भीमा कोरेगाँव मामले में वरवर राव को छह महीने की सशर्त ज़मानत

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने क़रीब तीन साल बाद वामपंथी कवि और लेखक वरवर राव को छह महीने की ज़मानत दे दी है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर सशर्त ज़मानत दी है. कोर्ट ने कहा है कि वरवर राव मुंबई में ही रहेंगे और जब भी ज़रूरत पड़ेगी, उन्हें जाँच के लिए उपस्थित होना पड़ेगा.
भीमा कोरेगाँव मामले में अभियुक्त 81 वर्षीय वरवर राव अगस्त 2018 से हिरासत में हैं. इस समय वरवर राव मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं, जहाँ हाई कोर्ट की पहल के बाद उन्हें महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती कराया था.
भीमा कोरेगाँव हिंसा की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी यानी एनआईए कर रही है.
वरवर राव पर आरोप है कि 31 दिसंबर 2017 को पुण में हुई एलगार परिषद के दौरान उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए, जिस कारण दूसरे दिन भीमा-कोरेगाँव में हिंसा हुई.
वरवर राव इन आरोपों से इनकार करते हैं.
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एसके शिंदे और मनीष पिटले की खंडपीठ ने कहा कि अगर उन्होंने वरवर राव को मेडिकल ज़मानत नहीं दी तो यह मानवाधिकारों के सिद्धांतों और जीवन और स्वास्थ्य के लिए नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनके कर्तव्यों से हटना होगा.
एक फ़रवरी को अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों को सुन लिया था और अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था.
आख़िर क्या है भीमा कोरेगाँव मामला
महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में साल 2018 की एक जनवरी को हिंसा भड़क उठी थी. इस घटना से एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को ऐतिहासिक शनिवार वाड़ा पर एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था.
इस मामले में अब तक 16 सामाजिक कार्यकर्ताओं, कवियों और वकीलों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जिन लोगों को गिरफ़्तार किया है, उनमें आनंद तेलतुंबडे, मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, कवि वरवर राव, स्टेन स्वामी, सुधा भारद्वाज, वर्नोन गोंजाल्विस समेत कई अन्य शामिल हैं.
-BBC

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