Uttar Pradesh: मुख्य सचिव के एक आदेश से आईपीएस और आईएएस अधिकारियों के बीच घमासान

लखनऊ। Uttar Pradesh में मुख्य सचिव के एक आदेश से आईपीएस और आईएएस अधिकारियों के बीच घमासान मच गया है। यह आदेश है क्राइम मीटिंग की अध्यक्षता डीएम के करने का। इस आदेश के बाद अब आईपीएस एसोसिएशन ने आपात बैठक मंगलवार को बुलाई है।
मुख्य सचिव ने आदेश दिया था कि जिले में होने वाली क्राइम मीटिंग की अध्यक्षता अब जिले के डीएम करेंगे। यह मीटिंग हर महीने की 7 तारीख को की जाएगी और इसकी मीटिंग में एसएसपी और एसपी मौजूद रहेंगे। पहले जिले की क्राइम मीटिंग की अध्यक्षता जिले के एसएसपी या एसपी करते थे।
आईपीएस एसोसिएशन इस आदेश के खिलाफ खड़ा हो गया है। एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते डीएम कानून-व्यवस्था की निगरानी कर सकते हैं और सलाह दे सकते हैं लेकिन अपराध नियंत्रण करने का क्षेत्राधिकार आईपीएस का होना चाहिए। डीएम के हस्तक्षेप ठीक नहीं है।
आईपीएस एसोसिएशन इस आदेश के खिलाफ आ गया है। एसोसिएशन ने इस मामले में मंगलवार को मीटिंग बुलाई है। एसोसिएशन का कहना है कि मीटिंग में जो फैसला होगा उस पर आगे कार्य किया जाएगा।

क्यों जरूरी है डीएम का अंकुश, पुलिस मैन्युल में पहले से है इसका जिक्र 

थानों के निरीक्षण के समय कई बातों पर गौर फरमाया जाता है। जैसे-एफआइआर दर्ज होने की क्या है स्थिति, शस्त्र लाइसेंस की जांच, पासपोर्ट सत्यापन, चरित्र सत्यापन, चालान थाना स्तर पर, सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन संबंधी अनुमति निर्धारित समय-सीमा में देने में कहीं कोई कोताही तो नहीं बरती जा रही।

यह भी देखा जाता है कि निश्चित समय-सीमा के अंदर पीड़ितों को न्याय मिल रहा है या नहीं, थाना आने वाली जनता की बातें सुनकर उसका निस्तारण किया जा रहा है या नहीं। पुलिस बेगुनाहों के खिलाफ झूठे मुकदमे तो दर्ज नहीं कर रही। अपराधियों को जिला बदर करने, उनपर क्राइम कंट्रोल एक्ट के तहत कार्रवाई करने जैसे अधिकार डीएम के पास ही होते हैं।

मकसद यह है कि कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए डीएम-एसपी के संयुक्त प्रयास से और क्या कुछ हो सकता है। इसके साथ ही जिलाधिकारी और एसडीएम समय-समय पर चौकी-थानों का दौरा कर रजिस्टरों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश देंगे।

सरकार की मंशा रहती है कि दोनों विभागों की संयुक्त कार्रवाई से अवैध कब्जों, अतिक्रमण, भूमि विवादों और गांव देहात की कई समस्याओं का त्वरित समाधान हो जाएगा। इसके अलावा अन्य समस्याओं के निस्तारण में भी तेजी आ सकेगी। इसका फायदा आम आदमी को मिलेगा।

Uttar Pradesh में भूमि विवाद के मामले सर्वाधिक

भूमि विवाद के मामले सर्वाधिक हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए ¨चता की सबसे बड़ी वजह है। थाना से लेकर आइजी तक के जनता दरबारों में ये ही मामले छाए रहते हैं। एसएसपी अपने जनता दरबार में ऐसे मामले सीधे सीओ, एसडीओ और जिलाधिकारी के यहां जांच और कार्रवाई के लिए अग्रसारित करते रहते हैं।

पुलिस प्रशासन के मुताबिक भूमि-विवाद के मामलों में उनका सीधा-सीधा रोल नहीं होता। यूं कहें तो उपर के आदेश के बाद सुरक्षा व्यवस्था देखनी भर होती है।

Uttar Pradesh पुलिस और प्रशासन के बीच इस मसले पर बेहतर तालमेल होगा तो आगे चलकर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की नौबत नहीं आएगी।

-Legend News