आखिर है क्‍या ब्रिटेन का Brexit विवाद, समझिए आसान शब्दों में

पूरी दुनिया पर राज करने वाला और यूरोपियन यूनियन (ईयू) का सिक्का जमाने वाला दि ग्रेट ब्रिटेन अब Brexit के जरिए ईयू से अलग होना चाहता है। इस मसले पर ब्रिटेन की संसद ले लेकर जनता के दो भाग हो गए हैं। यूरोपीय संसद भी ब्रेक्जिट के मामले में फैसला लेने में असमर्थ रही है। वहीं, पूरी दुनिया से ब्रेक्जिट पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इन सबके बीच यह समझना जरूरी है कि ब्रेक्जिट आखिर है क्या और इस मामले में क्या उथल-पुथल हो रही है।

Brexit यानी ब्रिटेन+एक्जिट

ब्रेक्जिट का सीधा सा मतलब है ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से बाहर जाना। पूरी दुनिया में इस बात को लेकर असमंजस है कि ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन में रहेगा या नहीं। फिलहाल यह फैसला ब्रिटेन की संसद के हाथ में है कि वह ईयू में रहना चाहती है या नहीं।
दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होने के युद्ध में भाग लेने वाले सभी देशों को नुकसान झेलने पड़े थे। ऐसे में युद्ध समाप्ति के पांच साल बाद फ्रांस और जर्मनी एक योजना लेकर आए जिसके तहत यह अनुबंध था कि दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ फिर युद्ध में भाग नहीं लेंगे। इस योजना के तहत छह देशों ने साल 1950 में एक डील पर हस्ताक्षर किए। सात साल बाद रोम में एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया यूरोपीय आर्थिक समुदाय यानी ईसीसी।

इसी यूरोपीय आर्थिक समुदाय को आज यूरोपीय यूनियन के रूप में जाना जाता है। साल 1973 की शुरुआत में तीन नए देश इससे जुड़े। इनमें से एक देश ब्रिटेन था। वर्तमान में ईयू में 28 सदस्य हैं और इनकी कुल आबादी करीब 50 करोड़ है।

ये देश हैं यूरोपियन यूनियन के सदस्य

समय के साथ यूरोपियन यूनियन में तेजी से देश शामिल हुए हैं। छह सदस्यों से शुरू हुए यूरोपियन यूनियन में आज 28 देश हैं। शुरुआत में बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, लग्जमबर्ग और नीदरलैंड ने ईईसी में हस्ताक्षर किए थे। इन देशों के लिए साल 1957 में एकल बाजार था। ब्रिटेन, आयरलैंड और डेनमार्क ईयू से साल 1973 में जुड़े। इसके बाद साल 1981 में ग्रीस और पुर्तगाल इस संघ का हिस्सा बने।

इसके ठीक पांच साल बाद यानी साल 1986 में स्पेन इसका भाग बना। पूर्वी जर्मनी एकीकरण के बाद इसमें शामिल हुआ वहीं, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड और स्वीडन 1995 में यूरोपियन यूनियन का हिस्सा बने। साल 2004 में सबसे ज्यादा 10 देश यूरोपियन यूनियन से जुड़े। साल 2007 में रोमानिया और बुल्गारिया ईयू से जुड़े। वर्तमान में ईयू का नवीनतम सदस्य क्रोएशिया है, जो कि 2013 में इससे जुड़ा था।

इस तरह काम करता है ईयू

यूरोपीय यूनियन को चलाने के लिए चार मुख्य संस्थान हैं। यूरोपियन कमीशन, यूकोपियन पार्लियामेंट, दि काउंसिल ऑफ यूरोपियन यूनियन और कोर्ट ऑफ जस्टिस। ये संस्थान प्रमुख रूप से यूरोपियन यूनियन को संचालित करते हैं।

साल 2016 में ब्रिटेन में जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें बहुमत ब्रिटेन का ईयू से अलग होने के पक्ष में था। ब्रेक्जिट पर जनमत संग्रह के रुझान के बाद तत्कालीन कैमरन सरकार को इस्तीफा देना पड़ गया था। तब कंजर्वेटिव पार्टी की टेरीजा मे की अगुवाई में सरकार बनी।

बता दें कि ब्रेक्जिट की तारीख 29 मार्च 2019 तय की गई थी। ब्रिटिश संसद में ब्रेक्जिट प्रस्ताव लगातार तीसरी बार खारिज हो चुका है। अब स्थिति यह बन चुकी है कि अगर इस मसले पर 12 अप्रैल 2019 तक संसद में आम सहमति नहीं बनी तो ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से खुद ही बाहर हो जाएगा।

यूरोपीय यूनियन में रहते हुए भी अलग रहा है ब्रिटेन

ब्रिटेन और आयरलैंड ऐसे दो देश हैं जो यूरोपियन यूनियन में रहते हुए भी इससे अलग हैं। यूनियन में 1992 में मास्ट्रिच समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे जिसमें यूनियन की एक करेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया गया जिसे बाद में यूरो नाम दिया गया। इसके बाद एक सेंसेजन समझौता भी हुआ जिसके तहत साथी देशों के लिए बॉर्डर पर पेपरवर्क खत्म कर दिया गया। लेकिन, ब्रिटेन और आयरलैंड दोनों ही इस शर्त से बाहर रहे। यानी, इन दो देशों के लिए ये नियम लागू नहीं था।

