उत्तर प्रदेश: बागपत जिला जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या

चार दशक से चर्चा में था मुन्ना बजरंगी का नाम
चार दशक से चर्चा में था मुन्ना बजरंगी का नाम

बागपत। उत्तर प्रदेश की बागपत जिला जेल में अंडरवर्ल्ड डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस वारदात के बाद जेल प्रशासन से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हत्याकांड की न्यायिक जांच का आदेश दिया है। वहीं, एडीजी जेल चंद्रप्रकाश ने जेलर समेत चार जेलकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। बागपत जेल में ही बंद गैंगस्टर सुनील राठी का इस हत्याकांड में नाम सामने आया है। वहीं, हत्या की तफ्तीश के लिए बागपत जेल में एक जांच टीम भी पहुंच चुकी है।
‘गैंगस्टर सुनील राठी ने मारी गोली’
मुन्ना बजरंगी की हत्या पर यूपी के एडीजी जेल चंद्रप्रकाश का बयान सामने आया है। उनका कहना है, ‘सुबह करीब 6 बजे बागपत जिला जेल में झगड़े के दौरान मुन्ना बजरंगी को गोली मारी गई। गैंगस्टर सुनील राठी ने मुन्ना को गोली मारने के बाद हथियार एक गटर में फेंक दिया।’
उन्होंने साथ ही कहा, ‘यह जेल की सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला है। जेलर उदय प्रताप सिंह, डेप्युटी जेलर शिवाजी यादव, हेड वॉर्डन अरजिन्दर सिंह और वॉर्डन माधव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। इस पूरे मामले की जुडिशल इंक्वॉयरी होगी। साथ ही पैनल पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा।’ गैंगस्टर सुनील राठी ने झगड़े के बाद मुन्ना बजरंगी को मारी गोली।
मुन्ना बजरंगी के वकील वी श्रीवास्तव ने पुलिस के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘रविवार रात को ही उन्हें झांसी जेल से बागपत जेल लाया गया था। आज सुबह 6.30 बजे जेल में बंद एक कैदी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। उसने हत्या में इस्तेमाल पिस्टल को एक गटर में छिपा दिया। कुछ दिन पहले ही हमने यूपी के सीएम को मुन्ना बजरंगी की जान पर खतरा होने के बारे में आगाह किया था।’
जेलर समेत 4 सस्पेंड, न्यायिक जांच का आदेश
इस बीच जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में जुडिशल इंक्वॉयरी के भी आदेश दे दिए गए हैं। मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने पहले ही जेल में हत्या की आशंका जाहिर की थी। ऐसे में जेल के अंदर ही सनसनीखेज तरीके से हत्या होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की न्यायिक जांच का आदेश देते हुए कहा, ‘मैंने न्यायिक जांच के साथ ही जेलर को सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं। जेल के अंदर इस तरह की वारदात होना गंभीर मसला है। हम इस मामले की गहराई से जांच कराएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी।’
मुन्ना बजरंगी की हत्या के पीछे वेस्ट यूपी और उत्तराखंड में सक्रिय सुनील राठी गैंग के शूटरों का हाथ बताया जा रहा है। इस बीच मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह परिवार वालों के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने वाली हैं। रंगदारी से जुड़े एक केस के सिलसिले में मुन्ना बजरंगी की सोमवार को बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी।
रविवार को ही झांसी से किया गया था शिफ्ट
रविवार रात को ही मुन्ना बजरंगी को झांसी जेल से बागपत जेल ट्रांसफर किया गया था। सोमवार को बागपत में रेलवे से जुड़े एक मामले में सुनवाई थी। इसी सिलसिले में रविवार की रात 9 बजे ही मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल में शिफ्ट किया गया था।

