वैक्सीनेशन: मां और बच्‍चे दोनों के स्वास्थ्य का रखती है ध्‍यान

प्रेगनेंसी में और बच्चा होने बाद अपने और बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए वैक्सीनेशन एक बेहद जरूरी हिस्सा है। गर्भवती महिलाओं को भी वैक्सीनेशन की जरूरत होती है और बच्चा हो जाने पर उसे भी समय पर वैक्सीनेशन लगवाना जरूरी है। इस तरह बच्चा गंभीर बीमारियों से बच जाता है।
प्रेग्नेंसी से जीवन में कई बदलाव आते हैं। यह समय ऐसा होता है जब शरीर में होने वाली ग्रोथ पर आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। सभी महिलाएं, जो मां बनने वाली होती हैं, उन्हें अपने होने वाले बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होता। वैक्सीनेशन आपके और आपके बच्चे दोनों के स्वास्थ्य का ध्यान रख सकती है। जो गर्भवती महिलाएं वैक्सीनेशन करवाती हैं, उनके शरीर से एंटीबॉडीज बच्चों के शरीर में ट्रांसफर हो जाती हैं। इससे बच्चा किसी भी तरह की गंभीर बीमारी से बचा रहता है।
यह एंटीबॉडीज लाइफ के कुछ शुरुआती महीनों में कुछ बीमारियों से लड़ने के लिए इम्युनिटी प्रदान करती है। यह वो समय होता है जब बच्चा वैक्सीनेशन के लिए काफी छोटा होता है। वैक्सीनेशन प्रेग्नेंसी के आपके सभी महीनों में आपके स्वास्थ्य का भी ख्याल रखती है। खुद को और अपने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए आपको अपने गायनेकोलॉजिस्ट से यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको प्रेगनेंसी से पहले, प्रेगनेंसी के दौरान और इसके बाद में कौन-सी वैक्सीनेशन लगवानी चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान सबसे जरूरी वैक्सीनेशन में से एक थ्री इन वन वैक्सीनेशन है।
यह 3-इन 1 वैक्सीनेशन आपको और आपके बच्चे को 3 बीमारियों से बचाएगी
टिटनेस (Tetanus): यह एक एक बैक्टीरियल बीमारी है। यह मां और नवजात शिशु में गंभीर रुग्णता पैदा कर सकती है। टिटनेस क्लोस्ट्रीडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया के विष के कारण होता है जो अक्सर मिट्टी में पाया जाता है। टिटनेस बैक्टीरिया किसी खुली चोट की जरिए शरीर में प्रवेश करता है और फिर इंसान के नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालता है। अगर इसका सही समय पर इलाज न करवाया जाए तो इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। यह बीमारी अधिकतर नवजात शिशुओं में अम्बिलिकल कॉर्ड को साफ उपकरण से न काटने पर इन्फेक्शन से होती है। मसल्स में दर्द पैदा करने के साथ-साथ इससे कई गंभीर स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां जैसे मुंह न खोल पाना, निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत और यहां तक कि मौत भी हो सकती है।
डिप्थीरिया (Diptheria): यह काफी गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। यह आमतौर पर नाक और गले की झिल्ली पर प्रभाव डालता है। वैक्सीनेशन न लेने पर बच्चे और मां दोनों को इस बीमारी का खतरा रहता है। इसे वैश्विक तौर पर सबसे डरावने संक्रामक रोगों में से एक माना जाता है। इससे सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन रुक जाना, पैरालिसिस या मौत हो सकती है। अधिकतर देशों ने इससे बचपन में ही वैक्सीनेशन के जरिए अपना पीछा छुड़वा लिया है, लेकिन यही बात भारत के बारे में नहीं बोली जा सकती। हालांकि, भारत में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम पूरी तरह से काम कर रहा है। हाल के वर्षों में कई अस्पताल आधारित अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चे और किशोर भी इसे प्राप्त कर रहे हैं। इस बीमारी के बने रहने के या बार-बार लौट आने के कई कारण हैं, जैसे- खराब टीकाकरण कवरेज, बूस्टर खुराक लेने में विफलता, और डिप्थीरिया, पर्टुसिस और टिटनेस वैक्सीन के बूस्टर खुराक के कवरेज के बारे में डाटा का न होना।
पर्टुसिस (Pertussis): इसे व्हूपिंग कफ के नाम से भी जाना जाता है। पर्टुसिस बहुत तेजी से फैलने वाला संक्रमण है। 2018 में वैश्विक तौर से पर्टुसिस के 151000 से ज्यादा केस रिकॉर्ड किए गए थे। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी से छींकने पर पैदा होने वाली बूंदों से फैलती है। नवजात शिशुओं में पर्टुसिस होने पर निमोनिया और आक्षेप हो सकता है। अगर मां को यह बीमारी है तो इसकी संभावना बहुत अधिक है कि यह शिशु को भी हो जाए। यह बीमारी परिवार में मौजूद अन्य सदस्यों से भी फैल सकती है, जिनमें इसके लक्षण भी न आए हों।
प्रेग्नेंसी के दौरान वैक्सीन देने से क्या कोई साइड-इफेक्ट्स होते हैं?
प्रेग्नेंसी के दौरान 3-इन 1 वैक्सीनेशन देने से पहले कुछ महीनों में व्हूपिंग कफ से बचाव किया जा सकता है। हालांकि, अन्य दवाइयों की तरह वैक्सीन के कुछ आम साइड-इफेक्ट्स जैसे- दर्द, स्किन लाल होना या सूजन आना, हो सकते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान बहुत खुशी के साथ-साथ थोड़ी घबराहट होना असामान्य नहीं है। लेकिन अपने बच्चे के बारे में चिंता करते हुए आपको इससे जुड़ी खुशियों को कम नहीं होने देना चाहिए। इन 3 बीमारियों के बारे में अधिक जानने के लिए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
-एजेंसियां

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