Like-comments सिस्टम से Depression में आ रहे हैं यूजर्स

साइकॉलजिस्ट मानते हैं कि सोशल साइट्स पर Like-comments सिस्टम की वजह से यूजर्स को Depression जैसी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है, ‘कई लोगों का आत्मविश्वास Like और comments के साथ ही चलता है। कम Like मिलने से उन्हें Depression भी हो जाता है। कई लोग तो इस बात का बुरा भी मान जाते हैं कि आपने मेरी पोस्ट को Like नहीं किया या उस पर कमेंट नहीं किया। हालांकि ये वे लोग होते हैं, जिनका आत्मविश्वास पहले से कम होता है। इनमें वे लोग भी होते हैं, जो किसी वजह से परेशान होते हैं। इसका एकमात्र फायदा यह था कि जो लोग किसी तरह की हीनभावना महसूस कर रहे हैं, वे इससे खुद को बेहतर महसूस कर सकते हैं। फेसबुक पर Like सिस्टम का नुकसान ही ज्यादा है।
फेसबुक पर दूसरों के पोस्ट पर ज्यादा लाइक्स देखकर आपको जलन होती है? जब आपकी पोस्ट पर औरों के मुकाबले कम कमेंट आते हैं तो आपको बुरा लगता है? आम फेसबुक यूजर की इन परेशानियों को ध्यान में रखते हुए फेसबुक अब लाइक्स छुपाने जा रहा है। हाल ही में आई एक खबर के मुताबिक फेसबुक ने ऑफिशली यूजर्स के पोस्ट्स पर लाइक्स काउंट को हाइड करना शुरू कर दिया है। सबसे पहले ऐसा ऑस्ट्रेलिया में प्लेटफॉर्म पर देखने को मिलेगा।
इसके बाद पोस्ट करने वाला तो अपने लाइक्स और रिऐक्शंस काउंट देख सकेगा लेकिन बाकियों से यह छुपा रहेगा और उन्हें म्यूचुअल फ्रेंड के नाम के साथ रिएक्शंस के आइकन दिखते रहेंगे। इस तरह बाकी यूजर्स एक-दूसरे के पोस्ट पर आने वाले लाइक्स काउंट नहीं देख पाएंगे और इससे कम या ज्यादा लाइक्स की होड़ कम करने में मदद मिलेगी।
यही नहीं, फेसबुक यूजर्स बाकियों की पोस्ट पर आने वाले कमेंट्स की संख्या और अन्य लोगों के पोस्ट पर वीडियो व्यूज भी नहीं देख पाएंगे। फेसबुक ने इस बारे में कहा, ‘हम नहीं चाहते कि फेसबुक पर लाइक्स का कंपटीशन या वॉर देखने को मिले।’
बयान में कहा गया है, ‘यह एक एक्सपेरिमेंट है, जिससे यह पता चलेगा कि लोग इस नए फॉर्मेट को कैसे अपनाते हैं।’
साइकॉलजिस्ट कहते हैं कि अगर वे इसे बंद करने की सोच रहे हैं तो अच्छी बात है। ज्यादा Like की चाहत में तमाम लोग सबसे अलग सेल्फी लेते वक्त अपनी जान की भी परवाह नहीं करते।’
प्लेटफॉर्म पर सुधार की है कोशिश
फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद युवा यूजर्स पर पड़ने वाले सोशल प्रेशर को महसूस कर रहा है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है। साइट का मानना है कि इसके बाद अपने विचार, फोटो और वीडियो पोस्ट करते वक्त लोग ज्यादा सहज हो पाएंगे। सोशल साइट पर कम लाइक्स के चलते तनाव, साइबर बुलीइंग और सुइसाइड तक के मामले सामने आ चुके हैं। फेसबुक का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म पर सुधार का एक कदम है। फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम भी यूजर्स के पोस्ट पर लाइक्स हाइड करने के लिए एक प्रोटोटाइप डिजाइन पर काम कर रहा है। इंस्टाग्राम का प्रोटोटाइप डिजाइन यूजर्स के पोस्ट से लाइक्स छिपा देगा। जिस यूजर ने पोस्ट शेयर किया होगा, वह तो लाइक्स देख पाएगा, लेकिन बाकी यूजर नहीं देख पाएंगे। इंस्टाग्राम की ओर से कहा गया है कि फिलहाल यह इंटरनल टेस्टिंग प्रोटोटाइप है और सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है।
रिश्ते खराब कर रहे हैं लाइक
इस बारे में बात करने पर समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार कहते हैं, ‘समाज में दूसरों से अपनी प्रशंसा सुनना सहज मानव स्वभाव का हिस्सा है। फेसबुक के जरिए एक नया अप्रत्यक्ष संसार खुला था, जहां लोग अनजाने लोगों से भी जुड़ सकते थे। अब लोगों ने इसे अपनी जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बना लिया है। इस पर जहां तक लाइक्स और कॉमेंट्स की बात है, तो इसमें केवल युवा ही नहीं कई बड़ी हस्तियां भी शामिल हैं। मैंने ऐसा कहीं सुना था कि लाइक्स लेने का तो एक बहुत बड़ा बिजनस है। कुछ लोगों को अब यह चिंता होने लगी है कि मेरी पोस्ट पर कम लाइक्स क्यों हैं! इससे रिश्तों में भी खटास आने लगी है। कई लोग यह समझते हैं कि उनकी पोस्ट पर लाइक करना आपकी नैतिक जिम्मेदारी है। अगर आप उनकी पोस्ट पर तुरंत लाइक न करें, तो वे बुरा मान जाते है और आपसे नाराज हो जाते हैं। उन्हें इस बात से मतलब नहीं है कि सामने वाला कितना बिजी है! उन्हें बस आपसे अपनी पोस्ट पर लाइक चाहिए। मेरा मानना है कि वे लोग जो आत्महिंसा और आत्मविश्वास के बॉर्डर पर खड़े हैं, जैसे कि थोड़ा सा कुछ अच्छा हो जाए, तो बहुत खुश हो गए और कुछ गलत हो जाए, तो मन में अपने लिए हिंसा और कुंठा का भाव आ गया। उनके लिए फेसबुक संचार का एक अच्छा माध्यम नहीं है। फेसबुक शायद लोगों के अवासदग्रस्त होने का कलंक अपने माथे नहीं लेना चाहता इसलिए वह यह कदम उठाने की सोच रहा है।’
हर उम्र की चाहत है लाइक
सोशल मीडिया पर नजर रखने वाले लेखक विनीत कुमार बताते हैं, ‘फेसबुक ने जो किया है उसका सिर्फ ये मतलब नहीं है कि कम लाइक से लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा बिजनस टेक है। आपको मालूम होगा कि आज लाइक और कॉमेंट्स खरीदे भी जाते हैं। इससे जो व्यक्तिगत स्तर पर लिख रहे हैं, उनके लाइक और कमेंट्स इस मुकाबले बहुत कम होते हैं। अब जो फेसबुक कर रहा है तो एक बेहतर स्थिति बन सकती है। इससे यह होगा कि लोग और स्थिर तरीके से लिख सकते हैं। इसपर मेरी प्रतिक्रिया बहुत मिलजुली होगी, क्योंकि अगर ऐसा फेसबुक करने जा रहा है तो फिर पेड लाइक्स पर क्या टेक होगा?
कई बार देखा गया है कि आपस में ही या दोस्तो में ही लाइक्स और कमेंट्स को लेकर मुकाबला या नाराजगी हो जाती है। इसको लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी? इस पर विनीत कहते हैं, ‘देखिए इसको मैं ‘वर्चुअल स्टेज का न्यू कास्टिज्म क्लास वॉर’ कहता हूं। और ये खाली टीनेजर में नहीं है, बल्कि मैंने तो कई बार 70 पार के लोगों में भी देखा है, जो यह कहते हैं कि मैंने 30 किताबें लिखी हैं और मेरे पोस्ट पर 200 लाइक्स भी नहीं है। दरअसल हमें सोशल मीडिया पर ऐक्टिव लोग की बायलॉजिकल एज न देखकर उनकी डिजिटल एज देखनी चाहिए।’
बकौल विनीत, ओवरऑल आप मुझसे पूछेंगे तो मैं यही कहूंगा कि अगर आप पब्लिक प्लेटफॉर्म पर हैं, तो नंबर तो मैटर करता है। आप देखिए न लोग वायरल हो रहे हैं और उनको चुनाव का टिकट भी मिल जा रहा है। देखिए फेसबुक अगर नंबर हटा रहा है तो शायद कोई दूसरा पैरामीटर लाए।
-एजेंसियां

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