जब नूरजहां बोलीं, हाय अल्लाह! ना-ना करदियाँ वी 16 हो गए नी

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की हरदिल अजीज गायिका रहीं नूरजहां की 21 सिंतबर को सालगिरह है। साल 1926 को जन्मी नूरजहां का असली नाम अल्लाह राखी वसाई था। 1930 से 1990 तक यानी सात दशक तक अपनी जादुई आवाज से दर्शकों का दिल जीतने वाली नूरजहां को मल्लिका-ए-तरन्नुम का खिताब पाकिस्तान में मिला था। बीबीसी के एक लेख के मुताबिक फरीदा खानम जो कि नूरजहां की दोस्त थीं और नूरजहां की कार जब लड़कों के सामने से गुजरती थी तो धीमी हो जाया करती थीं ताकि ये दोनों नौजवान लड़कों को जी भर के देख सके।

जब 1998 में नूरजहाँ को दिल का दौरा पड़ा, तो उनके एक मुरीद और नामी पाकिस्तानी पत्रकार खालिद हसन ने लिखा था- “दिल का दौरा तो उन्हें पड़ना ही था. पता नहीं कितने दावेदार थे उसके! और पता नहीं कितनी बार वह धड़का था उन लोगों के लिए जिन पर मुस्कराने की इनायत की थी उन्होंने.”

अली अदनान पाकिस्तान के जाने माने पत्रकार हैं और इस समय अमरीका में रहते हैं. उन्होंने नूरजहाँ पर ख़ासा शोध किया है. जब वो पहली बार उनसे मिले तो वो काफ़ी ख़राब मूड में थीं.

अली याद करते हैं, “नूरजहाँ उस दिन नज़ीर अली के लिए गाना रिकॉर्ड कर रही थीं और उनके गुस्से का निशाना थे मशहूर बांसुरीवादक ख़ादिम हुसैन. राग दरबारी की बंदिश में नूरजहाँ कोमल धैवत को और बारीक चाह रही थीं लेकिन ख़ादिम हुसैन से बात बन नही पा रही थी. उनके मुंह से ख़ादिम हुसैन के लिए अपशब्दों का जो सैलाब निकला था उसे सुन कर सब हक्का बक्का रह गए थे.”

अली अदनान के मुताबिक नूरजहाँ की ये अदा हुआ करती थी कि वो कोई भी फ़होश या बेहूदा बात कह कर मुस्करा देती थीं कि ये मैंने क्या कहा दिया और सामने बैठा शख़्स ये सोचने पर मजबूर हो जाता था कि नूरजहाँ के मुंह से इस तरह की बात कैसे निकल सकती है. अली कहते हैं, “मैंने उनके मुंह से ऐसे ऐसे अपशब्द सुने हैं कि हीरा मंडी के बाउंसर या पुलिस के थानेदार का चेहरा भी उन्हें सुनकर शर्म से लाल हो जाए.”

गाना रिकॉर्ड करते समय नूरजहाँ उसमें अपना दिल, आत्मा और दिमाग़ सब कुछ झोंक देती थीं. अली बताते है कि उन्होंने अक्सर स्टूडियो में नूरजहाँ को उनके पीछे बैठकर रिकॉर्डिंग कराते सुना है.

अली ने बताया, “वो जो ब्लाउज़ पहनती थीं उसका गला भी बहुत लो होता था और कमर से भी उसका बहुत सा हिस्सा पीछे बैठे शख़्स को नज़र आता था. वो करीब डेढ़ बजे के आसपास रिकॉर्डिंग शुरू करती थीं लेकिन घंटे भर के अंदर उनकी पीठ पर पसीने की बूंदें दिखनी शुरू हो जाती थीं. रिकॉर्डिंग ख़त्म होतो होते वो पूरी तरह से पसीने से सराबोर होती थीं. यहाँ तक कि वो जब माइक से हटतीं थीं तो उनके नीचे का फ़र्श भी पसीने से गीला हो चुका होता था. कहने का मतलब, वो बहुत मुश्किल से गातीं थी और उनको गाने में बहुत जान मारनी पड़ती थी.”

भारत और पाकिस्तान की संगीत परंपराओं पर ख़ासा काम करने वाले प्राण नेविल भारत के राजनयिक भी रह चुके हैं. उनकी नूरजहाँ से पहली मुलाक़ात 1978 में हुई थी जब वो अमरीका में सिएटल में एक कंसर्ट करने आई थीं.

