एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 30 करोड़ डॉलर का निवेश करेगा अमेरिका

सिंगापुर। अमेरिका ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाने के लिए 30 करोड़ डॉलर का निवेश करेगा। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने सिंगापुर में दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन (आसियान) शिखर सम्मेलन से इतर एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा की है। अमेरिका इस इलाके में चीन के दबदबे को काउंटर करना चाहता है। इस कदम को अमेरिका की इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पॉम्पियो ने चीन को लेकर कड़ा रुख दिखाया है, जिससे दोनों देशों के बीच चल रहा ट्रेड वॉर सुलझता नहीं दिख रहा।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक इसमें 29 करोड़ डॉलर से अधिक फॉरेन मिलिटरी फाइनैंसिंग पर खर्च किए जाएंगे। समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने, मानवीय सहयोग/आपदा राहत और पीसकीपिंग सेवाओं पर इस पैसे को खर्च किया जाएगा। इसके अलावा 85 लाख डॉलर इंटरनेशनल नार्कोटिक्स जैसे ट्रांसनेशनल क्राइम से निपटने के लिए दिए जाएंगे।
वॉशिंगटन डीसी में इंडो-पसिफिक बिजनस फोरम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पॉम्पियो की बैठक के बाद यह फैसला सामने आया है। पॉम्पियो ने कहा, ‘यह निवेश समुद्री सुरक्षा को मजबूती, मानवीय सहायता, शांति बनाए रखने की क्षमताओं और अंतर्राष्ट्रीय खतरों से सामना करने वाले कार्यक्रमों को बेहतर बनाएगा।’ समाचार एजेंसी एफे की खबर के मुताबिक, वह आसियान-अमेरिका सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए अन्य देशों के अपने समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे।
अमेरिका एक टॉप अधिकारी ने बताया कि पॉम्पियो ने साउथ चाइना सी में चीनी सैन्यीकरण और आसियान देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में न्याय आधारित व्यवस्था बनाए रखने को लेकर चर्चा की। पॉम्पियो ने बैठक में हिंद-प्रशांत रणनीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की प्रतिबद्धता को भी उल्लेखित किया।
चीन के साथ ट्रेड व्यापार सुलझने के आसार नहीं
आसियान बैठक की शुरुआत वॉशिंगटन और पेइचिंग के बीच एक कड़वे ट्रेड वॉर के साथ हुई। इस संबंध में टिप्पणी करते हुए पॉम्पियो ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप को एक अनुचित व्यापार व्यवस्था मिली है। ऐसी व्यवस्था जहां चीनियों द्वारा अमेरिकी कंपनियों में अमेरिकी वर्कर्स के साथ पारस्परिक रूप से या निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया जाता है। ट्रंप प्रशासन इसे सही करने की कोशिश कर रहा है।’ पॉम्पियो के तेवर से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहा ट्रेड वॉर लंबा खिंच सकता है।
-एजेंसियां

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