US मिलिट्री ने अपनी प्रशांत कमांड का नाम बदलकर किया हिंद-प्रशांत कमांड, भारत के साथ रिश्‍तों को अहम बताया

अमेरिकी मिलिट्री ने अपनी प्रशांत कमांड का नाम बदल कर हिंद-प्रशांत कमांड कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने बुधवार को इसका ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका के रिश्ते अहम हैं। बता दें कि अमेरिका की प्रशांत कमांड दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य कमांड में से एक है। इसमें करीब 3.75 लाख सैन्य और असैन्य कर्मचारी शामिल हैं। प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की सारी सैन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी इसी दल की है।
सेना के समारोह के दौरान बदला नाम
मैटिस ने बुधवार को सेना के एक समारोह के दौरान अपने भाषण में कहा, “प्रशांत और हिंद महासागर के साथियों और सहयोगियों के साथ रिश्ते क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए काफी अहम हैं। इसी लिए प्रशांत और हिंद महासागर के बढ़ते संपर्क को देखते हुए हम अमेरिकी प्रशांत कमांड का नाम बदल कर अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमांड करते हैं।”
चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका-भारत ने सहयोग बढ़ाया
2016 में भारत और अमेरिका ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसके तहत दोनों देश मरम्मत और सप्लाई के लिए एक-दूसरे की थल, हवाई और नौसैन्य बेस इस्तेमाल कर सकते हैं। माना जाता है कि उस दौरान दोनों ने ये फैसला क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों को देखते हुए लिया था।
हालिया समय में चीन ने श्रीलंका के पास ही एक बंदरगाह का निर्माण शुरू कर दिया है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर भारत और अमेरिका दोनों की चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे में दोनों देशों में रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं।
10 सालों में दोनों देशों के बीच हुए 1 लाख करोड़ के रक्षा समझौते
अमेरिका लंबे समय से भारत का अहम रक्षा साझेदार बना हुआ है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है। पिछले एक दशक में दोनों के बीच 15 बिलियन डॉलर्स के रक्षा सौदे हो चुके हैं।
बता दें कि भारत के रूस के साथ भी अच्छे रक्षा संबंध हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पिछले साल ही उस कानून पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, जिसमें रूस से रक्षा सौदा करने वाले देशों को अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध की चेतावनी दी गई है, लेकिन जेम्स मैटिस भारत के लिए कानून में छूट देने की भी कोशिश में जुटे हैं।
-एजेंसी

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