कंजर्वेटिव पार्टी की मुख्य समस्या फ्री लेबर मूवमेंट से है, क्योंकि यूनियन इकलौता बाजार है और किसी देश का इंसान किसी भी देश में काम कर सकता है।
संघ से बाद में जुड़े पूर्वी यूरोपीय देशों से भी किसी भी सदस्य देश में लोग आ-जा सकते हैं। इन देशों को आर्थिक तौर पर दूसरे देशों के मुकाबले पिछड़ा माना जाता है।
तीसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि ईयू की सरकार जनता के चुनाव से नहीं आती। देशों के नेता ही किसी को वहां भेज देते हैं जोकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
यूनियन का सदस्य बने रहने के लिए हर साल को एक राशि देनी होती है। हालांकि सारे सदस्यों के पैसे मिलाकर भी ये पैसा ईयू की जीडीपी का 2.5 फीसद ही है।
यूरोपीय यूनियन के कानून बहुत जटिल होते जा रहे हैं। वर्तमान में इसमें लगभग सात हजार नियम-कानून बन गए हैं।
इसके साथ ही फिलहाल सीरिया और ईराक से बड़ी संख्या में विस्थापन हो रहा है। इसके अलावा ग्रीस को भी पैसे देने पड़ रहे हैं।

ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने यानी ब्रेक्जिट का काउंटडाउन एक बार फिर शुरू हो चुका है। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे ब्रेक्जिट के समर्थन के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रही हैं। टेरीजा मे के विदड्राल एग्रीमेंट (वापसी समझौता) के खिलाफ दो बार वहां के सांसद वोटिंग कर चुके हैं। इसके साथ ही नो-डील ब्रेक्जिट के साथ दूसरे जनमत संग्रह को भी खारिज कर चुके हैं।

हालांकि, यूरोपियन यूनियन द्वारा आर्टिकल 50 को सशर्त विस्तार दिए जाने के बाद अब ब्रेक्जिट का भविष्य वहां के सांसदों पर निर्भर करता है।

2013 से अब तक ब्रेक्जिट घटनाक्रम

23 जनवरी 2013 : ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपने भाषण में जनमत संग्रह का वादा किया। उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन के लोगों को यूरोप पर अपना पक्ष जरूर रखना चाहिए।

23 जून 2016 : यूरोपियन यूनियन जनमत संग्रह के दौरान ब्रिटेन ने ईयू से अलग होने के पक्ष में 51.9 फीसद वोट किया।

03 नवंबर 2016 : आर्टिकल 50 को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती।

14 फरवरी 2017 : ब्रिटेन की संसद ने आर्टिकल 50 के पक्ष में वोट किया।

30 मार्च 2017 : ब्रिटिश सरकार ने यूरोपियन यूनियन विदड्रॉल बिल प्रकाशित किया। इसके अनुसार ब्रेक्जिट के बाद यूरोप का कानून ब्रिटेन पर लागू नहीं होगा।

31 मार्च 2017 : यूरोपियन यूनियन ने ब्रिटेन के साथ ब्रेक्जिट प्रकिया पर बातचीत के लिए दिशा निर्देश तैयार किए।

26 जून 2017 : ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हुई।

13 सितंबर 2017 : ब्रेक्जिट की फाइनल डील पर वोट देने के लिए सरकार पर दबाव बना।

15 दिसंबर 2017 : ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन ने दूसरे चरण की बातचीत पर सहमति जताई।

21 जुलाई 2018 : ब्रिटेन की सरकार ने ब्रेक्जिट व्हाइट पेपर प्रकाशित किया जिसमें कई अहम बातें शामिल की गई थीं।

20 अक्टूबर 2018 : लगभग पांच लाख लोगों ने लंदन की सड़कों पर उतर कर दूसरे जनमत संग्रह का विरोध किया।

22 अक्टूबर 2018: टेरीजा मे ने ब्रेक्जिट पर हुई बातचीत की जानकारी पार्लियामेंट को दी।

12 नवंबर 2018 : टेरीजा मे ने कहा कि ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और ब्रेक्जिट का गतिरोध जल्द समाप्त होगा।

14 नवंबर 2018 : ब्रेक्जिट एग्रीमेंट के मसौदे पर कैबिनेट मीटिंग हुई।

15 नवंबर 2018 : वापसी समझौते का मसौदा प्रकाशित होने के बाद दूसरे ब्रेक्जिट सेक्रेटरी डोमिनिक राब ने इस्तीफा दिया।

25 नवंबर 2018 : यूरोपियन यूनियन के नेताओं ने टेरीजा मे की ब्रेक्जिट डील को स्वीकार किया।

