91 साल के हुए Advani, पीएम मोदी ने घर जाकर दी बधाई

नई दिल्ली। मौजूदा भारतीय राजनीति के लौह पुरुष कहे जाने वाले बीजेपी के सीनियर लीडर Lal Krishna Advani का आज जन्मदिन है। बीजेपी को 2 सीटों से लेकर 182 तक पहुंचाने वाले आडवाणी को भगवा दल का पितामह कहा जाए तो कुछ गलत न होगा। पीएम मोदी ने Lal Krishna Advani के घर पहुंचकर जन्मदिन की बधाई दी।
विभाजन के बाद भारत आया परिवार
8 नवंबर, 1927 को सिंधि हिंदू परिवार में कराची में उनका जन्म हुआ था। भारत-पाक विभाजन में भड़की हिंसा के दौरान पाकिस्तान से पलायन कर आने वाले लोगों में उनका परिवार भी शामिल था। उनका परिवार कराची से बॉम्बे आ गया था। वहीं उन्होंने लॉ की डिग्री हासिल की। इससे पहले की पूरी पढ़ाई उन्होंने कराची में ही की थी।
14 साल की आयु में संघ से जुड़े
महज 14 साल की आयु में ही 1941 में लालकृष्ण आडवाणी संघ से जुड़े थे और कराची में आरएसएस के लिए काम करने लगे। विभाजन के बाद भारत आने पर संघ ने उन्हें राजस्थान के अलवर में प्रचारक के तौर पर काम करने भेजा था।
श्याम सुंदर भंडारी के सचिव के तौर पर काम
1951 में आरएसएस की मदद से जनसंघ का गठन होने के बाद संघ के निर्देश पर वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ काम करने लगे थे। शुरुआती दिनों में वह जनसंघ नेता श्याम सुंदर भंडारी के सेक्रटरी के तौर पर काम करते थे, फिर उन्हें राजस्थान का महामंत्री बनाया गया।
सोमनाथ से अयोध्या की रथ यात्रा
1957 में वह जनसंघ के लिए काम करने दिल्ली आए थे और फिर दिल्ली के ही हो गए। यहीं से उनका राजनीतिक सफर देश के उप प्रधानमंत्री तक पहुंचा। 1980 में जनसंघ भंग हो गया और बीजेपी बनी। 1989 में राम मंदिर आंदोलन को मजबूती देने वाली सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा आडवाणी ने ही निकाली थी।
2 से 86 सीटों तक का सफर
इसी का परिणाम था कि 1984 में महज 2 सीट जीतने वाली बीजेपी ने 1989 के लोकसभा चुनाव में 86 सीटें जीतीं। यह पहला मौका था, जब बीजेपी ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर देते हुए भविष्य की राजनीति में एक और ध्रुव पैदा होने के संकेत दिए थे। यही वजह है कि अटल और आडवाणी को देश की राजनीति को एक ध्रुव से दो ध्रुवीय करने का श्रेय दिया जाता है।
उप-प्रधानमंत्री की मिली जिम्मेदारी
1996 में बीजेपी ने केंद्र में गठबंधन सरकार बनाई तो वह होम मिनिस्टर बने, जो सिर्फ 13 दिन चली। इसके बाद 1998-99 और 1999-2004 के बीच बनी सरकारों में वह होम मिनिस्टर के साथ ही उप-प्रधानमंत्री भी रहे। 1998 में बीजेपी को 182 सीटें मिली थीं।
वाजपेयी हटे तो बीजेपी के बने सुप्रीम लीडर
2004 में बीजेपी के केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद आडवाणी के दशकों के साथी वाजपेयी राजनीतिक जीवन से परे हो गए, लेकिन वह बने रहे। बीजेपी के मुख्य चेहरा होने के नाते उन्हें 2009 में पीएम कैंडिडेट बनाया गया लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
मार्गदर्शक मंडल में शामिल
फिलहाल वह बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट कर उन्हें भारतीय राजनीति पर छाप छोड़ने वाला बताया है। पीएम मोदी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि देश के लिए उनका योगदान स्मरणीय है।
-एजेंसियां

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