Agra में विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की दोहरी नीति

यू पी सरकार Agra में ताजमहल के लि‍ये 110 करोड रुपये का इंतजाम तक नहीं कर सकी,

पर्यावरण मंत्रालय से संबधि‍त संसदीय समि‍ति की 262 वीं रि‍पोर्ट में खुलासा
आगरा। Agra के साथ जबर्दस्त नाइंसाफ़ी – आगरा कि प्रगति को धता बता जेवर एयरपोर्ट के लिये किये २८०० करोड़ दिये। एक तरफ यू पी सरकार के पास आगरा को देने को पैसे नहीं, दूसरी तरफ जेवर पर खुले दिल से पैसे दिए जा रहें हैं।

Agra के वि‍कास और जरूरत को पूरा करवाने में मौजूदा प्रदेश सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है । यही नहीं स्‍थानीय जन प्रति‍नि‍धि‍यों की भूमि‍का बेहद नि‍राशाजनक रही है। यह वि‍श्‍लेष्‍ण संसद की मंत्रालयों से संबधि‍त स्‍थायी कमेटि‍यों में से एक और आगरा के लि‍ये सबसे महत्‍वपूर्ण ‘ मौसम परि‍वर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय(The Ministry of Environment & Forests (MoEF)) का है। सैट्रल पॉल्‍यूशन बोर्ड ताज ट्रि‍पेजि‍यम अथार्टी(टी टी जैड अथार्टी ) ,आर्केलाजीकल सर्वे भारत , उ प्र प्रदूष्‍ण नि‍यंत्रणसा वि‍भाग के प्रति‍नि‍धि‍यों से वार्ता कर संसद के दानों सदस्‍यों ने गहन जानकारि‍यां हांसि‍ल कर आगरा के वर्तमान,और भवि‍ष्‍य से जुडे हुए इस दस्‍ताबेज को तैयार कि‍या है। यही नहीं दो साल पूर्व स्‍वीकृति‍ के बाद से ही यह रि‍पोर्ट अब तक डौक्‍यूमेंट से ज्‍यादा कुछ भी साबि‍त नहीं हो सकी है। जि‍सकी मुख्‍यवजह उ प्र शासन की नीरसता और दायि‍त्‍व हीनता है। आगरा के जनप्रति‍नि‍धि‍यों के द्वारा भी इसके क्रि‍यान्‍वयन करवाने को लेकर अब तक कुछ भी नहीं कि‍या जा सका ।

पर्यावरण की समस्या आगरा के साथ जेवर में भी है। एनसीआर एक्ट १९८५ को अनदेखा कर जेवर में विकास कि दुहाई दी जा रही है और दूसरी ओर आगरा के पर्यावरण को सुधारने के लिये पैसे नहीं है। इस report के अनुसार आगरा में vehicular ट्रैफिक को कम करने के लिये कहा गया है, और आगरा में एयर कनेक्टिविटी पर कोई काम नहीं हो रहा है।

AAI ने rti में जानकारी दी है के “जेवर में पर्यावरण और एनसीआर बोर्ड से अप्रूवल YEDA को लेनी है” ,जबकि आगरा के लिये AAI को लेनी है। RTI में पूछने पर Ministry of Environment, Forest and Climate Change- Government of India ने अवगत कराया के नवम्बर तक “कोई भी environmental क्लेअरेंस ग्रांट नहीं कि गयी है”।