प्राण नेविल याद करते हैं, “उन दिनों मैं सिएटल में भारत का काउंसल जनरल हुआ करता था. चूँकि वहाँ पाकिस्तान का कोई दूतावास नहीं था इसलिए आयोजक मुझे मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाना चाहते थे. उन्होंने नूरजहाँ से इसकी इजाज़त माँगी. नूरजहाँ ने कहा कि ये शख़्स हिंदुस्तानी हो या पाकिस्तानी मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. मेरी शर्त ये है कि वो देखने में अच्छा होना चाहिए. सामने बदशक्ल व्यक्ति को बैठे देख मेरा मूड ऑफ़ हो जाएगा.”

नेविल ने आगे बताया, “आयोजकों ने उन्हें समझाया कि वो साहब देखने में बुरे नहीं है, सबसे बड़ी बात ये है कि वो लाहौर के हैं और आपके बहुत बड़े फ़ैन हैं. तब जा कर नूरजहाँ मानी. जब मैंने उनसे फ़रमाइश की कि लगा है मिस्र का बाज़ार गाइए तो उनके चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और उन्होंने वो गाना गाया.”

नूरजहाँ ने महान बनने के लिए बहुत मेहनत की थी और अपनी शर्तों पर ज़िंदगी को जिया था. उनकी ज़िंदगी में अच्छे मोड़ भी आए और बुरे भी! उन्होंने शादियाँ की, तलाक दिए, प्रेम संबंध बनाए, नाम कमाया और अपनी ज़िंदगी के अंतिम क्षणों में बेइंतहा तकलीफ़ भी झेली. एक बार पाकिस्तान की एक नामी शख़्सियत राजा तजम्मुल हुसैन ने उनसे हिम्मत कर पूछा कि आपके कितने आशिक रहे हैं अब तक?

उन्होंने जवाब दिया, “सब आधे सच.”

“तो आधे सच ही बता दीजिए”- तजम्मुल ने जोर दिया. नूरजहाँ कुछ ज्यादा ही दरियादिल मूड में थीं. उन्होंने गिनाना शुरू किया. कुछ मिनटों बाद उन्होंने तजम्मुल से पूछा, “कितने हुए अब तक?”

तजम्मुल ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया- अब तक सोलह! नूरजहाँ ने पंजाबी में क्लासिक टिप्पणी की- “हाय अल्लाह! ना-ना करदियाँ वी 16 हो गए ने!”

नूरजहाँ का सबसे मशहूर इश्क था पाकिस्तान के टेस्ट क्रिकेटर नज़र मोहम्मद से और इसी वजह से नज़र मोहम्मद का टेस्ट कैरियर वक्त से पहले ही ख़त्म हो गया.

अली अदनान कहते हैं, “नूरजहाँ को पुरुष बहुत पसंद थे. उनके ही अलफ़ाज़ इस्तेमाल करता हूँ, पंजाबी में कहती थीं- जदों मैं सोहना बंदा देखती हां, ते मैन्नू गुदगुदी हुंदी है. एक बार उनको और नज़र मोहम्मद को उनके पति ने एक कमरे में रंगे हाथ पकड़ लिया. नज़र ने पहली मंज़िल की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उनका हाथ टूट गया. उन्होंने एक पहलवान से अपना हाथ बैठवाया लेकिन वो ग़लत जुड़ गया और उनको वक्त से पहले ही टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो जाना पड़ा.”

1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के समय उनका नाम पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल याहिया ख़ाँ से भी जोड़ा गया. नूरजहाँ ने खुद कभी इसकी पुष्टि नहीं की. लेकिन ये सर्वविदित है कि जनरल याहिया को सुंदर औरतों का साथ बहुत पसंद था और मैडम नूरजहाँ से बेहतर साथ और किसका हो सकता था.

पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार ख़ालिद हसन ने एक बार इसका ज़िक्र करते हुए लिखा था कि एक बार जनरल याहिया ने अपनी शामों के साथी और मातहत जनरल हमीद से कहा था, “हैम, अगर में नूरी को चीफ़ ऑफ़ द स्टाफ़ बना दूँ, तो वो तुम लोगों से कहीं बेहतर काम करेगी.” नूरजहाँ याहिया को सरकार कह कर पुकारा करती थीं और उनके लड़के अली की शादी में उन्होंने गाने भी गाए थे.

-BBC

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