Myanmar में हिन्दुओं की सामूहिक हत्या पर अब कहां गए सेक्युलर

Myanmarमें हिन्दुओं की सामूहिक हत्या पर सभी बुद्धिजीवियों, राजनीतिज्ञों की बुद्धि को लकवा मार गया है, लेखकों की स्याही सूख गई, मीडिया चर्चा करने वालों की शर्म मर गई। उन्हें डर सता रहा हिन्दु अल्पसंख्यक का पक्ष ले कहीं गैर सेक्यूलर न हो पाए?

‘‘अनेकता में एकता’’ देश की विशेषता पर पूरा विश्व अचंभित है कि विभिन्न धर्म, समुदाय, संप्रदाय के लोग भारत में एक साथ सौहार्द्रपूर्ण रहते हैं। पूरे विश्व के लिए यह एक शोध का विषय है। यह शांति कुछ अशांत लोगों को बिल्कुल भी नहीं सुहाती है और ऐसे लोग पूरे मनोयोग से भारत में अशांति, अलगाववाद के सहारे सेंध मारने के लिए जी जान से लगे हुए हैं, भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 अपने देश के प्रत्येक नागरिक को बोलने/अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है।

स्वतंत्रता हमेशा दोहरी होती है अर्थात् कुछ कहने की स्वतंत्रता तो कुछ न कहने का प्रतिबंध अर्थात् आप ऐसा कुछ भी नहीं कहेंगे जिससे देश की एकता, अखण्डता प्रभावित हो। निःसंदेह देश सर्वोपरि है लेकिन विगत कुछ दशकों से भारत के ही कुछ असामाजिक तत्व तथाकथित बुद्धिजीवी, धर्म के ठेकेदार राजनीति के कुछ लोग अपने को अहम, आधुनिक खयालात के बता, तो कभी राजनीति की मजबूरी, कभी वोट की नीति के चलते वो सब करतब दिखाने को आतुर रहते है जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहरा सकते।
पूरा विश्व जानता है कि पहले भारतवर्ष का क्या विस्तार था लेकिन समय के चक्र में अपने स्वार्थों के चलते अलग होते चले गए। फिर बात चाहे पाकिस्तान की हो या अन्य की। यहां धर्म आधारित भारत-पाक विभाजन की हो।
हाल ही में Myanmar के रोहिग्याओ की भारत में अवैध धुसपैठ की हो जिनका संबंध आतंकी गुटो से है की पुष्टि आन सान सू 1991 में नोबेल पुरस्कार विजेता ने भी अपने एक उद्बोधन में कही जो कही न कही भारत द्वारा पूर्व की कही बातों की पुष्टि है।

Myanmar की पृष्ठ भूमि में जाए 33 लाख की आबादी में से रखाइन प्रांत जहां रोहिग्यां मुस्मिल आबादी लगभग10 लाख है, इसके अलावा पाकिस्तान में 25-35 लाख, साऊदी अबर में 2.5-5 लाख, बांग्लादेश में 2.5-35 लाख, मलेशिया 20.45 हजार, थाईलैण्ड 3-20 हजार, भारत में 40 हजार की संख्या में है, म्यांमार में बौद्ध धर्म प्रमुख है एवं बहुसंख्यक भी है, निःसंदेह बौ, धर्म ने शांति का प्रचार किया, लेकिन म्यांमार के रखाइन क्षेत्र में रोहिग्यां मुस्लिमों की अधिकता है। इनमें विकसित कुछ लोग आतंकी संगठन के बल पर मार काट में समाहित हो गए जिससे स्थानीय लोग एवं रोहिग्याओं के मध्य आये दिन झड़पे होने लगी। बार-बार वहां की सेना को भी हस्तक्षेप करना पड़ता था। यही आगे चले भीषण रूप धारण कर ली।
अतः रोहिग्याओं को वहां से अपने कर्मों के चलते भागना पड़ा और पड़ोसी मुल्कों जिसमें बांग्लादेश भारत में अवैध रूप से घुसपैठ शुरू हुई। एक आंकड़े के अनुसार भारत में रोहिग्याओं की संख्या लगभग 40 हजार बताई जाती है जिसमें पश्चिमी बंगाल, जम्मू कश्मीर, जयपुर, दिल्ली, फरीदाबाद में फैल गए। कुछ ने तो बाकायदा भारतीय नागरिक की तरह परिचय पत्र तक बनवा डाले।

चूंकि ये मुस्लिम समुदाय से है इसलिए भारत में सोए तथाकथित बयानवीर, सम्प्रदाय के ठेकेदार, तथाकथित बुद्धिजीवी, सेक्यूलरवादी लोग बरसाती मेंढ़क की तरह अपनी-अपनी तरह से टर्र-टर्राने लगे। कुछ तो यहां तक कहने लगे कि ये लोग किसी समय में भारत से ही Myanmar गए थे अतः इनकीं वापस कराने की इजाजत शरणार्थी के रूप में दी जायें। ऐसी बुद्धिहीन लोग कल यह भी कह सकते है। यदि पाकिस्तान का नागरिक भारत में रहना चाहे तो उसे भी रख लो, क्योंकि पाक पहले भारत का ही अंग था, तरस आता है ऐसों की बुद्धि पर। दूसरी ओर म्यांमार में हिन्दुओं की सामूहिक हत्या पर सभी बुद्धिजीवियों, राजनीतिज्ञों की बुद्धि को लकवा मार गया है, लेखकों की स्याही सूख गई, मीडिया चर्चा करने वालों की शर्म मर गई। उन्हें डर सता रहा हिन्दु अल्पसंख्यक का पक्ष ले कहीं गैर सेक्यूलर न हो पाए? ऐसे ढांेगियों, नोटंकी बाजों को यह नहीं भूलना चाहिए कि विश्व में 56 मुस्लिम देश हैं। फिर ईसाई धर्म, हिन्दु भारत की ओर न देखेगा तो कहां जायेगा? उसके लिए तो केवल भारत ही एक मात्र ठोर है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक के रूप में हिन्दुओं पर होने वाला अत्याचार धर्म परिवर्तन किसी से छिपा नहीं है। भारत में ही कश्मीर में हिन्दुओं का पलायन पर एक भी बुद्धिजीवी, लेखक, चर्चाकार सामने नहीं आया। कश्मीर में ही हमारे नौजवान बहादुर सैनिकों की शौर्यपूर्ण प्राणो का न्यौछावर जिसमें भारतीय मुस्लिम भी रहे।

रमजान मोहम्मद की शहादत पर जैसे अन्य पर भारतीय मुस्लिम समुदाय को क्या लकवा मार गया है? जो दूसरे देश के मुस्लिमों के लिए घडियाली आंसू बहाते नहीं थकते, मानवाधिकार की दुहाई देते, बात-बात पर अपने अवार्ड लौटाने वाले असहिष्णुता से दम घुटने वास्ते कहां किस कब्र में दफन है? आवाज उठाना ही तो इन भारतीयों के समर्थन में एक मत हो जात-पात धर्म, समुदाय, सम्प्रदाय से ऊपर उठ भारत और भारतीयों के विरूद्ध आतंकी ताकतों से लड़ विजय प्राप्त करना होगी। शायद यही अच्छा दशहरा होगा।

– डॉ. शशि तिवारी
शशि फीचर.ओ.आर.जी.
लेखिका सूचना मंत्र की संपादक हैं