खरबों रुपये की राशि‍ उ प्र सरकार एन्‍वायरमेंट मि‍नि‍स्‍ट्री से क्‍लीयरेंस तक हांसि‍ल न करपये प्रोजेक्‍टों पर तो उदारता से खर्च करती रही है कि‍न्‍तु मंत्रालय से स्‍वीकृत ,सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बलप्राप्‍त रि‍पोर्ट में उल्‍लेखि‍त नीरी के प्रोजेक्‍टों के लि‍ये 110 करोड की राशि‍ अब तक अनुपलब्‍ध ही है।
मंत्रालय से संबधि‍त रि‍पोर्ट में टी टी जैड क्षेत्र में प्रदूषण कम कर ताजमहल संरक्षण के प्रयासों को बल दि‍ये जाने के लि‍ये उन दस प्राजेक्‍टों का उल्‍लेख कि‍या गया है जि‍नको कि‍ नीरी (National Environmental Engineering Research Institute ) द्वारा व्‍यापक अध्‍ययन के बाद सुझाया गया था। कमेटी को अध्‍ययन के दौरान मौसम परि‍वर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार(The Ministry of Environment & Forests (MoEF)) की ओर से बताया गया कि‍ नीरी ने अपनी रि‍पोर्ट में 220 करोड की लागत के दस प्रोजेक्‍ट ताजमहल के पर्यावरणीय संरक्षण के लि‍ये सुझाये हैं ।

इन पर फंडिग पैटर्न के अनुसार केन्‍द्र व राज्‍य सरकार को पचास -पचास प्रति‍शत भागीदारी नि‍वार्हन करनी है जिसमें से भारत सरकार तो अपने हि‍स्‍से का भाग दे चुकी है कि‍न्‍तु उ प्र सरकार के द्वारा अब तक अपने भाग को नहीं दि‍या गया है।राज्‍यांश का येगदान संभव बनाये जाने के लि‍ये केन्‍द्रीय मंत्रालय के द्वारा उच्‍चतम स्‍तर तक पर प्रयास कि‍ये जा चुके हैं। कि‍न्‍तु राज्‍य सरकार के प्रति‍नि‍धि‍यों के द्वारा लगातार यही कहा जाता रहा है कि‍ सरकार के पास धन का अभाव है।

कमेटी का मानना है कि‍ धन की कमी मात्र को ताजमहल को मौजूद वायुप्रदूषण से रोकथाम के उपायों के क्रि‍यान्‍वयन के लि‍ये नहीं छोडा जा सकता है।कमेटी ने अपनी संस्‍तुती में स्‍पष्‍ट रूप से उल्‍लेखि‍त कि‍या है कि‍ केन्‍द्र सरकार राज्‍य सरकार पर अपने भाग के धन उपलब्‍ध करवाने को समुचि‍त दबाब बनाये और अगर उस पर भी धन की कमी दूर नहीं हो सके तो उसकी भरपायी केन्‍द्र सरकार को करनी चाहि‍ये । कमेटी का मानना है कि‍ ताजमहल भारत की पहचान है ,यह देश का गौरव और वि‍रासत है। इस वि‍श्‍व वि‍ख्‍यात इस पुरास्‍मारक को‍ खतरे का कारण आगरा में वायुप्रदूषण का मानकों से कही अधि‍क रहना है। फलस्‍वयप ताजमहल की सुदरता को बरकरार रखने के लि‍ये सरकार को वाहन प्रदूषण की रोकथाम को उपायों को बि‍ना कि‍सी ढीलाई दि‍ये कडाई से लागू करना चाहि‍ये ।

कमेटी का सुझाव है कि‍ भारत सरकार तथा प्रदेश सरकार से संबधि‍त एजैंसि‍यों के अलावा जनता को भी सहभागी बनाकर काम करना चाहि‍ये। यही नहीं इस तथ्‍य को भी नजर अंदाज नहीं करना चाहि‍ये कि‍ वायु प्रदूषण का खतरा मुख्‍य है । जि‍से कम करना एक चुनौती के रूप में स्‍वीकार करना चाहि‍ये जि‍ससे कि‍ ताजमहल न केवल आज बल्‍कि‍ आने वाले दशकों , शताब्‍दि‍यों के लि‍ये भी सुरक्षि‍त रह सके।
कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरी तरह से क्रि‍यान्‍वि‍त कि‍ये जाने की भी संस्‍तुति‍ की है।यही नहीं कमेटी की रि‍पोर्ट में यहां तक सुझाया गया हे कि‍ अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश या नि‍र्देशों को लेकर कि‍सी भी प्रकार के स्‍पष्‍टी करण या बदलाव की जरूरत हो तो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ही उसे उठाकर समाधान प्राप्‍त करना चाहि‍ये।

