Varanasi flyover हादसे की जांच शुरू, सस्पेंड किए गए चार अफसरों पर मुकद्दमा दर्ज़

 

Varanasi flyover हादसे के फौरन बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर चार अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया था,

मुख्यमंत्री ने जांच दल से 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट मांगी,

माना जा रहा है कि जांच में कई और अफसरों पर गाज गिरनी तय 

वाराणसी। निर्माणाधीन  Varanasi flyover हादसे  की जांच बुधवार सुबह से शुरू हो गई है। घटनास्थल पर पहुंची फोरेंसिक टीम साक्ष्य जुटा रही है। ड्रोन से फोटोग्राफी कराई गई है। घटना को लेकर केंद्र से लेकर यूपी सरकार एक्शन में है।
पीएमओ लगातार घटना को लेकर अपडेट ले रहा है वहीं सीएम योगी खुद पूरे हादसे को लेकर गंभीर है। हादसे की सूचना के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने तत्काल जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। वो खुद मंगलवार की रात वाराणसी पहुंचे और घटना के कारणों की जांच की।

जांच कमेटी मंगलवार देर रात ही शहर में आ गई थी

बुधवार सुबह वाराणसी के सिगरा थाने में सस्पेंड अफसरों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सिगरा इंस्पेक्टर की तहरीर पर सिगरा थाने में सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक, पर्यवेक्षण अधिकारी सहित अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया।

मंगलवार शाम ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर चार अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने जांच दल से 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है कि जांच में कई अफसरों पर गाज गिरनी तय है।

निर्माण कार्य के दौरान राहगीरों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता न बरतने, ट्रैफिक वालेंटियर्स को तैनात न करने, अराजकतापूर्ण तरीके से कार्य करने के आरोप में 19 फरवरी को सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ सिगरा थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया था।

मुकदमा दर्ज करने के बाद सिगरा पुलिस ने कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। वहीं सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक ने मुकदमे को हल्के ढंग से लेते हुए लापरवाह तरीके से निर्माण कार्य जारी रखा।

पोस्टमार्टम हाउस पर उमड़ी भीड़

बुधवार सुबह बीएचयू अस्पताल के मोर्चरी के बाहर मृतकों के परिजनों समेत कई दलों के नेता पहुंचे। नगर आयुक्त और डीएम सबसे पहले अस्पताल पहुंचे। मोर्चरी के बाहर का दृश्य काफी भयावह था। लोग रो रहे थे तो कोई उन्हें ढाढस बंधा रहा था।

वाराणसी डीएम ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया। शवों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए सरकारी व्यवस्था की गई थी। दो वर्ष के बाद यह ऐसा पहला मौका था जब एक साथ 15 शवों का पोस्टमार्टम हुआ।

इसके पहले 2016 में हुए राजघाट भगदड़ में 25 और उसके बाद पितरकुंडा में पटाका के गोदाम में विस्फोट होने पर आधा दर्जन शव का पोस्टमार्टम हुआ था। इधर जिस सड़क पर हादसा हुआ उसे बंद कर दिया गया है।

मलबा अभी भी हटाया जा रहा है। रूट डायवर्जन के कारण यात्रियों को थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इधर, घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक पुलिस का पहरा है। हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर वाराणसी पहुंच चुके हैं।

कार्रवाई पहले होती तो शायद नहीं होता हादसा

लापरवाह पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं, ट्रैफिक पुलिस ने भी कभी सेतु निगम से नहीं पूछा कि क्यों उपेक्षापूर्ण तरीके से निर्माण करा कर राहगीरों की जान को रोजाना खतरे में डाला जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से सेतु निगम के खिलाफ कभी कार्रवाई की संस्तुति भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को नहीं की गई।

एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने इस साल जनवरी से फरवरी के बीच चौकाघाट फ्लाईओवर के निर्माण कार्य का तीन बार निरीक्षण किया था। एसएसपी ने सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक को कहा था कि लहरतारा से अंधरापुल के बीच 30 ट्रैफिक वालंटियर्स तैनात किए जाएं। प्रोटेक्शन वॉल को और अंदर की ओर किया जाए। निर्माण कार्य ऐसे हो कि जाम न लगे और मलबा तत्काल हटा लिया जाया करे।

तीन बार की ताकीद के बाद भी जब सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक पर असर नहीं पड़ा तो एसएसपी ने सिगरा थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद सिविल पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने कभी दोबारा झांक कर Varanasi flyover बना रहे सेतु निगम के कामकाज के तौर-तरीके का जायजा नहीं लिया।
-एजेंसी

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