ईरान पर Military कार्यवाही को एक लाख 20 हजार सैनिक भेजेगा अमेरिका

वाशिंगटन। अमेरिका ने साथ ईरान से तनातनी को Military कार्यवाही की भेंट चढ़ाने का पूरा प्‍लान बना लिया है और युद्ध का खाका तैयार करते हुए एक लाख 20 हजार सैनिकों को ईरान भेजने की तैयारी कर ली है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगियों के साथ हुई एक बैठक में अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री पैट्रिक शानहन ने अपडेट सैन्य प्लान पेश किया। इसमें पश्चिमी एशिया में एक लाख 20 हजार सैनिकों को भेजने की बात कही गई है।

रक्षा मंत्री ने गत गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को अपने इस प्लान की जानकारी दी। इनमें से कुछ अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार को बताया कि यह सैन्य समीक्षा ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन आर बोल्टन के आदेश पर की गई थी। ईरान को लेकर उनका नजरिया काफी सख्त है।

नई योजना में हालांकि थल हमले की बात नहीं की गई है क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा सैनिकों की जरूरत पड़ेगी। इस बात को लेकर बेहद अनिश्चितता है कि अफगानिस्तान और सीरिया से अमेरिकी बलों की वापसी की मांग करने वाले ट्रंप वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक पश्चिम एशिया में फिर भेजेंगे।

ट्रंप प्रशासन में मतभेद
ट्रंप प्रशासन में ईरान मामले को लेकर मतभेद भी उभरे हैं। कुछ अधिकारियों का कहना है हि योजना अभी प्रारंभिक अवस्था में है जबकि ईरान से गंभीर खतरा है। वहीं कुछ अन्य अधिकारियों ने ईरान मामले का कूटनीतिक समाधान निकालने का आग्रह किया है।

इराक की तर्ज पर हमले की आहट
बैठक में जब एक लाख 20 हजार सैनिकों को भेजने का खाका पेश किया गया तो कई अधिकारी हैरान रह गए। अमेरिका ने जब 2003 में इराक पर हमला किया था तब करीब एक लाख 30 हजार सैनिक मोर्चे पर भेजे गए थे।

विमानवाहक पोत और बमवर्षक भी तैनात
ईरान पर दबाव बनाने के लिए पश्चिम एशिया में अमेरिका ने पहले ही एक विमानवाहक पोत और बमवर्षक विमान तैनात कर दिए हैं। पैट्रियॉट मिसाइलों के अलावा कई अन्य युद्धपोतों की भी तैनाती की गई है।

यूरोपीय देशों ने जताई चिंता
सहयोगी यूरोपीय देशों के राजनयिकों ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो से मुलाकात की और कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वे चिंतित हैं।

अमेरिका के परमाणु करार से हटने से बढ़ा तनाव
ट्रंप ने पिछले साल आठ मई को ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने का एलान किया था। इसके बाद उसके तेल निर्यात को रोकने के साथ ही उस पर कई प्रतिबंध लगा दिए। ट्रंप ने ईरान पर यह कार्रवाई उसके परमाणु कार्यक्रम और आतंकी गतिविधियों को लेकर की थी।

ईरान को भारी पड़ेगी गलती : ट्रंप
ट्रंप ने सोमवार को कहा, ‘हम आने वाले समय में देखेंगे कि ईरान के साथ क्या होता है? अगर उन्होंने कोई हरकत की तो यह बहुत बड़ी गलती होगी और उन पर भारी पड़ेगी।’
-एजेंसी

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