उत्तराखंड के गांव बने मिसाल, और क्वारंटीन सेंटर बेमिसाल

उत्तराखंड के गांवों की ओर लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। बिना किसी सरकारी मदद के इन लोगों के लिए स्थानीय लोग विशेष व्यवस्था कर रहे हैं। यहां खेतों में स्पेशल टेंट्स और हट्स में इन प्रवासियों को रोका जा रहा है।
उत्तराखंड का कोई ऐसा गांव नहीं है, जहां महानगरों को गए उसके प्रवासी कोरोना संकट के चलते गांव न लौट रहे हों। प्रवासियों के भारी संख्या में लौटने के चलते गांव में उनको क्वारंटीन करने का जिम्मा सरकार ने ग्राम प्रधानों को दिया है। प्रधानों का कहना है कि बिना किसी बजट या किसी अन्य साधन के यह जिम्मेदारी निभाना मुश्किल है। इसके बावजूद वे एकता का संदेश देने में भी सफल हो रहे हैं।
खेतों में बनाए हट्स
पौड़ी जिले के ग्राम भोपाटी में लगभग सौ प्रवासियों के गांव लौटने की संभावना के मद्देनजर गांव की महिला ग्राम प्रधान यशोदा रावत ने ग्रामीणों को साथ जोड़कर आने वाले प्रवासियों को क्वारंटीन रखने को एक अनोखी पहल कर जिले का ध्यान गांव की ओर खींचा है। लोगों को क्वारंटीन रखने को बकायदा गांव के खेतों में हट्स बनाए। इसके लिए संसाधन भी ग्रामीणों से ही जुटाए गए और कोई सरकारी मदद नहीं मिली। ग्रामीणों ने स्वयं की जुटाई पूंजी से ये कारनामा कर दिखाया।
लोगों की मदद से बने हट्स
एक युवक डबल सिंह रावत ने हट्स के लिए पॉलिथिन शीट दीं और विक्रम रावत ने इन हट्स तक बिजली पहुंचाकर रोशनी जुटाई। उदय सिंह रावत ने पेयजल का पाइप पहुंचाकर पानी की परेशानी दूर कर दी। गांव की प्रधान यशोदा रावत ने बताया कि गांव लौटने वाले सौ से अधिक प्रवासियों की पहचान भी उन्होंने कर ली है। अब तक इनमें से 20 प्रवासी पहुंचे हैं। प्रवासियों के लिये भोजन की व्यवस्था उनके परिजनों के द्वारा की जा रही है।
रंग-बिरंगे टेंट से स्वागत
ऐसा ही उदाहरण उत्तरकाशी जिले की असी गंगा घाटी के अगोडा गांव के प्रधान मुकेश पंवार ने भी पेश कर डाला। 135 परिवारों का ये गांव प्रवासियों के लौटने पर उनका स्वागत रंग बिरंगे टेंट में उन्हें क्वारंटीन रखने की व्यवस्था जुटाकर कर रहा है। मुकेश पंवार कहते हैं कि प्रवास पर रोजी रोटी कमाने गए प्रवासी जब गांव लौट रहे हैं तो हमारा भी फर्ज है कि इस संकट की घड़ी में उनकी मदद करें।
जापान से लौट कर रहे मदद
टिहरी के घनसाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत करखेड़ी के दर्शन लाल आर्य जो कि 17 साल की उम्र में पहाड़ छोड़कर जापान चले गए थे, अब सफल व्यवसाई बनने के बाद वापस लौटे हैं। गांव लौटकर दर्शन लाल आर्य घनसाली क्षेत्र के 182 गांवों के गरीबों के बीच राशन किट बांटकर उनकी सहायता में जुटे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहाड़ का यह लाल भले व्यवसाय करने फाड से सत्रह साल की उम्र में बाहर चला गया लेकिन सफल होने के बावजूद जब पहाड़ कोरोना संकट से दो-चार है तो वह यहां अपनी जड़ों में लौट लोगों की सहायता में जुटा है।
-एजेंसियां

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