ऑफिस में काम के दौरान जंक फूड का इस्‍तेमाल, मतलब बीमारियों को न्‍योता

ज्यादातर लोग ऑफिस में काम के बीच-बीच में ही जंक फूड खा लेते हैं और फिर खाना स्किप कर देते हैं लेकिन ऐसा करने से आप मोटापा, डायबीटीज और हार्ट संबंधी बीमारियों को न्‍योता दे रहे हैं। एक स्टडी में ऐसा दावा किया गया है।
क्या आप भी ऑफिस में काम करते वक्त जंक फूड खाते हैं? अगर हां तो सावधान हो जाएं। हाल ही में आई एक स्टडी में दावा किया गया है कि ऑफिस में काम के दौरान जंक या अन्हेल्दी फूड खाने से मोटापा, डायबीटीज और हार्ट संबंधी लाइफस्टाइल डिजीज हो सकती हैं।
दरअसल, ऑफिस में काम करते वक्त कई बार बीच में कुछ न कुछ खाने का मन करता है। उस वक्त हम प्रॉपर खाना न खाकर चिप्स, सैंडविच, बर्गर या पिज्जा जैसे अन्हेल्दी और जंक फूड खा लेते हैं। नतीजा यह होता है कि खाना स्किप कर देते हैं। धीरे-धीरे यह आदत एक लत का रूप ले लेती है और फिर ऑफिस या घर के बाहर भी हम इसी तरह के खाने को तरजीह देने लगते हैं लेकिन सेहत के लिहाज से यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में प्रकाशित स्टडी कहती है कि ऐसा करने से तमाम तरह की लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियां घेर लेती हैं। इस स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने एक अमेरिकी अस्पताल के 600 ऐसे कर्मचारियों को चुना जो नियमित तौर पर उस अस्पताल की कैंटीन का इस्तेमाल करते थे। इन कर्मचारियों ने काम के दौरान अस्पताल की ही कैंटीन से जंक फूड लिया। निरीक्षण करने पर पता चला कि जो लोग कैंटीन से जंक और अनहेल्दी खाना लेते थे, उनमें सबसे ज्यादा मोटापा देखा गया। इतना ही नहीं, इन कर्मचारियों में उन लोगों के मुकाबले डायबीटीज और हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा काफी अधिक देखा गया, जो हेल्दी चीजें ले रहे थे।
इस स्टडी के परिणाम से आसानी से समझा जा सकता है कि वर्कप्लेस पर हेल्दी खान-पान की आदतों का संपूर्ण डायट और हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़ता है। यह स्टडी यह समझने और समझाने के लिए काफी है कि हेल्दी डायट हेल्दी लाइफस्टाइल और बीमारियों से दूर रहने के लिए कितना जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि वर्कप्लेस पर ऐसे वेलनेस प्रोग्राम बनाए जाएं तो कर्मचारियों की हेल्थ और सही खान-पान पर फोकस करें।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की जेसिका एल मेकर्ली के अनुसार, ‘वर्कप्लेस वेलनेस प्रोग्राम्स के जरिए लोगों के लाइफस्टाइल में प्रभावपूर्ण तरीके से बदलाव कर उसे सुधारा जा सकता है। हालांकि ऐसे प्रभावी प्रोग्राम बनाना काफी चैलेंजिंग रहा है। लेकिन उम्मीद है कि हमारे इन निष्कर्षों को ध्यान में रख इस दिशा में काम किया जाएगा।’
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »