वैभव कृष्ण मामला: ADG ने पांच IPS अफसरों के खिलाफ तहरीर दी

लखनऊ। ADG जसवीर सिंह ने एसएसपी नोएडा वैभव कृष्ण की रिपोर्ट के आधार पर पांच IPS अफसरों के खिलाफ नोएडा के सेक्टर 20 थाने में तहरीर दी है।
इसके साथ ही उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से आरोपी अफसरों को उनके पदों से हटाकर निलंबित करने और उनके खिलाफ अलग से FIR दर्ज करने की मांग की है।
ADG जसवीर सिंह वर्तमान में निलंबित चल रहे हैं। उन्होंने अपनी तहरीर में भ्रष्टाचार विरोधी अधिनियम-1988 की धारा सात का उल्लेख किया है और रिपोर्ट के साथ एसएसपी नोएडा ने जो भी साक्ष्य और जानकारियां उपलब्ध करवाईं हैं, वह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
ADG के मुताबिक एसएसपी वैभव कृष्ण ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दर्ज अपराध की विवेचना के दौरान पांच IPSअफसरों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने का दावा किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट के साथ ये सभी साक्ष्य सीएम ऑफिस, अपर मुख्य सचिव गृह व डीजीपी को भेजे हैं इसलिए इस मामले में अलग से अपराध दर्ज करने की जरूरत है। ADG जसवीर सिंह ने अपनी तहरीर में सूचनाकर्ता के रूप में हर सहयोग करने और जरूरी साक्ष्य उपलब्ध करवाने की बात भी कही है।
आरोपी अफसर प्रभावित कर सकते हैं जांच
ADG जसवीर सिंह ने सीएम को भेजे पत्र में लिखा है कि रिपोर्ट में अफसरों द्वारा थानाध्यक्षों की पोस्टिंग-ट्रांसफर, खुद अफसरों की तैनाती को लेकर रेट लिस्ट के संबंध में अपराधियों के साथ सांठगांठ के तमाम प्रमाण हैं। इनका संज्ञान लेते हुए आरोपी पांचों IPS अफसरों को उनके वर्तमान पदों से हटाने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर वे लोग जांच प्रभावित कर सकते हैं इसलिए इन्हें तत्काल पदों से हटाकर निलंबित किया जाना चाहिए।
ढाई माह से क्यों दबाई गई रिपोर्ट?
सीएम को भेजे पत्र में ADG जसवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए लिखा है कि भ्रष्टाचार संबंधित प्रकरणों में किसी भी सामान्य व्यक्ति (जो इस देश का नागरिक हो) के उपयुक्त प्रार्थना पत्र पर जांच शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में समयबद्ध जांच पूरी कर तीन महीने में अभियोजन स्वीकृति होनी चाहिए इसलिए एसएसपी वैभव कृष्ण की साक्ष्यों के साथ भेजी गई रिपोर्ट पर तुरंत कार्यवाही करते हुए अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है। ADG ने इस मामले की विवेचना न्यायिक पर्यवक्षेण के तहत स्वतंत्र एजेंसी से कराने या एसआईटी गठित करने की मांग भी की है। ADG जसवीर सिंह ने ढाई माह पहले भेजी गई रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्यवाही न किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि साक्ष्यों के साथ इतनी गंभीर रिपोर्ट मिलने के बाद भी पांचों IPS अफसर अपने पदों पर बने हुए हैं, यह एक गंभीर सवाल है।
संशोधित एक्ट में है कार्यवाही का अधिकार
भ्रष्टाचार विरोधी (संशोधित) अधिनियम, 2018 की धारा सात के तहत व्यवस्था की गई है कि कोई भी सरकारी सेवक सेवा के दौरान किसी भी नागरिक से अनैतिक लाभ लेता या लेने का प्रयास करता है यह अपराध की श्रेणी में आता है। एसएसपी वैभव कृष्ण की रिपोर्ट में आरोपी अफसरों की बातचीत व वॉट्सऐप चैट के तमाम ऐसे साक्ष्य हैं, जो उनके खिलाफ हैं।
-एजेंसियां

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