वियतनाम ने ऐसा क्या किया, नहीं हुई कोरोना से एक भी मौत ?

कोविड-19 का संक्रमण दुनिया भर में लगातार फैल रहा है लेकिन एक देश ऐसा भी है जहां इसकी झलक नाममात्र की दिख रही है.
यह देश है वियतनाम. जिसकी सीमा उस चीन से लगती है, जहां इस महामारी की शुरुआत हुई है. वियतनाम की आबादी भी 9.7 करोड़ के आसपास है.
लेकिन 23 अप्रैल तक इस मुल्क में कोविड-19 संक्रमण के महज़ 268 मामले सामने आए हैं.
इतना ही नहीं, अब तक वियतनाम में एक भी शख्स की कोविड-19 से मौत नहीं हुई है.
शुरुआत में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ वियतनाम ने अपने लोगों को जागरूक कर एक तरह से इस महामारी से लड़ने के लिए युद्ध स्तर की तैयारी की लेकिन अब यहां पाबंदियां हटाई जा रही हैं और स्कूलों को फिर से खोलने की इजाज़त दी गई है.
ऐसे में सवाल यही है कि वियतनाम ने ऐसा क्या किया जिसे दूसरे देश भी मॉडल के तौर पर अपना सकते हैं.
सीमाएं बंद करने का फैसला
जनवरी के आख़िरी दिनों में वियतनाम में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आया था.
इसके बाद तेज़ी से फ़ैसला लेते हुए वियतनाम ने चीन के साथ अपनी सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया.
साथ ही सभी प्रमुख एयरपोर्ट पर दूसरे देशों से आने वाले प्रत्येक नागरिक की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की.
सरकार ने यह भांप लिया कि कोरोना संक्रमण उन लोगों में दिख रहा है जो विदेश से आ रहे हैं. ऐसे में सरकार ने विदेश से आने वाले हर शख्स को 14 दिनों तक क्वारंटीन में रखने का आदेश दिया.
सरकार ने लोगों को क्वारंटीन पर रखने के लिए होटलों को भुगतान करके बुक किया. मार्च के आख़िरी सप्ताह में वियतनाम ने सभी विदेशियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी. वियतनामी मूल के विदेशी और वियतनामी नागरिकों के परिवारिक सदस्यों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई.
‘कांटैक्ट ट्रेसिंग’ पर जोर
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को आइसोलेशन में रखने के बाद उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया गया और उन सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया.
इसके अलावा वियतनाम अपने ही देश में कम क़ीमत वाली टेस्टिंग किट्स विकसित में करने में कामयाब रहा.
वियतनाम के पास बड़े पैमाने पर लोगों की टेस्टिंग के लिए दक्षिण कोरिया और जर्मनी जितने संसाधन भी नहीं हैं.
संसाधनों की कमी के चलते वियतनाम की सरकार ने कम खर्चे वाला नज़रिया अपनाया और संक्रमण के मामले को आक्रामक ढंग से ट्रैक किया गया और संक्रमित लोगों को आइसोलेशन में रखने की व्यवस्था की गई.
समाज को जागरूक करना
वियतनाम की सरकार ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लोगों को जागरूक करने के लिए देशव्यापी अभियान चलाया.
इस अभियान में छोटे-छोटे वीडियो और पोस्टरों के ज़रिए लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के तरीक़ों के बारे में जागरूक किया गया.
ऐतिहासिक वियतनाम अमरीका युद्ध में वियतनामी रणनीति की याद दिलाते हुए प्रधानमंत्री ग्युएन जुआन फुक ने लोगों से लंबे समय तक महामारी से लड़ने के लिए तैयार होने की अपील की.
न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी, केनबरी के एमिरेट्स प्रोफेसर कार्ल थयार के मुताबिक “वियतनाम का समाज जागरूक है. वहां एक पार्टी की व्यवस्था है. पुलिस व्यवस्था, सेना और पार्टी उस फ़ैसले पर अमल करती है जो शीर्ष स्तर पर लिया जाता है. सरकार का शीर्ष स्तर ऐसी चुनौतियों के वक्त अच्छे तरीके से फ़ैसले भी लेता है.”
लेकिन क्या इन तरीक़ों को दूसरे देश मॉडल के रूप में अपना सकते हैं?
सभी देश वियतनाम के मॉडल को नहीं अपना सकते क्‍योंकि सफल होने के बाद भी इसकी अपनी खामियां हैं.
इसके तहत लोगों को पड़ोसियों पर नज़र रखने को बढ़ावा दिया गया है. इसके अलावा ये आशंका भी है कि बलपूर्वक क्वारंटीन में भेजे जाने के डर से बहुत सारे संक्रमित लोग अभी तक सामने नहीं आ पाएं हैं.
वियतनाम ने जिन तरीक़ों को अपनाया है उससे वहां की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है. कई कारोबार बंद हो गए हैं. सरकारी स्वामित्व वाली वियतनाम एयरलाइंस को अमरीका, यूरोपीय यूनियन और पूर्वी एशिया के प्रीमियम रूटों पर उड़ानें रद्द करने के चलते करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है.
लॉकडाउन से कितना अलग
वियतनाम कोरोना संक्रमित मरीज़ों को क्वारंटीन में रखने में कामयाब रहा है. हालांकि कई जगहों पर इसके लिए नागरिकों की स्वतंत्रता पर भी रोक लगानी पड़ी है.
प्रभावी स्थानीय प्रशासन और सशक्त सुरक्षा व्यवस्था के चलते वियतनाम कुछ मामलों में पूरे के पूरे ज़िले को क्वारंटीन करने में सफल रहा है लेकिन यूरोपीय देशों की तरह वियतनाम ने अपने यहां लॉकडाउन को लागू नहीं किया है.
वियतनाम की राजधानी हनोई और दर्जन भर बड़े शहरों में लॉकडाउन के जो प्रावधान पहले लागू किए गए थे उन्हें हटाया जा चुका है लेकिन तीन ज़िले या नगर पूरी तरह से लॉकडाउन में हैं, इन तीन जगहों पर क़रीब साढ़े चार लाख लोग रह रहे हैं.
इस इलाके की सुरक्षा स्थानीय सेना कर रही है और कोई भी यहां से निकल नहीं सकता.
ग्युएन बताते हैं, “कोरोना वायरस के बुरे प्रभावों से देश को बचाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के अलावा संगठित शासन व्यवसथा और आज्ञाकारी जनता का होना पर्याप्त है.”
-BBC

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