कीटो डाइट क्या होती है, और क्‍या इससे मौत हो सकती है?

कीटो डाइट जिसे कीटोजेनिक डाइट भी कहा जाता है, एक हाई-फ़ैट डाइट होती है. इस डाइट में शरीर ऊर्जा के लिए फ़ैट पर निर्भर करता है. इस डाइट में कार्बोहाइड्रेट बहुत कम और प्रोटीन बहुत ही मॉडरेट या नियंत्रित मात्रा में दी जाती है.
न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर शिखा शर्मा बताती हैं कि ”जब शरीर कीटोन्स को ऊर्जा के स्रोत के रुप में इस्तेमाल करता है तो उसे संक्षेप में कीटो डाइट कहा जाता है. इस डाइट में आप कार्बोहाइड्रेट नहीं खाते हैं और फ़ैट्स आप बहुत ज़्यादा मात्रा में लेते हैं. इस डाइट में कीटो शेक्स, चीज़, कुछ गिनी चुनी सब्ज़ियां खाते हैं और फल नहीं लेते. प्रोटीन के तौर पर आप चिकन, मटन, फ़िश, नारियल के तेल में स्मूदी का इस्तेमाल करते हैं. भारत में लोग इस डाइट के दौरान चीज़ बहुत खाते हैं.”
कैसे होता है वज़न कम?
विशेषज्ञों के अनुसार कीटो डाइट का असर कम से कम एक हफ़्ते में आपके शरीर पर दिखने लग जाता है.
डॉ. शिखा शर्मा बताती हैं कि “जब आप इस तरह की डाइट ले रहे होते हैं तो आपका शरीर ऐसे खाने को पचा ही नहीं रहा होता है और सब आंतों से जा रहा होता है. और जो खाना पच रहा होता है वो आपके लिवर और गॉलब्लैडर में फ्लड या भरता रहता है.”
“शरीर सर्वाइवल मोड में चला जाता है. ऐसे में शरीर कीटोन से अपनी ऊर्जा लेता है लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी शरीर पर दिखने लगते हैं. कीटो डाइट का आपके शरीर पर असर दो या तीन दिन में दिखने लगता है.”
डॉक्टर बताते हैं कि अगर आपके लिवर या गॉल ब्लैडर में पहले से दिक़्क़त है तो आपको इस डाइट से होने वाले दुष्परिणाम दो या तीन दिन में ही दिखने लगते हैं.
लेकिन अगर आपके अंगों में कोई परेशानी नहीं है तो इसका ग़लत प्रभाव आपको दिखने में तीन से चार महीने लग सकते हैं.
डाइटिशियन बताते हैं कि आपके वज़न बढ़ने का मुख्य कारण सिंपल कार्बस होता है जिसमें चीनी, मैदा, सूजी और कॉर्नफ्लार से बनने वाली चीज़ें शामिल हैं.
हालांकि लोगों को इन्हें छोड़ना मुश्किल नज़र आता है इसलिए जब वज़न घटाना होता है वो इस तरह के विकल्प तलाशने लगते हैं जिनसे तुरंत वज़न कम करना संभव हो. ऐसे में उन्हें कीटो डाइट नज़र आता है.
डॉक्टर शिखा शर्मा बताती हैं कि “उनकी जानकारी में कोई ऐसा डाइटिशियन नहीं है जो कीटो डाइट की सलाह दे. और कई लोग घरेलू नुस्ख़ों की तरह ऐसी डाइट को अपना लेते हैं लेकिन किसी भी डाइट प्लान से पहले विशेषज्ञ से पूछना ज़रूरी होता है और डायट उन्हीं की निगरानी में भी होनी चाहिए क्योंकि ऐसी डाइट के साइड इफ़ेक्ट भी हो सकते हैं.”
शरीर पर कीटो डाइट से असर
डॉ. शिखा शर्मा बताती हैं, “आमतौर पर एक दिन में शरीर को 20 ग्राम फ़ैट्स, एक ग्राम प्रति किलोग्राम शरीर के वज़न के मुताबिक़ प्रोटीन यानी आपका वज़न 55 से 60 किलो है तो 60 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए. और 50 से 60 फ़ीसद कार्बोहाइड्रेट की ज़रूरत होती है लेकिन ये आपके शरीर, आपके काम और एक्टिविटी के मुताबिक़ कम ज़्यादा हो सकता है जैसे स्पोर्ट्स पर्सन को इसकी ज़्यादा ज़रूरत हो सकती है. जब आपके शरीर को केवल 20 ग्राम फ़ैटस की ज़रूरत है और आप उसे बढ़ाकर 60-80 प्रतिशत कर देंगे तो इसका असर आपके लिवर और गॉल ब्लैडर पर पड़ेगा.”
