ITR सही भरा है या नहीं, खुद कर सकते हैं चेक

नई दिल्‍ली। आपने ITR भर लिया है या नहीं भी भरा है तो एक बार सबमिट करने से पहले जरूर चेक कर लें कि आपने सब-कुछ सही-सही भरा है या नहीं। इसके लिए आपको कुछ चीजें चेक करनी होंगी।
इनकम टैक्स रिटर्न अर्थात ITR भरने की आखिरी तारीख काफी करीब आ गई है। आपने ITR भर लिया है या नहीं भी भरा है तो एक बार सबमिट करने से पहले जरूर चेक कर लें कि आपने सबकुछ सही-सही भरा है या नहीं।
अब आप सोचेंगे कि कैसे चेक करें कि सब सही है या नहीं, आपको ITR भरना भी था कि नहीं! तो हम आपको बताते हैं कि यह जरूरी काम आप कैसे कर सकते हैं। इसके लिए आपको खुद से कुछ सवाल करने होंगे, जिनका सही जवाब हम आपको बता रहे हैं। सवालों के जवाब सही हैं कि नहीं, इससे यह तय होगा कि आप इनकम टैक्स विभाग के रडार से बच पाएंगे या नहीं।
1. मुझे ITR कब नहीं भरना?
– अगर टैक्स डिडक्शन्स क्लेम करने के बाद मेरी इनकम छूट सीमा के भीतर आती है।
-अगर मेरी ग्रॉस इनकम (कुल आय) छूट की 2.5 लाख रुपये की सीमा से कम है।
-ऊपर दी गई दोनों में से एक भी केस है तो मुझे आईटीआर भरने की जरूरत नहीं।
जवाबः अगर डिडक्शन्स से पहले आपकी ग्रॉस इनकम (कुल आय) छूट की 2.5 लाख रुपये की सीमा से कम है तो आपको ITR नहीं भरना होगा। अगर डिडक्शन्स के बाद आपकी टैक्स लायबिलिटी सीमा से नीचे आ जाती है तो आपको रिटर्न भरना होगा।
2. मुझे कौन-सा ITR फॉर्म भरना है, अगर मैं सैलरीड हूं और अन्य स्रोतों से आय में सिर्फ स्टॉक्स पर LTCG 50,000 रुपये है?
– शेयरों पर 1 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर कोई टैक्स नहीं देना होगा, इसलिए आपको ITR 1 (सहज) भरना होगा।
-स्टॉक्स पर कैपिटल गेन्स दिखाने के लिए ITR 2 भरना होगा।
-मार्केट-लिंक्ड निवेश से होने वाली आय को दिखाने के लिए आपको ITR 3 भरना होगा।
जवाबः आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के रूप में चाहे जितना फायदा हो रहा हो, आपको ITR 2 भरना होगा। F & O से होने वाली आय के मामले में आपको ITR 3 भरना होगा।
3. मैंने अपनी पत्नी को मकान ट्रांसफर किया। मैं किराये से होने वाली आय को कैसे रिपोर्ट कर सकता हूं?
– इसे पत्नी के टैक्स रिटर्न में रिपोर्ट किया जाएगा क्योंकि मकान उनकी संपत्ति है।
– यह टैक्सेबल नहीं है क्योंकि पति या पत्नी को दिया गिफ्ट टैक्स के दायरे में नहीं आता।
– मुझे इस आय का डीटेल रिपोर्ट नहीं करना होगा क्योंकि टैक्स पहले ही अदा किया जा चुका है।
जवाबः बिना कन्सिडरेशन पत्नी को ट्रांसफर किए गए किसी भी ऐसेट पर पति को टैक्स देना होगा। किराये से होने वाली आय को पति की आय में जोड़ा जाएगा और मार्जिनल रेट के हिसाब से उस पर टैक्स देय होगा।
4. TDS डिडक्शन के बावजूद क्या FD से होने वाली आय का डीटेल देना होगा?
– जरूरत हो तो मुझे इस आय का ब्यौरा देना होगा और अतिरिक्त टैक्स जमा करना होगा।
– अगर यह टैक्स-सेविंग FD है तो मुझे रिफंड क्लेम करना चाहिए।
– मुझे इसका ब्यौरा देने की जरूरत नहीं क्योंकि इसपर टैक्स का भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
जवाबः भले FD के ब्याज पर टैक्स का भुगतान कर दिया हो, लेकिन आपको ITR में इसका डीटेल देना होगा और दोबारा अपनी टैक्स लायबिलिटी चेक करनी होगी। 30% के ऊंचे स्लैब में आने वाले को अतिरिक्त टैक्स देना होगा क्योंकि उस पर 10% टीडीएस ही कटेगा।
5. अगर हमारे जॉइंट बैंक अकाउंट की प्राइमरी होल्डर पत्नी है तो ब्याज पर टैक्स किसे अदा करना होगा?
