चौथे चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर मतदान जारी, मायावती की साख दांव पर

लखनऊ। लोकसभा चुनाव अपने चौथे चरण में पहुंच गया है और 9 राज्यों की 72 संसदीय सीटों पर सोमवार सुबह 7 बजे से ही मतदान जारी है। इसमें उत्‍तर प्रदेश की 13 सीटें शामिल हैं। यूपी के मध्‍यवर्ती और बुंदेलखंड इलाके में हो रहे इस चुनाव में जाति का कार्ड का बेहद अहम होने जा रहा है, जहां बीएसपी सुप्रीमो मायावती की साख दांव पर लगी है।
चौथे चरण में कानपुर में श्रीप्रकाश जायसवाल, कन्‍नौज में डिंपल यादव, उन्‍नाव में साक्षी महाराज और खीरी में अली जाफर जैसे लोकप्रिय और विवादास्‍पद चेहरे मैदान में हैं। यूपी की कुल 80 सीटों में से ये 13 सीटें बेहद अहम हैं।
सोमवार को खीरी, शाहजहांपुर (एससी), हरदोई (एससी), फर्रुखाबाद, मिसरिख (एससी), कन्‍नौज, उन्‍नाव, कानपुर, इटावा (एससी), अकबरपुर, जालौन (एससी), हमीरपुर और झांसी में सुबह मतदान शुरू हुआ। कन्‍नौज को छोड़कर बाकी की सभी सीटों पर पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी।
कांग्रेस के कई दिग्‍गज मैदान में
हालांकि यूपी में मुख्‍य मुकाबला बीजेपी और एसपी-बीएसपी-आरएलडी के महागठबंधन के बीच है, फिर भी यह चरण कांग्रेस के लिए भी महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि उसके कई दिग्‍गज नेता जैसे सलमान खुर्शीद (फर्रुखाबाद), श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर), अनू टंडन (उन्‍नाव) और अशोक दोहरे (इटावा) चुनाव लड़ रहे हैं। दोहरे ने बीजेपी से टिकट नहीं मिलने के बाद कांग्रेस जॉइन किया है।
5 आरक्षित सीटों में से मायावती की पार्टी बीएसपी तीन सीटों शाहजहांपुर, मिसरिख और जालौन से चुनाव लड़ रही है। बीएसपी की सहयोगी एसपी अपने परंपरागत गढ़ हरदोई और इटावा से मैदान में है। इस चरण में एसपी 7 और बीएसपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। मायावती का ज्‍यादा आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला पिछले चुनाव के खराब प्रदर्शन के विपरीत है।
वर्ष 2014 के चुनाव में बीएसपी का खाता तक नहीं खुला था और वर्ष 2009 के चुनाव में उसे 17 आरक्षित सीटों में से केवल 2 पर जीत मिली थी। यह आंकड़ा एसपी की तुलना में काफी कम था जिसने 2009 में 10 सीटें जीती थी। आरक्षित सीटों पर हमेशा से ही बीएसपी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है क्‍योंकि इन सीटों पर दलित वोट बंट जाते हैं जबकि अपर कास्‍ट और ओबीसी वोटों पर बीजेपी कब्‍जा कर लेती है।
ओबीसी और मुस्लिम वोटों से माया को आस
इस बार के चुनाव में मायावती को उम्‍मीद है कि एसपी के ओबीसी और मुस्लिम वोट उसकी झोली में आएंगे। इस चरण में बीजेपी के सामने गंभीर चुनौती है जिसने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 17 आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वह गैर-जाटव जैसे पासी, वाल्मिकी और कोरी वोटों पर अपना दांव लगा रही है। शाहजहांपुर और जालौन आरक्षित सीटों पर बीजेपी ने कोरी उम्‍मीदवारों क्रमश: अरुण सागर और भानू वर्मा को टिकट दिया है। हरदोई और मिसरिख में पार्टी ने पासी समुदाय से आने वाले जय प्रकाश और अशोक रावत को उम्‍मीदवार बनाया है।
कांग्रेस ने भी आरक्षित सीटों पर पासी और जाटव समेत अन्‍य दलित उपजातियों के प्रत्‍याशियों को 5 सीटों पर टिकट दिया है। इस चरण में कई चर्चित चेहरे मैदान में हैं। BJP ने एसपी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव की पत्‍नी डिंपल यादव के खिलाफ सुब्रत पाठक को टिकट दिया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पाठक मात्र 20 हजार वोटों से डिंपल के हाथों चुनाव हार गए थे। कन्नौज में न तो कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारा है और न ही शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने।
कानपुर में सबसे रोमांचक मुकाबला
इटावा में एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन रामशंकर कठेरिया के सामने एसपी के कमलेश कुमार हैं। हालांकि सबसे रोमांचक मुकाबला कानपुर में देखने को मिल रहा है जहां बीजेपी के दिग्‍गज नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकट काटकर उनकी जगह पर सत्‍यदेव पचौरी को टिकट दिया है। कांग्रेस ने यहां पर पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर दांव आजमाया है।
-एजेंसियां

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