AAP में घमासान, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ आवाज उठनी शुरू

sanjay singh AAP leader
AAP में घमासान, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ आवाज उठनी शुरू

AAP के कुछ पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब लोकसभा चुनाव में हार के लिए योगेन्द्र यादव को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की गई थी तो फिर अब भी की जानी चाहिए
नई दिल्ली। पंजाब और गोवा में हार के बाद AAP नेता संजय सिंह और दुर्गेश पाठक के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई है। कारण यह है कि दोनों ही पंजाब में पिछले एक साल से सक्रिय थे, दोनों की देखरेख में ही पार्टी ने पंजाब का चुनाव लड़ा और हार की जिम्‍मेदारी भी उन्‍हीं की बनती है।

पार्टी के कुछ पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब लोकसभा चुनाव में हार के लिए योगेन्द्र यादव को जिम्मेदार ठहराकर कार्रवाई की गई थी तो फिर अब भी की जानी चाहिए।

अब आप ने आत्म मंथन शुरू कर दिया है। सबसे ज्यादा विचार जिस बात पर किया जा रहा है वह है कि हार का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जाए।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब में मिली हार के बाद से पार्टी के बड़े नेताओं में काफी नाराजगी है। नाराजगी हार पर नहीं बल्कि गलत आकलन पर है। यही कारण है कि अब पार्टी हार पर आत्ममंथन कर रही है। पार्टी सोशल मीडिया और मीडिया के सामने अपने सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बेशक ये कह रही है कि पंजाब में आप ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और 20 सीट पर जीत हासिल की। सवाल यह है कि केजरीवाल के लगभग 100 रोड शो और रैलियों के बाद भी पार्टी क्यों पिछड़ गई।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी का एक धड़ा संजय सिंह और दुर्गेश पाठक पर कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा है। उसकी मुख्य वजह यह भी है कि इन दोनों के कहने पर ही पंजाब चुनाव से या प्रचार से कुमार विश्वास, आशीष खेतान आदि जैसे वरिष्ठ नेताओं को दूर रखा गया था। पार्टी के प्रचार प्रसार, टिकट वितरण आदि की सारी रणनीति संजय सिंह और दुर्गेश पाठक ने ही बनाई।

इन दोनों पर जो सबसे बड़ी लापरवाही करने की बात कही जा रही है कि इन लोगों ने सिर्फ मालवा क्षेत्र पर ही सारा जोर दिया दोआबा और माझा पर ज्यादा मेहनत नहीं की गई। वहां के स्थानीय चेहरों को दूर करवाने में भी इन दोनों को ही कारण माना जा रहा है।

पंजाब के तत्कालीन संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को इन दोनों ने पैसे के लेन देन के आरोप में बाहर करवाया था जबकि छोटेपुर ने इन दोनों पर पैसे का आरोप लगाया था। इसके अलावा वहां के लोकल लीडर सुखपाल सिंह खैरा को भी प्रचार से दूर रखा गया। इसके अलावा आप पर कट्टरवादियों से नजदीकियां बनाने का भी आरोप लगा जिस वजह से पंजाब का हिन्दू वोटर आप को छोड़ कांग्रेस के साथ गया।

कुछ आवाज पंजाब से पार्टी के सांसद भगवंत मान के खिलाफ भी उठ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि मान अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। उन पर पार्टी से निष्कासित सांसद धर्मवीर गांधी दिन में ही शराब पीने का आरोप भी लगा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि भगवंत मान सिर्फ भीड़ खीचने वाले रहे वोट बटोरने वाले नहीं। फिलहाल पार्टी कुछ नहीं बोल रही है, सिर्फ अपने कार्यकर्ताओं को भरोसा रखने का मंत्र देने में जुटी है।
-Legend News

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