यहां अब ऊर्जा का स्रोत कार्बोहाइड्रेट न रह कर फ़ैट्स हैं. आप ये तो महसूस करेंगे कि आपका वज़न कम हो रहा है लेकिन आपके लिवर और गॉलब्लैडर के लिए आपके द्वारा ली जा रही फ़ैट्स को पचाना ख़ासा मुश्किल हो जाता है क्योंकि रोज़ आपका शरीर 20 ग्राम फ़ैट्स को पचा रहा होता है और आपके कीटो डाइट पर जाने के बाद उसे एक दिन में 100 ग्राम का फ़ैट पचाना पड़ रहा होगा है.
डॉ. शिखा शर्मा कहती हैं, “ऐसे में आपके इन दोनों अंगों को उसे पचाने में कई गुना मेहनत करना पड़ेगा और अगर आपका लिवर कमज़ोर है तो ऐसी डाइट से वो क्रैश हो सकते हैं. ऐसी डाइट का असर महिलाओं पर ज्यादा होता है. अगर एक महिला 40 साल की उम्र में है, जिसका वज़न ज्यादा हो या फ़र्टिलिटी पीरियड में हो तो गॉलब्लैडर में पथरी भी बन सकती है क्योंकि ऐसी स्थिति में आपका गॉलब्लैडर एक बहुत ही अम्लीय परिवेश में काम कर रहा होता है और शरीर में सूजन भी बढ़ सकता है.”
“इस डाइट पर जाने से आपकी हार्मोन्स की साइकिल बिगड़ सकती है. कीटो डाइट से आपके बीपी और शूगर के लेवल भी गड़बड़ हो जाएगें. ऐसी डाइट करने वाले व्यक्ति को कमज़ोरी महसूस होगी, आपका जी मिचलाने लगेगा, पाचन प्रक्रिया गड़बड़ होगी और आपको गैस और एसिडिटी की समस्या होने लगेगी.”
डॉ. शिखा शर्मा कहती हैं, “किसी भी सामान्य स्थिति में कोई भी डॉक्टर कीटो डाइट की सिफ़ारिश नहीं करेगा. मौलिक मेडिकल कंडीशन होने पर ही कीटो डाइट की सलाह दी जाती है. जैसे किसी को दौरे पड़ रहे हों, मरीज़ कार्बोहाइड्रेट पचा नहीं पा रहे हैं या उनके शरीर में एंजाइम न हो लेकिन इस डाइट से वज़न भी कम हो जाता है. हालांकि ये डाइट कभी भी वज़न कम करने की डाइट नहीं रही है.”
“ये क्विक फ़िक्स वेट लॉस यानी तुंरत वज़न घटाने के लिए प्रचलित हो गई है और ये दुखद है कि इसे लोग करते हैं, इसे बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए. ये एक चिट फ़ंड स्कैम की तरह है जहां लोगों को तुरंत फ़ायदा दिखाई देता है और उसे ये आमदनी का अच्छा ज़रिया लगता है लेकिन आगे जाकर उसका नुक़सान पता चलता है. ठीक वैसे ही कीटो डाइट तुरंत वज़न कम करने का एक माध्यम दिखाई तो देता है लेकिन उसका शरीर पर कई हानिकारक असर होते हैं. सही और संतुलित खाना भी दवा के तौर पर काम कर सकता है और अगर आप उसे ज़हर बना कर खाएंगे तो वो आपके शरीर के लिए ज़हरीला भी हो सकता है.”
हिंदी और बांग्ला फ़िल्मों की अभिनेत्री मिष्टी मुखर्जी का शुक्रवार को किडनी फ़ेल होने की वजह से निधन हो गया. बताया जाता है कि 27 साल की ये अभिनेत्री कीटो डाइट पर थीं और उनकी तबीयत बिगड़ गई थी.
मीडिया में मिष्टी मुखर्जी के प्रतिनिधि की तरफ़ से आए आधिकारिक बयान में कहा गया है, “अभिनेत्री मिष्टी मुखर्जी जिन्होंने कई फ़िल्मों और म्यूज़िक वीडियो में अपने अभिनय के ज़रिए प्रतिभा का परिचय दिया, वो अब नहीं रहीं. कीटो डाइट की वजह से बेंगलुरु में उनकी किडनी फ़ेल हो गई. शुक्रवार की रात उन्होंने अंतिम सांस ली.
-BBC

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