उत्तराखंड: 9वीं सदी का कटारमल सूर्य मंदिर, जहां ध्यान मुद्रा में बैठे हैं सूर्यदेव

अल्मोड़ा। सूर्यदेव का कोणार्क स्थित मंदिर सबसे पुराना माना जाता है। इसके बाद दूसरा सबसे प्राचीन मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में है। अल्मोड़ा से करीब 17 किमी दूर कटारमल गांव में ये मंदिर स्थित है। इस मंदिर में सूर्य भगवान की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में सूर्यदेव ध्यान मुद्रा में विराजित हैं। इसे आदित्य मंदिर के नाम से जाना जाता है।

मंदिर की देखभाल करने वाले भीम सिंह बिष्ट ने बताया कि मंदिर सालभर खुला रहता है लेकिन कोरोना की वजह से मंदिर काफी समय बंद रहा। पिछले साल इस समय में काफी श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे। इस साल कोरोना ने हालात बदल दिए हैं। लॉकडाउन के बाद अब मंदिर सभी पर्यटकों के लिए खुल गया है, लेकिन रोज 10-15 श्रद्धालु ही यहां पहुंच रहे हैं। मंदिर आने वाले पर्यटकों पर आश्रित लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

9वीं सदी का है कटारमल सूर्य मंदिर

इस मंदिर का निर्माण 9वीं सदी में राजा कटारमल द्वारा करवाया गया था। राजा के नाम पर ही इस गांव का नाम कटारमल पड़ा है। इस मंदिर में सूर्यदेव के अलावा छोटे-बड़े करीब 45 मंदिर और हैं। यहां शिव-पार्वती, गणेशजी, भगवान विष्णु के अलावा अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।

मंदिर की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है। मंदिर के खंबों पर आकर्षक नक्काशी भी की गई है। नागर शैली में बना ये मंदिर पूर्व मुखी है। सुबह सूर्योदय के समय सूर्य सीधी किरणें मंदिर में प्रवेश करती हैं। मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण यहां की खासियत है।

कैसे पहुंच सकते हैं मंदिर तक

अल्मोड़ा का करीबी एयरपोर्ट पंतनगर में है। पंतनगर से अल्मोड़ा करीब 125 किमी दूर है। यहां का करीबी रेल्वे स्टेशन काठगोदाम अल्मोड़ा से करीब 107 किमी दूर स्थित है।
– एजेंसी

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