Mathura के राजकीय महाविद्यालय में विश्वकर्मा जयन्ती का आयोजन

राजकीय महाविद्यालय माँट में विश्वकर्मा जयन्ती समारोह का आयोजन किया गया।

 

आयोजन का शुभारम्भ प्राचार्य डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी तथा प्राध्यापकों ने देवशिल्पी विश्वकर्मा के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर किया।

प्राचार्य डाॅ. मीनाक्षी वाजपेयी ने मानव सभ्यता के विकास में वास्तु-शिल्प की भूमिका को अनिवार्य बताया तथा समतामूलक भारतीय समाज की स्थापना में विश्वकर्मा पूजा जैसे पर्वों की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने सम्बोधन में डाॅ. दीन दयाल ने देवशिल्पी विश्वकर्मा को मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकताओं के उत्पादन एवं उनकी आपूर्ति का देवता बताया तो डाॅ. सत्येन्द्र सिंह ने उन्हें विश्व का पहला वास्तुशिल्पी कहा। डाॅ. राजेश कुमार ने विश्वकर्मा-ंउचयपूजन पर्व को श्रम की संस्कृति के महत्व के रूप में देखा और प्रो. नीलम कुरील ने उन्हें महाकाव्ययुगीन भव्य भवनों का निर्माता बताया।

कार्यक्रम का कुशल संयोजन डाॅ. राजेश कुमार एवं संचालन डाॅ. दीन दयाल ने किया।

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