04-10 दिसंबर 2018 : हाउस ऑफ कॉमंस के सांसद टेरीजा मे के वापसी समझौते की डील पर 40 घंटे की चर्चा करने वाले थे। लेकिन इस डील की भारी आलोचना और इसके विरोध में वोट पड़ने के अनुमानों को देखते हुए जो वोट 11 दिसंबर को होना था उसे मे ने टाल दिया। मे के बयान के बाद डॉलर के मुकाबले पाउंड 20 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

05 जनवरी 2019 : पूर्व चांसलर और गृह सचिव केन क्लार्क ने सरकार से आर्टिकल 50 वापस लेने को कहा साथ ही कहा कि ब्रिटेन को ब्रेक्जिट पर बातचीत के लिए कुछ और वक्त दिया जाए।

15 जनवरी 2019 : सांसदों ने एतिहासिक रूप से वोट डालकर ब्रेक्जिट सौदे को खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री टेरीजा मे की हार हुई।

16 जनवरी 2019 : टेरीजा मे ने दूसरा विश्वास मत हासिल किया।

21 जनवरी 2019 : टेरीजा मे ने महत्वपूर्ण वोट गंवाने के बाद जरूरत के अनुसार सांसदों के सामने ब्रेक्जिट का ‘प्लान बी’ पेश किया।

29 जनवरी 2019 : सांसदों ने टेरीजा मे से कहा कि वह फिर से ईयू के साथ वापसी समझौते पर फिर से बातचीत करें।

30 जनवरी 2019 : नाइगेल फराज ने यूरोपियन संसद में दिए भाषण में कहा कि कोई भी देश ईयू के साथ टेरीजा मे के ब्रेक्जिट सौदे पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं होगा।

05 फरवरी 2019: बेलफास्ट में टेरीजा मे ने बिजनेस लीडर्स के बीच दिए अपने भाषण में यूरोपियन यूनियन के साथ ब्रेक्जिट डील करने का वादा किया।

07 फरवरी 2019 : वापसी समजौते में बदलाव को यूरोपियन यूनियन ने खारिज किया। ईयू कमीशन के प्रेसिडेंट जीन-क्लाउड जंकर ने ब्रूसेल्स में टेरीजा मे से कहा कि उनके समझौते पर ईयू के शेष 27 देश समझौता वार्ता नहीं करेंगे।

18 फरवरी 2019 : सांसद लुसियाना बर्जर, चुका उमुन्ना, गेविन शुकर, क्रिस लेस्ली, एंजेला स्मिथ, माइक गेप्स और एन्न कॉफी लेबर पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय सांसद बने।

20 फरवरी 2019 : तीन कंजर्वेटिव सांसदों- एन्ना सोब्री, सारा वॉलैस्टन और हेइडी एलेन ने इंडिपेंडेंट ग्रुप ज्वॉइन किया।

24 फरवरी 2019 : टेरीजा मे ने हाउस ऑफ कॉमंस में ब्रेक्जिट डील पर उस हफ्ते वोटिंग की संभावना से इनकार किया। मे ने कहा कि 12 मार्च को वोटिंग होगी। उन्होंने कहा, ‘यह विकल्प अब भी हमारे पास है कि हम डील के साथ 29 मार्च को यूरोपियन यूनियन से अलग हो जाएं।’

12 मार्च 2019 : सांसदों ने दूसरी बार टेरीजा मे के वापसी समझौते को खारिज किया। इस हार के बाद टेरीजा मे ने कहा, ‘आज रात लिए गए इस फैसले पर मुझे गहरा अफसोस है।

13 मार्च 2019 : ब्रिटेन के सांसदों ने नो-डील ब्रेक्जिट को पूरी तरह खारिज कर दिया।

14 मार्च 2019 : ब्रिटेन के सांसदों ने ब्रेक्जिट में विलंब के अनुरोध के पक्ष में वोट किया लेकिन दूसरे जनमत संग्रह को खारिज कर दिया।

18 मार्च 2019 : हाउस ऑफ कॉमंस के स्पीकर जॉन बर्को ने टेरीजा मे से कहा कि वह ब्रेक्जिट डील को महत्वपूर्ण बदलावों के साथ पेश करें।

21 मार्च 2019 : यूरोपियन यूनियन ने ब्रेक्जिट के लिए 12 अप्रैल तक की अवधि स्वीकार की जब तक कि टेरीजा मे का प्रस्ताव सांसदों द्वारा पारित नहीं हो जाता। टेरीजा मे ने कहा कि अब 12 अप्रैल की तारीख महत्वपूर्ण है। यह हमें और सांसदों को अपने विकल्प पर विचार करने और उस पर अमल अवसर देता है। 21 मार्च तक ब्रेक्जिट के खिलाफ 20 लाख से अधिक हस्ताक्षर किए गए।

02 अप्रैल 2019 : ब्रिटिश सांसदों ने सरकार के तीन समझौतों को खारिज करने के बाद ब्रेक्जिट के लिए चार संभावित वैकल्पिक योजनाओं के खिलाफ मतदान किया।

03 अप्रैल 2019 : ब्रेक्जिट समझौते की शर्तों में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा शामिल नहीं करने पर नाराज पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया।
-एजेंसी

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