नीरी की रि‍पोर्ट पालन करने से हो रही है फजि‍हत: रमन
सुप्रीम कोर्ट मानीटरि‍ग कमेटी के सदस्‍य श्री रमन ने कहा है कि‍ अगर कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह से पालन कर लि‍या गया होता तो न केवल ताजमहल वि‍श्‍व का सबसे सुरक्षि‍त स्‍मारक होता अपि‍तु टी टी जैड ए जैसे कि‍सी नि‍काय की प्रासंगि‍कता ही नहीं रह गयी होती। उन्‍होंने कहा कि‍ यह सही है कि ताजमहल के दर्शकों की संख्‍या लगातार बढ रही है और उसकी लोकप्रि‍यता भी वि‍श्‍व के स्‍मारकों में सर्वोच्‍च है कि‍न्‍तु वहीं हम अपनी इस नायब धरोहर को न सहेज पाने के कारण सबसे बडे लापरवाह साबि‍त हो रहे हैं।

रि‍पोर्ट पर जनप्रति‍नि‍धि‍यों की नि‍ष्‍क्रि‍यता नि‍राशा

सि‍वि‍ल सोसायटीसि‍वि‍ल सोसायटी आगरा के जर्नरल सैकेट्री अनि‍ल शर्मा ने कहा ताजमहल के नाम पर भरपूर कमायी और देश वि‍देश से लगातार आर्थि‍क मदद पाने के बावजूद उ प्र सरकार टी टी जैड के लि‍ये संस्‍तुति‍ की गयी 220 करोड की दस योजनाओं के क्रि‍यान्‍वयन को अपने हि‍स्‍से का 110 करोड भी उपलब्‍ध नहीं करवा सकी। उन्‍होंने कहा कि‍ मौसम परि‍वर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार(The Ministry of Environment & Forests (MoEF)) lसे संबधि‍त संसदीय समि‍ति की 262 वीं रि‍पोर्ट अपने आप में एक प्रमाणि‍क साक्ष्‍य हे कि‍ सरकार ताजमहल के संरक्षण को लेकर कि‍तनी गंभीर है।

रि‍पोर्ट में यह कहा गया हे कि‍ अगर उ प्र सरकार अपने हि‍स्‍से का धन उपलब्‍ध नहीं करवा पाती हे तो भारत सरकार इसके लि‍ये दबाव बनाये और अगर इसमे भी नाकाम रहती है तो वहीं राज्‍यांश का इंतजाम भी करे। कि‍न्‍तु उन्‍हें नहीं लगता कि‍ केन्‍द्रीय मंत्रि‍मंडल में डा महेश शर्मा के रहते यह संभव हो सकेगा। एक ओर वहीं पयावरण रोकने को जि‍म्‍मेदार मंत्रालय के मंत्री हैं वहीं दूसरी ओर सांस्‍कृति‍क मंत्रालय भी उन्‍हीं के पास है ।

इसप्रकार ताजमहल का रख रखव करने वाला ए एस आई भी उन्‍हीं के आधीन है। दो टूक बात करनी चाहि‍ये कि‍ ताजमहल क संरक्षण को भी उ प्र सरकार से कहे । क्‍यों कि‍ इंटरनेशनल हवाई अड्डों की रौनक तब तक ही बनी रहनी है जब तक ‍ ताजमहल सरीखी भारतीय धरोहरों को देखने का अवसर देशी वि‍देशी पर्यटकों को है। श्री शर्मा ने कहा कि‍ आगरा के जनप्रति‍नि‍धि‍यों को केन्‍द्रीय मंत्री से सीधी बात करनी चाहि‍ये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »