कृषि-व्‍यापार कानून और नीति विशेषज्ञ
कंवल सिंह चौहान, हरियाणा के एक प्रगतिशील किसान और पद्मश्री से सम्‍मानित
किसान प्रतिनिधि
एक अधिकारी के मुताबिक “पैनल में कौन-कौन से किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे, यह अन्‍ना के साथ बातचीत कर तय किया जाएगा।” उन्‍होंने यह भी कहा कि पैनल में कृषि, वाण‍िज्‍य, खाद्य एवं उपभोक्‍ता मामलों के मंत्रालयों से संयुक्‍त सचिव स्‍तर के एक-एक अधिकारी भी होंगे। यह समिति सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्ति पैनल से अलग काम करेगी।
केंद्र तो पहले ही दे चुका 18 महीने तक कानून टालने का प्रस्‍ताव
इस समिति की अध्‍यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे। समिति अपनी सिफारिश छह महीनों में देगी जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक में कृषि मंत्रालय के उस प्रस्‍ताव का संदर्भ दिया जिसमें नए कानूनों को 18 महीने तक न लागू करने की बात कही गई है और इस दौरान एक संयुक्‍त समिति बनाकर सभी मांगों पर चर्चा के जरिए आगे बढ़ने का प्रस्‍ताव है। किसान यूनियनों ने इस प्रस्‍ताव को खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि वे तबतक आंदोलन खत्‍म नहीं करेंगे जबतक नए कानून वापस नहीं ले लिए जाते।
अपनी मांगें केंद्र को भेज चुके हैं अन्‍ना
अन्‍ना हजारे ने पहले कृषि मंत्रालय को लेकर लंबित मांगों का ब्‍योरा दिया था। इसमें कृषि लागत और मूल्य आयोग CACP को स्वायत्तता और व्यापक लागत के आधार पर एमएसपी (C2) शामिल हैं। एमएस स्‍वामीनाथन समिति ने भी इनकी सिफारिश की थी। अन्‍ना ने इन्‍हीं मांगों को उनके अनशन करने की वजह बताया था। चौधरी ने कहा कि केंद्र ने अन्‍ना के कई सुझावों को पहले ही लागू कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि उच्‍चस्‍तरीय समिति किसान प्रतिनिधियों संग चर्चा कर लंबित मामलों पर विचार करेगी।
-एजेंसियां

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