FIFA WC 2018 में आखिर क्या है फुटबॉल की सबसे सफल रणनीति Tiki-Taka

स्पेन फुटबॉल टीम अपनी रणनीति Tiki-Taka के लिए मशहूर है, स्पेन ने साल 2010 और 2012 में अपनी इसी रणनीति के दम पर विश्व कप अपने नाम किया। तो आइये जानते हैं कि क्‍या है Tiki-Taka

फुटबॉल के लिए स्टेमिना और हुनर को ज़रूरी माना जाता है लेकिन बाकि सभी खेलों की तरह इसमें भी रणनीति अहम रोल अदा करती है। कई टीमें अपनी रणनीति के बल पर टूर्नामेंट में छा जाती हैं तो वहीं कुछ टीमें इसे ठीक से अपना नहीं पातीं। अपनी ऐसी ही एक रणनीति ‘टिकी टाका’ के लिए स्पेन की फुटबॉल टीम भी मशहूर है। स्पेन ने साल 2010 में अपनी इसी रणनीति के दम पर फीफा वर्ल्ड कप अपने नाम किया और 2012 में यूरो कप। तो वहीं 2014 में जर्मनी ने भी इसी शैली को अपना कर वर्ल्ड कप जीता।

आखिर क्या है Tiki-Taka

स्पेन ने अपनी इस ख़ास रणनीति को ‘टिकी-टाका’ का नाम दिया। इसे ‘वन टच फुटबॉल’ भी कहा जाता है। टिकी-टाका शैली 70 और 80 के दशक की हॉलैंड टीम के टोटल फुटबॉल से प्रभावित है। इस शैली में न तो फॉरवर्ड का महत्व है और न ही डिफेंडर्स का। सारा ज़िम्मेदारी मिडफील्डर्स पर होती है। इस शैली में गेंद एक खिलाड़ी के पास ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं और जितना जल्दी हो सके इसे दूसरे खिलाड़ी की ओर बढ़ा दिया जाता है। एक खिलाड़ी से दूसरे खिलाड़ी, दूसरे से तीसरे, तीसरे से चौथे और ऐसे करते-करते विरोधी टीम के गोल पोस्ट तक पहुंचा जाता है। टिकी-टाका में विपक्षी टीम उलझ जाती है और मौका ताड़कर टीम गोल करने में कामयाब हो जाती है।

बेहद सफल हुआ ये फॉर्मूला
स्पेनिश लीग से लेकर स्पेन के छोटे-बड़े टूर्नामेंट से विश्व स्तर पर ये शैली मशहूर हो गई। इससे खेल में तेज़ी आई और खिलाड़ी गोल तक जल्दी पहुंचने में भी सफलता हुए। गोल हो चाहे या ना हो, लेकिन शॉट जड़ने की संख्या बढ़ गई और इससे सफलता की उतनी ही उम्मीद बढ़ गई।

फेल भी हुई है ‘टिकी टाका’ शैली
मज़बूत डिफेंस और तेज़ तर्रार काउंटर अटैक की मदद से टिकी-टाका को विफल किया जा सकता है। क्लब स्तर पर टिकी-टाका शैली से खेलने वाली बार्सिलोना टीम को चेल्सी ने अपने मज़बूत डिफेंस से कभी कामयाब नहीं होने दिया। चेल्सी को देखते हुए अन्य टीमों ने भी बार्सिलोना के खिलाफ सफलता पाई।

Tiki-Taka का सफर

– स्पेन में टिकी-टाका की शुरुआत बार्सिलोना के पूर्व मैनेजर जॉन क्रूयुफ (हॉलैंड के पूर्व खिलाड़ी) ने 1988 में की थी। यह शैली हॉलैंड टीम की टोटल फुटबॉल से प्रभावित है।

– स्पेन की फुटबॉल टीम ने इस शैली को 2006 में ही अपनाया था लेकिन उसे इसके साथ सफलता मिलने की शुरुआत 2008 यूरो कप से हुई. इस फॉर्मूला ने स्पेन को दुनिया की सबसे मज़बूत फुटबॉल टीमों में तब्दील कर दिया।

– 2010 वर्ल्ड कप और 2012 यूरो कप में भी स्पेन की टीम इसी शैली से खेली और चैंपियन बनने में सफल रही। इस दौरान कोई भी टीम उसे चुनौती देने में सफल नहीं हो सकी।

– 2014 वर्ल्ड कप के दौरान जर्मनी ने भी इस फॉर्मूले को अपनाया और नई ऊंचाइयों तक ले गया।

जर्मनी ने Tiki-Taka की मदद से अपना चौथा फीफा खिताब जीता। जर्मनी के कोच लोकिम लो स्पेनिश शैली से इतने प्रभावित हुए कि उसे अपनी रणनीति का भी हिस्सा बनाया।

-एजेंसी

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