उत्तराखंड: केदारनाथ धाम को देवस्थानम बोर्ड में शामिल किये जाने का विरोध

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम को देवस्थानम बोर्ड में शामिल किये जाने का तीर्थ पुरोहितों ने विरोध किया है।
पुरोहित रोहित ने अधोमुख वृक्षासन व शीर्षासन करते हुए केदारनाथ मंदिर के चारों ओर परिक्रमा की और अनोखे अंदाज में उत्तराखंड सरकार के देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ रोष प्रकट किया है।
तीर्थपुरोहित एक साल से कर रहे विरोध
उत्तराखंड सरकार ने लगभग एक वर्ष पूर्व केदारनाथ धाम को देवस्थानम बोर्ड में शामिल किये जाने की घोषणा की थी। जिस पर तीर्थपुरोहितों ने सरकार पर तीर्थपुरोहितों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
तीर्थपुरोहितों ने कहा कि उत्तराखंड सरकार देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से केदारनाथ सहित बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री की प्राचीन काल से चली आ रही पूजा और यात्रा व्यवस्थाओं को बदलने का प्रयास कर रही है। जिसे तीर्थपुरोहित सहन नहीं करेंगे। वहीं आज भी गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ व केदारनाथ धाम में तीर्थपुरोहित देवस्थानम बोर्ड का लगातार विरोध करते आ रहे है।
पुरोहितों ने भरी सरकार के खिलाफ हुंकार
तीर्थपुरोहितों का प्रतिनिधिमंडल देवस्थानम बोर्ड को समाप्त कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मिल चुका है। जिस पर मुख्यमंत्री ने उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने
जानकारी दी कि देवस्थानम बोर्ड के विरोध में भावी रणनीति तैयार की जायेगी। जिसके लिए चारधाम तीर्थपुरोहित समाज के बैनर तले बहुत ही जल्दी आवश्यक बैठक की तैयारियां की जा रही है। जिससे उत्तराखंड सरकार द्वारा चारों धामों की व्यवस्थाओं के नाम पर जबरन थोपे जा रहे हैं। देवस्थानम बोर्ड को समाप्त कराने के विरोध में आंदोलन किया जायेगा।
यात्रा व्यवस्था बनाने के नाम पर उपेक्षा का आरोप
तीर्थपुरोहितों ने बताया कि कोरोना काल मे यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर सरकार का रवैया गैर जिम्मेदाराना नजर आ रहा है। जिसके कारण अभी तक गौरीकुंड से केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर यात्रियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का इंतजाम नहीं किया गया है। इस दौरान तीर्थपुरोहित उमेश चन्द्र पोस्ती, संजय तिवारी, अंकुर शुक्ला व चमन लाल शुक्ला आदि तीर्थपुरोहित शामिल हुए।
-एजेंसियां

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