चार दशक से चर्चा में था मुन्ना बजरंगी का नाम
मेरठ। उत्तर प्रदेश के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार को पेशी से पहले ही फिल्मी अंदाज में बागपत जेल में गोली मारकर मुन्ना बजरंगी की हत्या हो गई। पिछले चार दशक से उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में मुन्ना बजरंगी का नाम चर्चा में था। यही नहीं पूर्वांचल के इस चर्चित डॉन ने सियासत में भी हाथ आजमाया लेकिन नाकामी हाथ लगी।
एक नजर मुन्ना बजरंगी की हिस्ट्रीशीट पर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। 1967 में जिले के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी ने पांचवीं के बाद पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी। इस दौरान वह धीरे-धीरे जुर्म की दुनिया की ओर मुड़ता चला गया।
17 साल में पहला केस दर्ज
मुन्ना के अपराध की दलदल में फंसने की शुरुआत काफी छोटी उम्र में ही हो गई। 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ जौनपुर के सुरेही थाने में पुलिस ने मारपीट और अवैध हथियार रखने के आरोप में पहला केस दर्ज किया।
1984 में पहली हत्या
80 के दशक में मुन्ना को जौनपुर के एक स्थानीय माफिया गजराज सिंह का संरक्षण मिल गया। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक कारोबारी को मौत के घाट उतार दिया। गजराज के इशारे पर जौनपुर में बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह के मर्डर में भी मुन्ना की ही नाम सामने आया। इसके बाद तो हत्याओं का मानो सिलसिला चल पड़ा।
90 के दशक में मुख्तार गैंग में शामिल
90 के दशक में मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी का दामन थामा। मुख्तार का गैंग मऊ से ऑपरेट हो रहा था लेकिन पूरे पूर्वांचल में जुर्म की दुनिया में मुख्तार की तूती बोल रही थी। मुख्तार ने इसी दौरान अपराध से सियासत का रुख किया। 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मुख्तार ने मऊ से विधानसभा का चुनाव जीता। इसके बाद मुन्ना का सरकारी ठेकों में दखल बढ़ता गया। इस दौरान वह लगातार मुख्तार अंसारी की सरपरस्ती में काम करता रहा।
2005 में कृष्णानंद राय की हत्या में आरोपी
पूर्वांचल में इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की सनसनीखेज हत्या हुई।
दरअसल, 2004 में बृजेश सिंह गैंग से नजदीकी रखने वाले कृष्णानंद राय ने गाजीपुर में बीजेपी के टिकट से विधानसभा का चुनाव जीता। इससे मुख्तार के वर्चस्व को चुनौती मिलने लगी। कहा जाता है कि इसी के बाद 29 नवंबर 2005 को मुख्तार के इशारे पर मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने कृष्णानंद राय को गोलियों से भून दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई इस मामले में मुन्ना बजरंगी का सुराग ढूंढ रही थी। उस पर सात लाख रुपये के इनाम का भी ऐलान हुआ। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था।
मुंबई में ली थी पनाह
यूपी पुलिस और एसटीएफ के बढ़ते दबाव के बीच मुन्ना के लिए यूपी और बिहार में टिकने में मुश्किल हो रही थी। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में मुन्ना मुंबई पहुंच गया। इस दौरान वह लंबे अरसे तक वहीं रहा। मुंबई में रहते हुए अंडरवर्ल्ड से भी उसने अपने संबंध मजबूत कर लिए। धीरे-धीरे वह मुंबई से ही अपने गैंग को ऑपरेट करने लगा।
सियासत में मिली नाकामी
मुन्ना बजरंगी इस बीच एक महिला को गाजीपुर से बीजेपी का टिकट दिलवाना चाहता था। इस वजह से मुख्तार अंसारी के साथ उसके संबंध बुरे दौर में पहुंच गए। अब मुख्तार के लोग भी उसकी सहायता नहीं कर रहे थे। बीजेपी में बात नहीं बनने पर मुन्ना कथित रूप से कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया। बताया जाता है कि कांग्रेस के यह नेता भी जौनपुर जिले से ही ताल्लुक रखते थे और मुंबई में रहते हुए सियासत में सक्रिय थे। बजरंगी और उसकी पत्नी ने क्रमशः 2012 और 2017 में जौनपुर की मड़ियाहूं सीट से निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर यूपी विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था।
मुंबई के मलाड से हुई गिरफ्तारी
मुन्ना बजरंगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा केस दर्ज हैं। 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद ऐसी भी चर्चाएं चलीं कि मुन्ना ने एनकाउंटर का डर होने के चलते खुद ही प्लानिंग के तहत अपनी गिरफ्तारी कराई थी। ।
दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पुलिस को मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक था। इसके बाद से उसे अलग-अलग जेल में रखा जाता रहा। मुन्ना बजरंगी ने एक बार दावा किया था कि अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में उसने हत्या की 40 वारदातों को अंजाम दिया है। रविवार रात को ही मुन्ना को एक पेशी के सिलसिले में यूपी की झांसी जेल से बागपत जेल शिफ्ट किया गया था। यहां उसकी सनसनीखेज तरीके से हत्या कर दी गई।
-एजेंसी

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