– दोनों के द्वारा किए गए योगदान पर टैक्स अलग-अलग टैक्स देय होगा।
-दोनों के विद्ड्रॉल के आधार पर ब्यौरा देना होगा।
– पत्नी प्राइमरी होल्डर हैं इसलिए उन्हीं के ITR में इसका ब्यौरा दिया जाएगा।
जवाबः दोनों के द्वारा किए गए योगदान पर टैक्स अलग-अलग टैक्स देय होगा।
6.सीनियर सिटीजन पैरंट्स के स्वास्थ्य पर मेरे द्वारा खर्च किए जाने वाले 45,000 रुपये टैक्स छूट के दायरे में आएंगे?
-मैं 25,000 रुपये तक क्लेम कर सकता हूं।
-अगर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर्ड नहीं है तो उस पर डिडक्शन नहीं बनेगा।
-भले यह राशि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर नहीं होती, इस पर अतिरिक्त डिडक्शन लिया जा सकता है।
जवाबः अगर आपके पैरंट्स के पास हेल्थ कवर नहीं है तो आप 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह राशि हेल्थ कवर प्रीमियम की 25,000 रुपये की राशि से अलग है।
7. इनमें से कौन-कौन सी आय को इनकम टैक्स रिटर्न में फाइल करने की जरूरत नहीं?
– PPF विद्ड्रॉल अमाउंट, क्योंकि इस पर टैक्स नहीं बनता।
– नाबालिग बच्चे के नाम FD पर 1500 रुपये से कम की ब्याज आय।
– बचत खाते पर 10,000 रुपये से कम की ब्याज आय।
जवाबः नाबालिग बच्चे के नाम FD पर 1500 रुपये से कम की ब्याज आय टैक्स-फ्री है और इसे आईटीआर में रिपोर्ट करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अन्य टैक्स-फ्री आय का ब्यौरा एग्जेंप्ट इनकम के तहत देना होता है।
8. बीते साल खरीदे गए शेयरों पर हुए शॉर्म टर्म नुकसान को कैसे सेट-ऑफ कर सकता हूं?
– स्टॉक्स और इक्विटी फंड्स से हुए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के अगेन्स्ट।
-ब्याज और किराये से होने वाली आय और अन्य रपूंजीगत लाभ के अगेन्स्ट।
-किसी पूंजीगत संपत्ति से होने वाले शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म गेन्स के अगेन्स्ट।
जवाबः बीते साल खरीदे गए शेयरों पर हुए शॉर्म टर्म नुकसान को किसी पूंजीगत संपत्ति से होने वाले शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म गेन्स के अगेन्स्ट सेट ऑफ किया जा सकता है। लॉन्ग टर्म के मुकसान को लॉन्ग टर्म गेन्स के अगेंस्ट ही सेट-ऑफ किया जा सकता है और कैपिटल लॉस को कैपिटल गेन्स के अगेंस्ट।
ये सब जानकारियां देने के बाद देखे आप टैक्स विभाग के रडार पर आने से बच पाएंगे या नहीं? आपका स्कोर क्या है, यह इस बात पर निर्भर करेगा।
स्कोरः 0-3 (नहीं बच पाएंगे)
अगर आपका स्कोर 0-3 के बीपच आता है तो समझिए आपको टैक्स फाइलिंग के बारे में बहुत जानकारी नहीं है। हो सकता है आपको सेक्शन 139(9) के तहत नोटिस मिले, यानी डिफएक्टिव रिटर्न नोटिस।
स्कोरः 3-6 (शायद बच जाएं)
आपको टैक्स फाइलिंग की अच्छी जानकारी है, लेकिन आपको और ध्यान देने की जरूरत है ताकि कोई चूक न रह जाए।
स्कोरः 7-8 (हां, बच जाएंगे)
आप अप टु डेट हैं और टैक्स फाइलिंग को लेकर आपके पास पूरी जानकारी है। हर साल नियमों में होने वाले बदलावों पर नजर रखिए और खुद को अपडेट रखिए।
-एजेंसियां

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