रेप के आरोपी बिशप को वैटिकन ने पद से हटाया, लेकिन गिरफ्तारी अब भी नहीं

कोच्चि। केरल की नन से रेप के आरोपी जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल को वैटिकन ने उनके पद से हटा दिया है। बता दें कि यह फैसला फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ रेप मामले की जांच शुरू होने और चौतरफा आलोचना के बाद लिया गया। फ्रैंको मुलक्कल गुरुवार को भी केरल पुलिस के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए, इससे पहले बुधवार को भी पुलिस ने उनसे छह घंटे पूछताछ की थी।
गौरतलब है कि बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने वैटिकन से अपने पद की जिम्मेदारियों से मुक्त होने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने पोप फ्रांसिस को पत्र लिखकर कुछ वक्त के लिए पद छोड़ने की इजाजत मांगी थी, इसके पीछे उन्होंने केस का हवाला दिया था। उन्होंने पत्र में लिखा था कि अपने खिलाफ कुछ आरोपों के चलते वह पुलिस केस पर ध्यान देने के लिए पद छोड़ना चाहते हैं।
बता दें कि बिशप फ्रैंको मुलक्कल 2014 से 2016 के बीच एक नन के साथ बलात्कार और यौन शोषण के आरोपी हैं। इसस पहले बिशप फ्रैंको मुलक्कल ने एक सर्कुलर जारी करके प्रशासनिक दायित्व दूसरे पादरी को सौंप दिया था। उधर, मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग गुरुवार को 13वें दिन भी जारी रही। अनशन कर रही पीड़िता की एक बहन को उसकी हालत बिगड़ने पर बुधवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बिशप की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस महानिरीक्षक के कार्यालय तक मार्च भी निकाला गया था।
दूसरी ओर केरल हाई कोर्ट के पास एक टेंट के नीचे ननों का एक समूह कोच्चि की भीषण गर्मी में भी अपने पारंपरिक लबादे और नकाब के साथ धरने पर बैठा है। लोग यहां आते हैं, कुछ भाषण देकर भी जाते हैं मगर ये नन हाथों में तख्तियां लिए खामोश बैठी रहती हैं। सिर्फ तख्तियां इनकी बात कहती हैं जिनमें – ‘बिशप फ्रैंको को हटाओ’, ‘क्या फ्रैंको कानून से ऊपर है?’ और ‘हमें न्याय चाहिए’ जैसे स्लोगन लिखे हैं।
केरल जैसे राज्य में जहां पिछले साल ही सौ से ज्यादा बार हड़ताल की गई, ननों का न्याय के लिए धरने पर बैठना अपने आप में ऐतिहासिक है। धरने पर बैठीं ये पांच सिस्टर मिशनरीज ऑफ जीसस से जुड़ी हैं। यह लैटिन कैथलिक ऑर्डर के तहत आती हैं, जिसका हेडक्वॉर्टर 1993 में जालंधर में बना था। केरल में चर्च की इसी शाखा के तीन कॉन्वेंट हैं। इन्हीं कॉन्वेंट में रहती हैं, 44 साल की वह नन जिन्होंने बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाया है। बिशप चर्च की इस शाखा का पैट्रन है और इस तरह सबसे पावरफुल अथॉरिटी भी।
धरने पर बैठी ननों की मांग है कि जब तक मुलक्कल को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे धरने पर ही बैठेंगी। धरने पर रहने के दौरान वे न तो कुछ खाती हैं और न पीती हैं। धरना स्थल से उनका कॉन्वेंट दो घंटे के सफर की दूरी पर है। यहीं पर पीड़ित नन भी है जो अब तक न्याय के इंतजार में है। धरने के बाद पांच ननों में से एक सिस्टर अनुपमा ने बताया कि चर्च का ऐसा कोई दरवाजा नहीं जहां हमने गुहार न लगाई हो।
क्या है नन रेप मामला?
इस मामले में पीड़ित नन का आरोप है कि बिशप ने 2014 से 2016 के बीच 13 बार रेप की वारदात को अंजाम दिया। इस मामले की शिकायत इसी साल जून में केरल पुलिस में दर्ज कराई गई थी। यह मामला साल 2014 का है। शिकायत में नन ने बताया कि मुलक्कल जब भी जालंधर से आते थे, वह एक कमरे का इस्तेमाल करते थे, उसी में नन को बंधक बनाकर रेप किया गया। शोषण का यह सिलसिला 2016 के अंत तक चलता रहा। सिस्टर अनुपमा के मुताबिक आखिर में पीड़ित नन ने मदर जनरल को मौखिक रूप से शिकायत की। इसके बाद पादरी और दूसरे पादरियों के सामने बात रखी और उनकी सलाह पर कार्डिनल जॉर्ज एलेंचरी जो कि सायरो-मालाबार कैथलिक चर्च के प्रमुख और राज्य में प्रमुख कैथलिक पदाधिकारी हैं, उन्हें चिट्ठी भेजी लेकिन कुछ नहीं हुआ।
आखिरकार नन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बिशप पर 13 बार रेप करने का आरोप लगाया। इसमें अप्राकृतिक यौन संबंध और जबरन बंधक बनाकर रखने का आरोप भी शामिल है। हालांकि मुलक्कल इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। मुलक्कल के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुए 75 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »